सभी आध्यात्मिक जगत की सबसे बेहतरीन ख़बरें
ब्रेकिंग
स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी दक्षता के साथ मानसिक- आध्यात्मिक संतुलन जरूरी तीरंदाजी में युवाओं ने दिखाए करतब, दिव्यांगों ने भी साधा निशाना ब्रह्माकुमारीज़ का मैनेजमेंट सराहनीय है: डॉ. सावंत ब्रह्माकुमारीज़ का नशामुक्त भारत अभियान सराहनीय है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मम्मा कहती थीं हर घड़ी अंतिम घड़ी है: राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी प्राणायाम और राजयोग से दिया तन-मन को स्वस्थ रखने का संदेश ब्रह्माकुमारीज़ के इतिहास में एक नया अध्याय लिख गईं दादी रतनमोहिनी
बचपन से संकल्प था कुछ अलग करना है

बचपन से संकल्प था कुछ अलग करना है

बातचीत

बीना/सागर (मप्र) :- बचपन में बड़ी दीदी के साथ ब्रह्माकुमारीका सेवाकेंद्र पर जाती थी, लेकिन ज्ञान समझ नहीं आता था। सेवाकेंद्र पर जाना जारी रहा और पढ़ाई भी चलती रही। जैसे-जैसे बड़ी हुई तो यह ज्ञान स्पष्ट होने लगा। बीए करने के बाद संकल्प किया कि अब पूरी तरह से परमात्मा शिव बाबा की सेवा में जीवन लगाना है। वर्ष 2018 से बीना सेवाकेंद्र पर रहकर सेवा कर रही हूं। पहले मुझे बहुत डर लगता था, हमेशा चिंता रहती थी, सबसे बड़ी बात सिर में बहुत दर्द रहता था जो कि राजयोग मेडिटेशन के नियमित अभ्यास से दूर हो गया। राजयोग की शक्ति का कमाल है कि अब मन बहुत शांत रहता है। डर, भय, चिंता तो जैसे जीवन से सदा के लिए अलविदा हो गया है। युवाओं को राजयोग से जुडऩा चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *