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गति का मीटर तो है लेकिन किसी के पास नही है मन का मीटर - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
गति का मीटर तो है लेकिन किसी के पास नही है मन का मीटर

गति का मीटर तो है लेकिन किसी के पास नही है मन का मीटर

मध्य प्रदेश राज्य समाचार

विश्व यादगार दिवस पर रतलाम में व्यक्त विचार

शिव आमंत्रण, रतलाम। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय रतलाम के दिव्य दर्शन भवन डोंगरे नगर सेवाकेंद्र पर यातायात एवं परिवहन प्रभाग द्वारा सडक दुर्घटना में जान गवाने वाली आत्माओं को श्रद्धांजलि देने हेतु उन्हें आध्यात्मिक शक्ति देते हुए मानसिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से विश्व यादगार दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे सीएसपी हेमंत चौहान ने ट्रैफिक नियमों का पालन करने के संबंध में कहा, कि शरीर का सबसे भारी एवं महत्वपूर्ण हिस्सा सिर होता हैं। इसके लिए हेल्मेट की अनिवार्यता बतलाई। कहा, कि अभिभावकों को भी अपने 18 साल सेकम उम्र के बच्चों को वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटना एवं नुकसान के बारे में बताना चाहिए एवं छोटी-छोटी दूरी पर पडने वाले कार्यों के लिए वाहन न ले जाने की सलाह अपने अनुभवों के आधार पर बहुत ही सारगर्भित ढंग से रखी गयी तथा आपने आगे बताया कि शराब आदि का सेवन कर गाडी नही चलाना तथा नियमों का पूर्ण पालन करना जरूरी हैं।
सेवाकेंद्र प्रभारी बीके सविता ने कहा, कि दिनों दिन दुर्घटनाए बढ़ रही हैं उसका कारण है जल्दबाजी। आज मनुष्य अपनी मंजिल पर जल्दी पहुंचना चाहता है इस कारण वाहन से ज्यादा उसका मन भागता है। आज वाहन की गति मापने का मीटर तो है लेकिन मन का मीटर किसी के पास नहीं है। इसलिए आज प्रत्येक व्यक्ति को भाग रहे मन को मापने के लिए तीन टेबलेट अवश्य खानी चाहिए। वह है धीरज, शांति और प्रेम। अपनी मंजिल पर धैर्यता से पहुँचे। क्योंकि देरी से पहुँचने का कारण तो बता सकते हो परन्तु किसी दुर्घटना के कारण मंजिल पर नहीं पहुँच पाए तो उसका कारन नहीं बतला सकते। आज का मनुष्य व्यसन एवं विकार से ग्रसित होने के कारण उसका मन तेजी से दौड रहा है इसलिए सकारात्मक सोच खत्म होते जा रही है। वाहन से पहले अपने मन को कंट्रोल करना चाहिए। कहा जाता है मानव एक मुसाफिर हैं उसे परमात्मा की ओर से शरीर रूपी वाहन गिफ्ट के रूप में मिला हुआ हैं। जिस प्रकार ड्राइवर अपनी गाडी को जहाँ चाहे कंट्रोल कर सकता है परंतु वही ड्राइवर यदि स्वयं को गाडी समझ ले तो वह अनकंट्रोल हो जाता है। आज आवश्यकता हैं आध्यात्मिकता के द्वारा हम अपने मन को कंट्रोल करना सीखें।
इसके साथ ही बताया, कि सडक सुरक्षा के अंतर्गत आध्यात्मिकता द्वारा सुरक्षा एक विशेष अभियान है जिसके अंतर्गत संस्थान द्वारा वर्ष भर प्रत्येक मास के तीसरे रविवार को शाम 6.30 से 7.30 तक योग के प्रकम्पन फैलाकर सेवाएं चलती है। इसी के साथ बीके सविता ने सबसे प्रतिज्ञा करवाई।
माउंट आबू से पधारे बीके पुरुषोत्तम ने कहा, कि परमपिता परमात्मा की याद में गाडी चलाते है तो अवश्य ही दुर्घटना से बचा जा सकता है। एकाग्रता भंग होने के कारण ही दुर्घटना हो जाती है। कहा जाता हैं एकाग्रता हटी दुर्घटना घटी। आवश्यकता है अपने ऊपर संयम रखने की। तो आइये आज इस कार्यक्रम के माध्यम से जो हमारे बीच से चले गये हैं उनके प्रति सच्ची मित्रता रखें तभी उनकी आत्मा को शांति मिलेगी। साथ ही पुलिस विभाग के कर्मचरियों का भी पूर्ण रूप से सहयोग करें।
बीके आरती द्वारा राजयोग के माध्यम से मानस पटल पर सुरक्षित सडक व्यवस्था का दृश्य निर्मित कर शुद्ध भावनाओं की शक्ति का बायब्रेशन फैलाया गया। कार्यक्रम के अंत में बीके किरण द्वारा उपस्थित श्रोतागणों एवं मंचासीन अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।

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