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अपने जीवन को श्रेष्ठ, संपन्न, मूल्यवान एवं मंगलमय बनाएं - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
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बोध कथा

एक संत के पास बहुत सारे सेवक रहते थे । एक सेवक ने गुरुजी के आगे अरदास की – महाराज जी मेरी बहन की शादी है तो आज एक महीना रह गया है तो मैं दस दिन के लिए वहां जाऊंगा । कृपा करें ! आप भी साथ चले तो अच्छी बात है । गुरु जी ने कहा बेटा देखो टाइम बताएगा ।

नहीं तो तेरे को तो हम जानें ही देंगे उस सेवक ने बीच-बीच में इशारा गुरु जी की तरफ किया कि गुरुजी कुछ ना कुछ मेरी मदद कर दे !

आखिर वह दिन नजदीक आ गया. सेवक ने कहा गुरु जी कल सुबह जाऊंगा मैं । गुरु जी ने कहा – ठीक है बेटा !

सुबह हो गई. जब सेवक जाने लगा तो गुरुजी ने उसे 5 किलो अनार दिए और कहा ले जा बेटा भगवान तेरी बहन की शादी खूब धूमधाम से करें, दुनिया याद करें कि ऐसी शादी तो हमने कभी देखी ही नहीं ! और साथ में दो सेवक भेज दिये – जाओ तुम शादी पूरी करके आ जाना ।

जब सेवक घर से निकले तो जिसकी बहन की शादी थी वह सेवक से बोला – गुरुजी को पता ही था कि मेरी बहन की शादी है, हमारे पास कुछ भी नहीं है, फिर भी गुरुजी ने मेरी मदद नहीं की ।

दो-तीन दिन के बाद वह अपने घर पहुंच गया ।

उसका घर राजस्थान रेतीली इलाके में था वहां कोई फसल नहीं होती थी ।

वहां के राजा की लड़की बीमार हो गई. वैद्यजी ने बताया कि इस लड़की को अनार के साथ यह दवाई दी जाएगी तो यह लड़की ठीक हो जाएगी ।

राजा ने मुनादी करवा रखी थी – अगर किसी के पास आनार है तो राजा उसे बहुत इनाम देंगे ।

इधर मुनादी वाले ने आवाज लगाई – अगर किसी के पास आनार है तो जल्दी आ जाओ, राजा को अनारों की सख्त जरूरत है ।

जब यह आवाज उन सेवकों के कानों में पड़ी, तो वह सेवक उस मुनादी वाले के पास गए और कहा कि हमारे पास खूब सारे अनार है, चलो राजा जी के पास ।

राजाजी को अनार दिए गए अनार का जूस निकाला गया और लड़की को दवाई दी गई, तो लड़की ठीक-ठाक हो गई ।

राजा जी ने पूछा – तुम कहां से आए हो? तो उसने सारी हकीकत बता दी.

राजा ने कहा – ठीक है, तुम्हारी बहन की शादी मैं करूंगा। राजा जी ने हुकुम दिया ऐसी शादी होनी चाहिए कि लोग यह कहे कि यह राजा की लड़की की शादी है!

सब बारातियों को सोने चांदी गहने के उपहार दिए गए ! बरात की सेवा बहुत अच्छी हुई ! लड़की को बहुत सारा धन दिया गया ! लड़की के मां-बाप को बहुत ही जमीन जायदाद व आलीशान मकान और बहुत सारे रुपए पैसे दिए गए ! लड़की भी राजी खुशी विदा होकर चली गई !

अब सेवक सोच रहे हैं कि गुरु की महिमा तो गुरुजी ही जाने। हम न जाने क्या-क्या सोच रहे थे गुरुजी के बारे में !

जब सिद्ध गुरुओं के वचनों में इतनी ताकत होती है , तो उन्हें सिद्धि प्रदान कर ऐसा बनाने वाले, मनुष्य मात्र के पारलौकिक सतगुरु, परमधाम के रहने वाले, निराकार ज्योतिबिंदु स्वरूप शिव बाबा के वचनों में कितनी ताकत होगी !

तो आइए, आप और हम सब मिलकर शिव बाबा के परम कल्याणकारी श्रीमत् के वचनों का पालन करते हुए अपने जीवन को श्रेष्ठ, संपन्न, मूल्यवान एवं मंगलमय बनाएं !!!

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