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स्वर्णिम समाज की स्थापना में नैतिक मूल्यों का सर्वाधिक महत्व

स्वर्णिम समाज की स्थापना में नैतिक मूल्यों का सर्वाधिक महत्व

मध्य प्रदेश राज्य समाचार

शिव आमंत्रण, छतरपुर (मप्र)| यही भारत देवभूमि, स्वर्णिम भारत, विश्व गुरु कहलाता था। जिसमें हर भारतवासी देवता कहलाते थे। लेकिन क्या कोई आज अपने को देवता कहला सकते हैं? नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण आज भी हम देवी-देवताओं
की महिमा में गाते हैं संपूर्ण निर्विकारी, मर्यादा पुरुषोत्तम और हम सभी चाहते भी हैं कि एक ऐसा समाज हो जहां एक धर्म, एक भाषा, एक राष्ट्र हो। जैसा संकल्प, वैसी सृष्टि। समय की मांग है परिवर्तन। परिवर्तन की शुरुआत पहले स्वयं से करनी है, क्योंकि हमारे जीवन में जब नैतिक मूल्यों का समावेश होगा, तभी हम एक सभ्य समाज, सुंदर राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं । उक्त उद्गार ब्रह्माकुमारीज़ लवकुशनगर द्वारा समाज सेवा प्रभाग के अंतर्गत सकारात्मक परिवर्तन का वर्ष विषय पर आयोजित कार्यक्रम में छतरपुर प्रभारी बीके शैलजा बहन ने व्यक्त किए। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघ संचालक डॉ.
नारायण सिंह, नगर संचालक मनोज चतुर्वेदी, सभी कार्यकर्ता, बजरंग दल के जिला मंत्री योगेंद्र सिंह, गौसेवा समिति अध्यक्ष शिवपूजन अवस्थी, जन परिषद अभियान अध्यक्ष अनिल निगम, सेवाकेंद्र प्रभारी बीके सुलेखा बहन मुख्य रूप से मौजूद रहीं।

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