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यह सदा याद रखें मैं मास्टर भाग्यविधाता हूं - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
यह सदा याद रखें मैं मास्टर भाग्यविधाता हूं

यह सदा याद रखें मैं मास्टर भाग्यविधाता हूं

समस्या-समाधान

यदि मैं अपने अनुभवों की बात आपको कहूं। 1971 में पहली बार अव्यक्त मुरली में मैंने सुना कि बाबा ने याद दिलाया कि तुम भक्ति में कहते थे हे! भगवान जब तुम इस धरा पर आओ तो हमें अपना बना लेना। बाबा ने कहा कि इतना ही कहते थे न तुम बस। हमने तो कभी कहा भी नहीं था, क्योंकि हमने कभी भक्ति की नहीं थी। कहते होंगे भी भक्त लोग ऐसे। बाबा ने कहा देखो बाप ने क्या कर दिया। जो तुमने कहा था वह तो पूरा कर ही दिया कि मैंने तुम्हें अपना बना लिया। इसके साथ-साथ मैं भी तुम्हारा हो गया हूं। तो वह पहला दिन था मेरे जीवन का जब मुझे ये नशा मुझे चढ़ा कि भगवान मेरा। ये तो किसी को कहना भी नहीं आता दुनिया में कितनी बड़ी चीज है। जो भाग्यविधाता है, वह मेरा है। आप सबने सुना होगा बाबा की मुरली में यदि कभी किसी को ऐसा लगे कि मेरा भाग्य मुझे साथ नहीं दे रहा है तो ये याद करें कि स्वयं भाग्यविधाता भगवान मेरा है। भाग्य साथ देने लगेगा।
यदि कभी ऐसा लगे कि बहुत मेहनत करने पर भी सफलता नहीं मिल रही है। शायद भाग्य हमसे रूठ गया है तो स्वयं को याद दिलाएं मैं मास्टर भाग्य विधाता हूं। बिगड़ा हुआ भाग्य सुधर जाएगा। भगवान मेरा है ये प्यार और उस पर अधिकार रखना ये बहुत सुन्दर तरीका है, योगयुक्त रहने का। ये इतना अधिकार हो जाए हमारा, बाबा मेरा है, इस अधिकार से उसको हम अपने पास बुलाएं और वह आ जायेगा। उसकी उपस्थिति को मेहसूस करें।
मैंने बहुत माताओं को भी ये बात सिखाई है कि अपने घर में बाबा को कम से कम तीन बार घर में जब बाबा को भोग लगाएं तो बापदादा को ऊपर से नीचे बुलाएं, आपको महसूस होने लगेगा कि बाबा आ जाता है। जहां बाबा आ होता है, वहां चारों ओर वायब्रेशन फैलने लगते हैं तो बाबा के साथ का अनुभव होने लगेगा, ये है बहुत सिम्पल तरीका।
अब दूसरी चीज वैसे तो हम सिम्पल भाषा में योग की अवस्थाओं को निराकारी, आकारी, अव्यक्त, फरिश्ता, बीजरूप, ज्वालारूप, पावरफुल योग ये शब्द प्रयोग करते हैं। सबसे पहले हमें जो अशरीरी होने का अभ्यास करना होता है। मैं आपको केवल एक टेक्नीक बताऊं जो बहुत सिम्पल है। इसे ब्रह्मा बाबा अपनी साधनाओं में बहुत किया करते थे। अंतिम साल में तो बाबा ने इस साधना को बहुत किया था। मैं आत्मा इस तन में आई हूं खेल पूरा हुआ, अब ये शरीर छोडक़र वापिस जाना है। आना और जाना ये फीलिंग हमें देह से न्यारा कर देती है। योग अभ्यास में जो भाई और बहनें वेल एजुकेटेड हैं। अच्छे-पढ़े लिखे हैं। वह इस बात को जरा ध्यान देंगे। ये अभ्यास में विजुलाइजेशन का बहुत बड़ा महत्व है। बुद्धि के नेत्र से बाबा के स्वरूप को अपने भिन्न-भिन्न स्वरूपों को विजुलाइज करें। देखें इसका बहुत महत्व है। इससे भी इम्पारटेंट बात है जिस चीज को हम विजुलाइज करेंगे। जिस चीज को हम देखेंगे। जिस अब्जेक्ट पर हम अपनी बुद्धि को स्थिर करेंगे। उसकी एनर्जी, उसकी शक्ति उसके वायब्रेशन हमारे अंदर आने लगेंगे। ये एक टेक्निक है जिससे हम समझ सकते हैं कि योग अभ्यास में बाबा से शक्तियां, शांति, प्योरिटी कैसे प्राप्त होती है। हम मांगते नहीं हैं कि हमें शांति दो, शक्ति दो, सद्बुद्धि दो। हम मांग नहीं रहे हैं, हम उसके स्वरूप पर अपनी बुद्धि स्थिर कर रहे हैं, तो जो कुछ उसमें हैं ओ हममें आने लगता है।

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