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किसान देश की शान है और त्याग-तपस्या का दूसरा नाम है - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
किसान देश की शान है और त्याग-तपस्या का दूसरा नाम है

किसान देश की शान है और त्याग-तपस्या का दूसरा नाम है

मध्य प्रदेश राज्य समाचार

ऑनलाइन कार्यक्रम में बीके सुमंत के विचार

शिव आमंत्रण, नरसिंहपुर।म.प्र. के नरसिंहपुर में राष्ट्रीय किसान दिवस अलग रीति से मनाया गया। इस अवसर पर ग्राम विकास प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बीके सुमंत ऑनलाइन के ज़रिए ही श्रोताओं से रूबरू हुए और प्रभाग द्वारा किसानों की उन्नति के लिए चलाए जा रहे शाश्वत यौगिक खेती अभियान की संक्षिप्त में जानकारी देते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक के बी सहारे, विषय वस्तु विशेषज्ञ आशुतोष शर्मा, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी बीडी आर समेत अन्य अतिथियों ने अपने सुंदर विचारों से सभी को लाभान्वित किया।
सुमंत भाई ने कहा, किसान देश की शान है और वह त्याग – तपस्या का दूसरा नाम है। यदि भारत को उन्नतशील और सबल राष्ट्र बनाना है तो किसानों को समृध्द और आत्मनिर्भर बनाना होगा। राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए हर एक नागरिक में किसानों के प्रति आभार की भावना जागनी चाहिए, कारण उसी के मेहनत से निकली फसल पर हम अपने जीवन का गुजारा करते है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश से ब्रह्माकुमारीज के ग्राम विकास प्रभाग द्वारा किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जाता है, उन्हे ट्रेनिंग भी दी जाती है।
बीके कुसुम ने कहा, भारत की परंपरा आदिकाल से ऋषि और कृषि दोनों से चली आ रही है। प्राचीन काल में भारत सोने की चिडिया कहा जाता था। ये धरती धन-धान्य, वैभवों से भरपूर थी, ऐसी स्वर्णिम दुनिया बनाने में किसानों की भूमिका महान है।
मौके पर बीके प्रीति ने कृषि में राजयोग को शामिल करने के लाभ बताते हुए उसकी सुंदर अनुभूति करायी। बाल कलाकारों द्वारा स्वागत नृत्य एवं युवा कलाकारों द्वारा लघुनाटिका प्रस्तुत की गई। सेवाकेंद्रो पर पधारे किसान भाईयों का बीके कुसुम ने गमछा ओढ़ाकर सम्मान किया। बीके मुकेश ने आभार व्यक्त किया।

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