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आपसी संवाद से संबंधों को मिलेगी संजीवनी - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
आपसी संवाद से संबंधों को मिलेगी संजीवनी

आपसी संवाद से संबंधों को मिलेगी संजीवनी

बातचीत

एक आदर्श व्यक्तित्व को संपूर्ण बनाने में 16 कला में संवाद भी एक कला है। इस कला में जो सुधीजन जितना निपुण, होशियार और माहिर होता है उसके संबंधों की नींव उतनी ही मजबूत और स्थायी होती है। पारिवारिक रिश्तों में असंतुलन, विघटन और तनाव का एक कारण आपसी संवाद का अभाव भी है। जिन परिवारों में आपसी संवाद जितना स्पष्ट और प्रेमपूर्ण होता है उनकी नींव उतनी ही विश्वास और भरोसे की कसौटी पर खरी होती है। आज जिंदगी की भागमभाग में हमारे पास इतना भी समय नहीं बचा है कि परिवार के सदस्यों के साथ दो वक्त बैठकर वार्तालाप कर सकें। एक-दूसरे के दिल का हाल जान सकें। वह किस मानसिक पीड़ा और दर्द से गुजर रहे हैं, इसका हमें ज्ञान ही नहीं है। संवाद की कमी से जब रिश्तों में जंग लग जाती है तो धीरे-धीरे उनकी बुनियाद भी कमजोर होने लगती है। रिश्तों की ये दीमक उन्हें बर्बादी के दामन में धकेल देती है। ऐसे में जरूरत है तोपरिवार के साथ समाज में बेहतर संवाद बनाए रखने की ताकि रिश्तों में गर्माहट बनी रही।

संवाद पर टिका है पिता-पुत्र का रिश्ता

पिता-पुत्र की विचारधारा में आपसी मतभेद का कारण एक पीढ़ी के फासले के साथ संवाद की कमी भी है। पिता-पुत्र में आपसी संवाद जितना प्रगाढ़ होगा तो सामंजस्य उतना ही बेहतर होगा। क्योंकि जब किसी मुद़्दे पर परिवार के सदस्य बैठकर विचार-मंचन करते हैं तो निश्चित रूप से उसके कई पहलु निकलकर सामने आते हैं। इसके माध्यम से हम बेहतर से बेहतर समाधान ढूंढ लेते हैं। वहीं मां, बेटी के साथ सहेली की तरह व्यवहार करती हैं तो निश्चित मानिए की वह जीवन में आने वाली प्रत्येक समस्या पर आपसे जरूर संवाद करेगी। रिश्तों में ऊर्जा भरने के लिए संवाद एक सेतु की तरह है।

माता-पिता बच्चों से हर मुद्दों पर करें बात

माता-पिता बच्चों से हर मुद्दों पर करें बातमाता-पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चों के साथ उनके भविष्य में आने वाली परिस्थितियों के साथ जीवन के हर पहलु पर संवाद करें। इससे उनके गलत मार्ग पर जाने की संभावना नगण्य हो जाती है। वह अपनी हर छोटी-बड़ी समस्या पर माता-पिता से खुलकर बात कर पाते हैं। उनमें आत्म विश्वास के साथ निर्भयता आती है। कई बार बच्चे डर और भय के माहौल में मन की बात नहीं कह पाते और धीरे-धीरे कुंठा का शिकार होकर हीनभावना से ग्रसित हो जाते हैं।

संवाद में मनोस्थिति का विशेष महत्व

कई बार हमारे किसी के प्रति शब्द अच्छे होते हैं लेकिन मन में उनके प्रति वह शुभ भावना नहीं होती है। ऐसे में सामने वाले व्यक्ति को आपके बाइव्रेशन महसूस होते हैं और हमारी बात का सामने वाला व्यक्ति गलत अर्थ निकाल लेता है। इसलिए संवाद में मनोस्थिति का विशेष महत्व है। यदि संवाद के दौरान हमारी मनोस्थिति सकारात्मक है तो उसी तरह के बाइव्रेशन सामने वाले को महसूस होते हैं।इसलिए जीवन में सभी के साथ सौहाद्र्रपूर्ण रिश्तों को बनाए रखने के लिए संवाद का होना अनिवार्य और पहली शर्त है।

आत्मा का परमात्मा पिता से संवाद
व्यक्ति से व्यक्ति का संवाद जीवन में अहम है तो आत्म ज्योति का परमात्म ज्योति से संवाद आत्मा के उत्थान और कल्याण के लिए अहम है। कितने समय से खुद का खुद से और परमात्मा पिता से संवाद नहीं हुआ है? आत्मा का हाल नहीं जाना है? कब से अपने मन की गहराइयों तक नहीं पहुंचे हैं? मन को मारते ही जा रहे हैं कि उसे सुधारने की ओर भी कदम बढ़ाए हैं? वहीं प्रभु पिता भी आपके दिल का हाल सुनने के लिए रोज प्रतीक्षा में रहते हैं। राजयोग मेडिटेशन ही वह विधा, जरिया और सेतु है जो आत्मा का परमपिता परमात्मा से संवाद कराती है।

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