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डायबिटीज के दुष्प्रभाव - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
डायबिटीज के दुष्प्रभाव

डायबिटीज के दुष्प्रभाव

अलविदा-डायबिटीज़

शिव आमंत्रण, आबू रोड। ईश्वर की सबसे बड़ी सौगात है हमारी आंखे। कहावत है ‘आंखें हैं तो जहान है।’ क्या आपको पता है कि डायबिटीज अगर लम्बे समय तक अनियन्त्रित रहती है तो उसका दुष्प्रभाव हमारी आंखों पर पड़ सकता है। दुनिया में अंधापन (Blindness) का मुख्य कारण मोतियाबिन्द (Cataracts) है। परन्तु दूसरा मुख्य कारण डायबिटीज है। आज कितने सारे डायबिटीज के दुष्प्रभाव के कारण दृष्टिहीन हैं। लगभग ३०-४०’ डायबिटीज मरीजों के आंखों पर डायबिटीज का असर तो हो ही जाता है।
तो आईये हम देखते हैं कि डायबिटीज का हमारी आंखों से क्या संबंध है?
हम पहले से ही चर्चा कर चुके हैं कि डायबिटीज केवल एक शुगर की बीमारी ही नहीं है, बल्कि यह हमारी सारी रक्त नलिकाओं को भी प्रभावित करता है। जब छोटी-छोटी रक्त नलिकाओं पर प्रभाव पड़ता है तो ब्लॉकेज (Blockade) शुरू हो जाता है और परिणाम स्परूप हमारे गुर्दे, हाथ पांव के स्नायू तथा आंखों पर असर दिखाई देता है जिसे मेडिकल भाषा में Nephropathy, Neuropathy, Retinopathy कहा ककजाता है और इन सबको Microvascular Complications कहा जाता है। शुरूआत में जब रक्त की मात्रा बहुत बढ़ जाती है तो शुगर हमारी ऑखों के LENCE के अनदर प्रवेश कर जाती है। और साथ-साथ पानी भी, जिसके कारण LENCE में सूजन आ जाता है और मरीजों को धुंधला (BLURRING ) दिखाई देता है। ऐसे समय पर अधिकांश लोग आंखों की चेकिंग कर अपने चश्मां का नम्बर ही बदल लेते हैं। परन्तु जैसे ही सही उपचार के कारण रक्त में शुगर की मात्रा सामान्य रहने लगती है तो फिर वह चश्मा बेकार अनुभव होने लगता है। क्योंकि LENCE की सूजन कम हो जाने से नम्बर पुन: बदल जाता है। इसलिए सदैव ध्यान रखें कि जब भी रक्त में शुगर की मात्रा ज्यादा है अर्थात् डायबिटीज नियंत्रण में नहीं है, कभी भी अपना चश्मा नहीं बदलें। पहले तो सही उपचार द्वारा अपना ब्लड शुगर को नियंत्रण में लाए अर्थात् सामान्य रखें। दो से तीन महीने तक अगर शुगर की मात्रा सामान्य है और फिर भी देखने में कुछ समस्या महसूस हो रहा है तो अवश्य ही चक्षु विशेषज्ञ से परामर्श करें और वे अगर चश्मा बदलने की राय देते हैं तो ही बदलें। अगर किसी का डायबिटीज लम्बे समय तक अनियंत्रित है। इसका दुष्प्रभाव आंखों पर तो पड़ता ही है। आंखों की पलकोंं में बार-बार फोड़े निकल सकते हैं। आंखों की गहरी परतों पर भी INFECTION हो सकता है। ऑखों की नस (NERVL ) पर असर हो कर पलकों पर DROOSING हो जाती है। मरीज फिर आंखें खोलकर देखने के लिए असमर्थ अनुभव करता है।
किन्तु दुष्प्रभाव आंखों के अन्दर परदे (RETINA) पर हो जाता है तो इसे RETINOPATHY कहा जाता है। शुरूआत में कुछ भी लक्षण देखने मे नहीं आ सकता है अर्थात मरीज को कभी अनुभव नहीं होता है। परन्तु धीरे-धीरे आंखों के सामने काले बादलों की तरह छाया दिखाई देगी। फिर अंत में रक्त स्राव होकर व्यक्ति बिल्कुल अंधा हो जाता है।
कुछ मरीजों की आंखों का प्रेशर बढ़ जाता है। परिणामत: काला पानी (GLAUCOMA) हो जाता है। फिर मरीज आंखों में बहुत दर्द अनुभव करता है और सही उपचार न होने से अंधा हो जाता है। दुष्प्रभाव से बचने के उपाय-
1- अपना ब्लड शुगर नियंत्रित रूप से चेक कराते रहें। महीने में कम से कम एक दिन अवश्य चेक कराएं। 24 घंटा शुगर नियंत्रण में रहा है या नहीं इसको जानने के लिए एक दिन में चार बार अवश्य चेक कराएं। फास्टिंग और नास्ता, दोपहर का भोजन तथा रात्रि भोजन के बाद भी अवश्य चेक कराएं। फास्टींग शुगर 100 मिग्रा के आस पास होना चाहिए और खाने के बाद150 मिग्रा के नजदीक। हर तीन महीने में HLAIC TEST अवश्य कराते रहें। 7% अथवा उससे कम होना अच्छी निशानी है।
2- ब्लड शुगर के साथ-साथ ब्लड प्रेशर तथा कोलेस्ट्रॉल अवश्य चेक कराते रहें। अगर BP अनियंत्रित है आंखों के परदे पर HIGH BLOOD SUGER का असर हो सकता है और व्यक्ति अंधा भी हो सकता है।
3- साल में एक बार अपना EYE SURGEON से परामर्श कर अपनी आंखों का परदा का चेक अवश्य कराते रहें।
4- आंखों में तकलीफ अनुभव होने से तुरंत अपरामर्श अवश्य लें।

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