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आत्मा को दिव्यगुणों से सजाना सच्चा सौंदर्य - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
आत्मा को दिव्यगुणों से सजाना सच्चा सौंदर्य

आत्मा को दिव्यगुणों से सजाना सच्चा सौंदर्य

आध्यात्मिक

पिछले अंक का शेष…

We get what we are in life… Dr. Sachin
Dr BK Sachin

नए-नए शब्द आते हैं उनके अर्थ ढूंढ़ो, मुरली में नई-नई बातें आती हैं, नए-नए मुहावरे आते हैं उनका अर्थ ढूंढ़ो।

7. फैशन की गृहस्थी- नईनई फैशन, क्रीम, पाउडर, कलर ड्रेस, गहनें, टैटू, मेहंदी। हमारा सौंदर्य पवित्रता है, सादगी है। कपड़ा टाइट न हो ढीला हो, ट्रांसपैरेंट न हो, ग्लैमरस न हो, बहनों के कपड़े पुरुषों जैसा न हो, बहुत ही शालीन हो, जिसको देखकर पवित्र भाव प्रकट हो, दूसरों के मन में। तो स्वयं की शालीनता और ये सारा जो कुछ है संसार में क्रीम, पाउडर इन सबकी हमें जरूरत नहीं है। व्हाइट में भी फैशन, वाइट में नई-नई वैरायटी, इसकी कोई जरूरत ही नहीं है। हमारा ड्रेस बाबा ने ऑलरेडी इतना अच्छा दिया है, इतनी शालीन, इतनी प्योरिटी है, उस ड्रेस में की उसी में सब सौंदर्य समाया हुआ है और हमारा सौंदर्य शरीर का सौंदर्य नहीं है, आत्मा का सौंदर्य हैं। ऐसे वस्त्र न हों कि किसी का हममें आकर्षण हो जाए।

7-Gossip गृहस्थी- Gossip अर्थात्झ गमुई-झगमुई- इसने क्या किया, उसने क्या किया, परचिंतन पर दर्शन की बातें, ये बहन पहले वहां थी अब यहां क्यों चली आई। ये भाई पहले उस डिपार्टमेंट में था अब यहां क्यों आ गया, इसका क्या हुआ उसका क्या हुआ, ये दिखाई नहीं देता, उसका क्या हुआ? इधर- उधर की बातें और उसकी चर्चा और विस्तार। जितना जो समाचार इंट्रेस्टिंग होता उतना ही व्यर्थ होता है। यहां ये हुआ वहां वो हुआ। तुमको उससे क्या करना है। माइंड यौर ओन बिजनेस किसी के पर्सनल अफेयर में हमको जाना ही नहीं है। इसने शादी कर ली तो कर ली, अब हम क्या करें, अब किससे की, कहां की, कब की हमको क्या करना है। उसका भाग्य वहां तक ही था, अब चला गया बाय-बाय। ख़ुश रहो, जहां हो मिलो तो ज्ञानयोग की बातें, मिलो तो बाबा ने वरदान में क्या कहा, स्लोगन में क्या कहा, आज की मुरली में कौन से नए शब्द, बात थी, ये जो शब्द हैं इसका क्या अर्थ है। नए-नए शब्द आते हैं उनके अर्थ ढूढ़ो, मुरली में नई-नई बातें आती हैं, नए-नए मुहावरे आते हैं उनका अर्थ ढूंढ़ो। इतना सारा काम है ज्ञान की चर्चा, योग के नए प्रयोग करना, विज्ञान का अध्ययन, ज्ञान की गहराई में जाना। ये सब छोड़कर झरमुई-झगमुई में जाना,फंसना मूर्खता है।

8-हंसी मजाक की गृहस्थी– किसी से इतना हंसी-मजाक, इतना हंसी-मजाक कि कब दोस्ती हो गई और कब क्या हुआ पता भी नहीं चला। शालीनता में रहना है। हंसी-मजाक बहुत अच्छी चीज है परंतु गंभीरता, उससे अच्छी चीज है और ये बैलेंस होना चाहिए। हंसी-मजाक हो पर उसमें विकार की वायु न हो। किसी में इतनी हिम्मत न हो कि आकर हमसे कुछ भी बात कर ले व्यर्थ की। थोड़ा सा उनके मन में डर रहे की बहन जी हैं। इतनी चंचलता न हो स्वभाव में। कईयों में चिल्लाने की आदत होती है, कभी चिल्लाने का नहीं। हम चलें तो पता भी न चले कि हम यहां से चले हैं। किसी के लिए बाधा नहीं बनना है। हमारी हंसी मजाक ऐसी न हो कि दूसरों को लगे कि इस तक पहुंचना बहुत ही आसान है। विकारी भावनाओं की हिम्मत बढ़ जाएगी, ऐसी हमारी हंसी-मजाक न हो और चुपके-चुपके हंसी-मजाक न हो, किसी विशिष्ट एक व्यक्ति के साथ न हो, हो तो सार्वजनिक हो। ठीक है थोड़ा एंटरटेन्मेंट किसी विशेष के साथ हुआ तो वह बंधन बन जाएगा।
क्रमश: …

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