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जब जलता है ज्ञानदीप तब होते है खुशहाल, होती है दिवाली - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
जब जलता है ज्ञानदीप तब होते है खुशहाल, होती है दिवाली

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बिहार राज्य समाचार

हिंदी बाजार सेवा केंद्र पर सजी लक्ष्मी की चैतन्य झां

शिव आमंत्रण, मोतिहारी, बिहार। ब्रह्माकुमारीज के हिंदी बाजार सेवा केंद्र पर लक्ष्मी की अति आकर्षक चैतन्य झांकी सजाई गई। लक्ष्मी के रूप में 9 वर्षीय सान्वी के चेहरे से दिव्यता झलक रही थी। झांकी मे लक्ष्मी के हाथो नोटों की वर्षा दिखाई गई।
सेवा केंद्र को नए अंदाज से सजाया गया था। मुरली के बाद उपस्थित भाई बहनों को संबोधित करते हुए बीके मीना ने कहा, कि दीपावली का जो पर्व होता है उसमें लक्ष्मी का हम आहवान करते हैं और लक्ष्मी के स्वागत के लिए हम अपने घरों के कोने कोने की सफाई करते हैं। फिर बड़े ही आदर के साथ लक्ष्मीपूजन करते हैं। दीपावली के आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, भक्ति मार्ग में बताया गया है कि श्रीराम जब रावण एवं असूरों के संहार के बाद विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे तो इस खुशी में वहां दीप जलाकर अयोध्या वासीयोंने जश्न मनाया था। रावण के दस सिर का वध मूलत: पांच विकार पुरुष और पांच विकार स्त्री का प्रतीक होता है। विकारों को जब हम सहज राजयोग के द्वारा वश में कर देते हैं तब जीवन खुशहाल और प्रकाशमय हो जाता है। पांच हजार वर्ष पूर्व के पुरूषोत्तम संगम युग मे हुई विजय के यादगार मे द्वापर से दीपावली मनाने की प्रथा आरंभ होती है।
संचालन के दौरान बीके अशोक वर्मा ने कहा, कि अपने अंदर की जागृति हीं वास्तविक दीपावली होती है। जब मनुष्य के अंदर ज्ञान दीपक जल जाता है उसके बाद जीवन मे रौशनी ही रौशनी आ जाती है। ब्रह्माकुमारीज संस्था में सहज राजयोग के अभ्यास से जीवन को खुशहाल किया जाता है। अतिथियों का स्वागत सेवा केंद्र प्रभारी बीके विभा ने किया।
सुगौली सेवा केंद्र पर भी लक्ष्मी की चैतन्य झांकी सजाई गई। सेवाकेंद्र प्रभारी बीके मीरा ने दीपावली एवं लक्ष्मी पूजा के आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए कहा, कि जिस तरह से हम अपने घर के कोने कोने की सफाई करते हैं और लक्ष्मी का आह्वान करते हैं उसी तरह से दीपावली के अवसर पर इस बार हम अपने मन के अंदर के कोने कोने में छुपे हुए अवगुण, दुर्गुण आदि की सफाई जड़ मूल से करें। यही हमारे लिए सच्ची दीपावली होगी।

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