सभी आध्यात्मिक जगत की सबसे बेहतरीन ख़बरें
ब्रेकिंग
हम संकल्प लेते हैं भारत काे बनाएंगे व्यसनमुक्त उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को किया सम्मानित नई सामाजिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक दृष्टि और नैतिक मूल्य जरूरी नींबू दौड़, बोरा दौड़ और लंबी कूद में बच्चों ने दिखाए करतब अपने काम को खुशी और आनंद के साथ करें: बीके शिवानी दीदी फिर से रामराज्य लाने में मीडिया की रहेगी महत्वपूर्ण भूमिका: मंत्री खराड़ी बच्चों ने स्केटिंग, नृत्य और रस्साकशी में दिखाई प्रतिभा
ज्ञानयुक्त भक्ति लुभाती है भगवान को : बीके मंजू - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
ज्ञानयुक्त भक्ति लुभाती है भगवान को : बीके मंजू

ज्ञानयुक्त भक्ति लुभाती है भगवान को : बीके मंजू

छत्तीसगढ़ राज्य समाचार

पतंजलि द्वारा आयोजित 28 दिवसीय राज्य स्तरीय सह योग प्रशिक्षण शिविर के चार सत्रों को किया संबोधित

शिव आमंत्रण, टिकरापारा। ‘‘भक्ति का अर्थ है भावना। जिसके मन और इन्द्रिय वश में नहीं हैं तथा इन्द्रियों के भोगों में जिनकी आसक्ति होती है उनमें भावना नहीं होती और भाव रहित मनुष्य की बुद्धि का स्थिर रहना तो दूर, वह परमात्म स्वरूप का चिंतन भी नहीं कर सकता। परमात्म चिंतन न होने से मनुष्य का मन काम, क्रोध, द्वेष, लोभ, ईष्र्या आदि से व्याकुल रहता है अत: शान्ति नहीं मिलती। जिससे सच्चे सुख की प्राप्ति भी नहीं होती है।
उक्त बातें पतंजलि योग समिति द्वारा आयोजित 28 दिवसीय राज्य स्तरीय सह योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में ‘स्थितप्रज्ञ (स्थिरबुद्धि), नवधाभक्ति, भक्त के प्रकार व भक्तियोग विषय को गूगल मीट व फेसबुक लाइव के माध्यम से जुड़े साधकों को ऑनलाइन संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी बीके मंजू ने कही।

ज्ञानयुक्त भक्ति ही श्रेष्ठ भक्ति…
आपने भक्त के चार प्रकार बताते हुए कहा कि शारीरिक कष्ट आने पर दुख दूर करने के लिए भगवान को याद करने वाले भक्त आर्त भक्त, भगवान को जानने की इच्छा रखने वाले जिज्ञासु भक्त, भोग, ऐश्वर्य और सुख प्राप्ति के लिए भगवान का भजन करने वाला अर्थार्थी भक्त है और जो सदैव निष्काम होता है और भगवान को छोडकर कुछ नहीं चाहता, वह ज्ञानी भक्त है। इन सभी में भगवान को ज्ञानी भक्त सबसे अधिक प्रिय हैं क्योंकि वह ज्ञान के साथ भक्ति करता है। इसलिए भगवान ने ज्ञानी को अपनी आत्मा कहा है। श्रवण, कीर्तन, स्मरण, चरणसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य सख्य और आत्मनिवेदन ये सभी शास्त्रों में वर्णित नवधा भक्ति के प्रकार हैं।
स्थिरबुद्धि के लिए कामनाओं व क्रोध पर नियंत्रण जरूरी…
मनुष्य की कामनाओं में विघ्न पडने से क्रोध की उत्पत्ति होती है और क्रोध से स्मृति, ज्ञान व बुद्धि का नाश हो जाता है जिससे व्यवहार में कटुता, कठोरता, कायरता, हिंसा, दीनता, मूढ़ता, जड़ता आदि दोष आ जाते हैं जो मनुष्य का पतन कर देते हैं। इसलिए कामना, क्रोध व अहंकार योगियों के महान शत्रु हैं इन्हें नियंत्रण किए बिना स्थिरबुद्धि नहीं बन सकते।
इस सत्र के अतिरिक्त बीके मंजू ने प्राणायाम-आसन का प्रायोगिक सत्र भी लिया। उक्त कार्यक्रम के आयोजक के रूप में मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं पतंजलि के मध्य भारत एवं नेपाल प्रभारी संजय अग्रवाल एवं भारत स्वाभिमान न्यास छ.ग. राज्य के प्रांतीय प्रभारी देवीलाल पटेल भी शामिल रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *