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कल्याण की भावना सभी के लिए रखें - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
कल्याण की भावना सभी के लिए रखें

कल्याण की भावना सभी के लिए रखें

समस्या-समाधान

अब समय केवल कमाई का है इसलिए अब नया हिसाब-किताब बनाना बन्द करो और हर आत्मा के प्रति रहम, प्रेम और कल्याण की भावना रख मन्सा सेवा करो।

शिव आमंत्रण आबू रोड। योग बल द्वारा अन्य आत्माओं की पालना करने, रहम दिल से, शुभ भावना शुभ कामना संपन्न संकल्प हर आत्मा के कल्याण प्रति निस्वार्थ और निमित्त भाव से करने से यह उन आत्माओं को डायरेक्ट टच होगा। उनको एक साक्षात्कार जैसा अनुभव होगा। अनुभव करेंगे कोई फरिश्ता आकर मुझे कुछ बोल रहा है। यह अंत: वाहक शरीर द्वारा सेवा योग बल से ही कर सकते है।
बीजरूप स्टेज जबकि अभी यह सृष्टि रूपी झाड़ को परिवर्तन होना ही है। तो झाड़ के अंत में क्या रह जाता है? आदि भी बीज, अंत भी बीज ही रह जाता है। अभी इस पुराने वृक्ष के परिवर्तन के समय पर वृक्ष के ऊपर मास्टर बीजरूप स्थिति में स्थित हो जाओ। बीज है ही -बिंदु। सारा ज्ञान, गुण, शक्तियां सबका सिंधु एक बिंदु में समा जाता है। इसको ही कहा जाता है-बाप समान स्थिति।
एक परमात्मा को याद करें
जब हमारी खुशी का पैमाना बढ़ा हुआ होता है, तब जीवन मेंआने वाली हर बड़ी नकारात्मक बातें या व्यवहार को भी हम नजऱ अंदाज़ कर पार कर लेते हैं, लेकिन जब खुशी का पैमाना कम हो तो हर छोटी नकारात्मक बात या व्यवहार हमारे लिए बहुत बड़ी हो जाती है। अत: स्पष्ट है कि जीवन में आने वाली नकरात्मकता उतना महत्व नहीं रखती जितना महत्व हमारी खुशी के पैमाने का होता है। भक्तों का भी रक्षक भगवान अपने सभी बच्चों से कहते हैं बच्चे! मौत तो सबके सिर पर खड़ा है ।
इसलिए अब यह एक जन्म पवित्र बनो और बाप को याद करो तो तुम तमोप्रधान से सतोप्रधान बन जायेंगे। परमात्मा बाप की याद से ही विकर्म विनाश होंगे। और कोई रास्ता नहीं है – पतित से पावन बनने का।
इस सृष्टि रंगमंच पर कर्मों का बहुत सूक्ष्म खेल चलता है, जिसे हर आत्मा पूरी तरह समझ नहीं पाती है जिस कारण वह अपना हिसाब-किताब बना लेती है। फिर उसे ही चुक्तु करना पड़ता है। जब हम किसी भी कर्मेन्द्रिय का प्रयोग करते हैं अर्थात् आँख द्वारा कुदृष्टि होती है, तो वो भी पाप कर्म बन जाता है। जबकि यह संकल्पों द्वारा किया गया पाप कर्म है जो कि योग द्वारा ही चुक्तु किया जा सकता है।
बोल के द्वारा किया गया पाप
जब आप किसी भी विकारों में फंसी हुई कमज़ोर परवश आत्मा को कुछ ऐसी बात बोलते हो जो उसे चुभ जाए अर्थात् वह दु:खी हो जाए तो वह आपका हिसाब-किताब बनता है, जिसको आपको शरीर द्वारा चुक्तु करना पड़ता है। इसलिए बाबा कहते हैं, बच्चे अब मुख द्वारा बोलना बन्द करो। अब ज़रूरत का ही बोलो। देखो बच्चे, कमज़ोर आत्मा तो पहले से ही अपने संस्कारों से परेशान है और वह उसे खत्म करना चाहती है और यदि आप भी सभी के बीच हल्की-सी भी कोई चुभती बात बोल देते हो तो वह एक बार दु:खी हो जाती है जोकि आपका हिसाब-किताब बन जाता है। इसलिए किसी आत्मा के शुभचिन्तक बन समझानी देनी भी हैं तो अकेले में बस एक ही बार दो। फिर उसे बाप हवाले कर दो अन्यथा आप छोटा-छोटा सा हिसाब-किताब बना लेते हो जो फिर चुक्तु भी तो करना पड़ेगा। अब जो समय जा रहा है वह केवल कमाई का है इसलिए अब नया हिसाब-किताब बनाना बन्द करो और हर आत्मा के प्रति रहम, प्रेम और कल्याण की भावना रख मन्सा सेवा करो। इससे आपका दुआओं का खाता जमा होगा और आप जल्दी ही अपनी मंजि़ल पर पहुंच जाओगे। जब कोई भी पाप कर्म संकल्पों द्वारा होता है तो वह योग द्वारा चुक्तु हो जाता है और यदि कर्मणा में आ जाता है तो शरीर द्वारा और सम्बन्ध-सम्पर्क द्वारा चुक्तू करना पड़ता है। अभी यह सृष्टि रूपी झाड़ को परिवर्तन होना ही है। तो झाड़ के अंत में क्या रह जाता है? आदि भी बीज, अंत भी बीज ही रह जाता है। अभी इस पुराने वृक्ष के परिवर्तन के समय पर वृक्ष के ऊपर मास्टर बीजरूप स्थिति में स्थित हो जाओ। बीज है ही -बिंदु। सारा ज्ञान, गुण, शक्तियां सबका सिंधु एक बिंदु में समा जाता है। इसको ही कहा जाता है-बाप समान स्थिति।

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