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भगवान का आंदोलन- भारत को स्वर्णिम बनाना - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
भगवान का आंदोलन- भारत को स्वर्णिम बनाना

भगवान का आंदोलन- भारत को स्वर्णिम बनाना

समस्या-समाधान

शिव आमंत्रण, आबू रोड/राजस्थान। राजयोग मेडिटेशन है स्वयं को सुप्रीम पॉवर से जोड़ने का। भगवान ऊर्जा का सर्वोच्च स्रोत है जिससे सारे संसार को ऊर्जा मिल रही है। इसलिए निराकार है, क्योंकि जो सत्ता जितनी सूक्ष्म होती है उतनी ही पॉवरफुल होती है। यदि हम भी स्वयं को भगवान से जोड़ेंगे तो हम भी शक्तिशाली हो जाएंगे। जिस शक्ति की हम चर्चा करते हैं कि मनुष्य को पॉवरफुल होना चाहिए वह शक्ति हमारे मन में रहती है। आत्मा में दो महत्तवपूर्ण शक्तियां हैं मन और बुद्धि। बुद्धि में विवेक भरता है और शक्तियां भरती हैं। मन में शक्तियां निवास करती हैं इसलिए इसे मनोबल कहते हैं। हमारी सारी पॉवर मन में रहती हैं। हमें अपने मन को शक्तिशाली बनाने की विधि सीखनी है ताकि जीवन में या परिवार में कुछ भी हो जाए दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव ना पड़े। जब मन में नकारात्मक और व्यर्थ विचार अधिक चलने लगते हैं तो मन की शक्तियां नष्ट हो जाती हैं। हम सर्वशक्तिवान पिता की संतान हैं इसलिए हम भी शक्तिवान हैं। स्वयं को भ्रकुटी में स्थित शक्तिशाली आत्मा अनुभव करना है और महसूस करना है कि मुझ आत्मा से शक्तियों कि लाल प्रकाश की ऊर्जा चारों ओर फैल रहीं हैं। ये ऊर्जा हमारे चारों ओर एक आभामण्डल का निर्माण करती है। मनुष्य के पास इतनी पॉवर है वह अपने भाग्य का स्वयं निर्माता है। रोज सवेरे उठने के बाद 10 मिनट का समय बहुत महत्त्वपूर्ण होता है क्योंकि उस समय हमारा अवचेतन मन जाग्रत अवस्था में होता है। हमें अपने कार्यों की सफलता के लिए मानसिक ऊर्जा की अति आवश्यकता होती है। हम बहुत पॉवरफुल हैं ये अभ्यास यदि सवेरे उठते ही 7 बार कर लिया जाए तो हमारी घबराहट समाप्त हो जाएगी। यदि ये अभ्यास करते रहते हैं तो स्वयं को बहुत ऊर्जावान और शक्तिशाली अनुभव करेंगे।

संकल्पों का प्रकृति पर पड़ता है प्रभाव-
अपने मित्र-संबंधियों को पारिवारिक संबंध मधुर बनाने की कला सिखानी है। जैसे-जैसे हम भौतिक विकास में आगे बढ़ रहे हैं जीवन में सुख लोप होता जा रहा है, संबंधों का प्यार समाप्त होता जा रहा है। संसार दो चीजों से मिलकर चल रहा है- पुरूष यानी आत्मा और प्रकृति। हम जो संकल्प करते हैं उसकी तरंगें प्रकृति में हुंचती हैं। प्रकृति और हमारे विचारों के बीच निरंतर प्रतिक्रिया चलती रहती है। इसका प्रभाव प्रकृति पर पड़ता है।

सुबह मोबाइल फोन का प्रयोग न करें-

सवेरे उठते ही मोबाइल फोन का प्रयोग और अखबार आदि नहीं पढ़ना है। उठते ही वो संकल्प करना है जो हम पाना चाहते हैं। हमें सफलता चाहिए तो संकल्प करें कि मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूं और सफलता मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है। हमें जो ईश्वरीय ज्ञान मिल रहा है उसमें सिखाया जाता है कि हम अपनी शुभ भावनाओं द्वारा शत्रु को भी अपना मित्र बना सकते हैं। हमें सबको जरूरत है स्वयं को अध्यात्मिक शक्ति से भरपूर करना। सबकी मन व बुद्धि की ऊर्जा सारा दिन कार्य करने में बहुत खर्च होती है। जैसे हम भोजन करते हैं, पानी पीते हैं ताकि शरीर को सारा दिन कार्य करने के लिए ऊर्जा मिलती रहे, अन्यथा शरीर की क्षीण हो जाएगी। उसी प्रकार मन व बुद्धि को भी कार्यरत रखने के लिए आत्मिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए योग की शक्ति द्वारा आत्मा को चार्ज करना है तब जीवन में आनंद का अनुभव कर सकेंगे। हमें अपने मनोबल को बढ़ाकर रखना है। अगर मन में शक्ति है तो जीवन में आने वाली हर परीक्षाओं को हंसते-हंसते पास कर लेंगे। अब स्वयं भगवान ने भारत को स्वर्णिम भारत बनाने का आंदोलन शुरू किया है और उसमें हम सबको सहयोगी बनना है। ये काम केवल सरकार का नहीं है। जब राजनीतिक और अध्यात्मिक शक्ति दोनों साथ मिलकर काम करेंगी तब यह काम हो सकता है। इसलिए हम सबको मिलकर इस आंदोलन में हिस्सा लेना है। अध्यात्मिक शक्ति को स्वयं में भर लेने से बुद्धि दिव्य हो जाती है। संसार में जिस तरह से मानसिक समस्याएं बढ़ रहीं हैं उसमें लोगों की मदद करनी है।

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