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भगवान इंगोले के जैविक खेती की कमाल

भगवान इंगोले के जैविक खेती की कमाल

महाराष्ट्र राज्य समाचार

आसपास के राज्य और बांग्ला देश के बाजार मे भी प्राप्त की हिस्सेदारी

शिव आमंत्रण, नांदेड़। महाराष्ट्र सरकार के ‘जो फलेगा वो बीकेगा’ नीति के अनुसार, महाराष्ट्र के नांदेड़ में कलेक्ट्रेट परिसर में अभिभावक मंत्री अशोकराव चव्हाण द्वारा ‘उत्पादक से ग्राहक तक’ चेन मजबूत करने वाले किसान बाजार का उद्घाटन किया गया।
मालेगांव के प्रगतिशील जैविक किसान भगवान इंगोले ने पारंपरिक कृषि विकास योजना के तहत मालेगांव ओम शांति ऑर्गेनिक फार्मर ग्रुप की स्थापना की है। उनका स्टॉल भी रैयत बाजार में लगाया गया था।
नांदेड़ से 15 किलोमीटर दूर मालेगांव से भगवान इंगोले दस वर्षों से विभिन्न फसलों की जैविक खेती में काम कर रहे हैं। क्षेत्र के किसानों को एक साथ लाकर, उन्होंने हल्दी, पाउडर, गुड़, अनाज आदि के समूह प्रमाणीकरण और मूल्यवर्धन द्वारा राज्य के साथ आसपास के राज्य और बांग्ला देश में उन्होने बाजार हिस्सेदारी प्राप्त की है।

ग्रुप और कंपनी की स्थापना
-सेंद्रीय खेती का लाभ गांव के सब लोगों को हो, उनके माल को भी बाजार में भाव मिले इस उद्देश से 1 जनवरी 2021 से पारंपरिक कृषि विकास योजना के अंतर्गत मालेगांव ओमशांती आरगेनिक किसान ग्रुपकी उन्होने स्थापना की।
-34 किसान भाईयों के खेत में इस योजना द्वारा फसल, सब्जी, फल आदी का उत्पादन लिया।
-शुरूआत में हर मास किसानों के पास जाकर सेमिनार किये, ध्यानधारणा की, किसानों की समस्याओं का समाधान किया, नया तंत्रज्ञान, ज्ञान पर चर्चा की।
-बंधु प्रहलाद के नेतृत्व मे अभी किसान मित्र उत्पादक कंपनी की स्थापना की है।
-कंपनी के सदस्यों द्वारा उत्पादित करीबन 150 टन सेंद्रिय हल्दी की गतसाल बांग्ला देश में निर्यात की।
-ग्रुप के माध्यम से पौधा रोपण, मट्टी परीक्षा, जल संरक्षण के बारे में किसानों में जागृति की।

स्वास्थ्य दायक वस्तुओं की प्रत्यक्ष बिक्री
-ग्रुप के माध्यम से नांदेड शहर में दो जगह विठोबा प्राकृतिक सब्जी बिक्री केंद्र शुरू किया। उसमे आरगेनिक सब्जियां, दलहन, डेयरी उत्पाद आदि माल शामिल था। सोशल एक्टिविस्ट एकनाथराव पावडे का भी इसके लिए सहयोग मिला।
-इस बिक्री ने बेरोजगार युवाओं को रोजगार प्रदान किया है। इसके अलावा, यह ग्रुप प्रतिदिन 10,000 से 15,000 रुपये तक मुनाफा कमाता है।
-सबका माल चयनित किसान बारी-बारी से बेचते हैं और इससे सभी का समय बच जाता है।
-अर्बन उपभोक्ताओं को स्वस्थ कृषि उत्पाद मिलते हैं।

बॉन्ड लार्वा दिखाएँ, पुरस्कार प्राप्त करें
पिछले साल एक एकड़ कार्बनिक पदार्थ पर कपास डाला गया था। फसल सुरक्षा के लिए गेंदा, मक्का, शर्बत, अरंडी जैसी मिश्रित फसलों को लिया गया। प्रत्येक पखवाड़े में दशपर्णी अर्क, जीवामृत, वेस्ट डे कंपोजर आदि का छिडक़ाव किया। उन्होंने कपास पर गुलाबी बांड लार्वा दिखाने और पुरस्कार प्राप्त करने की अपील की थी। परिणामस्वरूप, कृषि अधिकारियों के साथ-साथ क्षेत्र के किसानों ने दौरा किया और निरीक्षण किया लेकिन कोई लार्वा नहीं मिला।
श्री. इंगोले का कहना है कि इस प्रयोग से उनका मनोबल बढ़ा है।

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