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भारतीय संस्कृति का मूल है वंदे मातरम् का उद्घोष - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
भारतीय संस्कृति का मूल है वंदे मातरम् का उद्घोष

भारतीय संस्कृति का मूल है वंदे मातरम् का उद्घोष

मध्य प्रदेश राज्य समाचार

जब गरजती है नारी शक्ति तो, इतिहास बदल देती है
छतरपुर में महिला दिवस पर बीके विद्या के विचार

शिव आमंत्रण, छतरपुर। भारतीय संस्कृति में नारी को सदा सम्मान दिया जाता है। वंदे मातरम् का उद्घोष भारतीय संस्कृति का मूल है। नारी को मां का आदर्श स्थान प्राप्त है। नारी सदा पूजनीय रही है। नारी एक ओर शक्ति रूपा है तो दूसरी ओर रहमदिल है। वो सुन्दर है, सौम्य है तो काली रूपा भी है। वो कोमल है लेकिन कमजोर नहीं। वो सरल है, सहज है लेकिन असाधारण है।
उक्त विचार छतरपुर विश्वनाथ कॉलोनी (म.प्र.) सेवाकेंद्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित महिला सम्मेलन मे खजुराहो सेवाकेन्द्र प्रभारी बीके विद्या ने व्यक्त किये। कार्यक्रम में भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष द्रोपदी कुशवाह ने शॉल ओढ़ाकर बीक विद्या का सम्मान किया।

दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन करते मंचासीन अतिथि।

कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथियों के रूप में कोमल टिकरिया (जिलाध्यक्ष वैश्य महासम्मेलन, उपाध्यक्ष गहोई वैश्य महिला मंडल, डिस्ट्रिक्ट चेयरमेन लायनेस क्लब, ट्रेजरार रोटरी क्लब), किरण ब्रजपुरिया (लायनेस क्लब अध्यक्ष), बहन दीप्ति प्यासी (सक्रिय युवा समाजसेवी), द्रोपदी कुशवाह (भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष), सरोज छारी (अधीक्षक बाल सुधार ग्रह), सुनीता पथोरिया (वरिष्ठ समाज सेवी), लोकपाल सिंह (ट्रस्टी निर्वाणा फाउण्डेशन) मंचासीन रहें।
महिला दिवस पर उपस्थित अतिथियों ने मातृ शक्ति को समाज का आधार स्तंभ बताते हुए कहा, कि एक बेहतर समाज की परिकल्पना नारी के बगैर अधूरी है। ‘‘अगर एक आदमी को शिक्षित किया जाता है तो एक आदमी ही शिक्षित होता है लेकिन एक औरत को शिक्षित किया जाता है तो एक पीढि़ शिक्षित होती है। कहा, कि अगर मां, बहन, बहू, पत्नि, बेटी ये पांच लक्ष्मी ना होती तो ये दुनिया ना चलती। बिजली चमकती है तो, आकाश बदल देती है। आंधी उठती है तो, दिन को रात मे बदल देती है। जब गरजती है नारी शक्ति तो, इतिहास बदल देती है।‘‘
कार्यक्रम में राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास बीके कमला ने कराया, सभी का धन्यवाद बीके सुलेखा ने किया, बीके रीना ने मंच संचालन किया।

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