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दृढ़ता से असंभव भी संभव हो जाएगा - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
दृढ़ता से असंभव भी संभव हो जाएगा

दृढ़ता से असंभव भी संभव हो जाएगा

आध्यात्मिक

शिव आमंत्रण, आबू रोड/राजस्थान।जीरो बन जीरो में समाना ज्ञान कंठ कर लिया, पढ़ लिया, समझ लिया, समझा भी दिया लेकिन जीवन में प्रैक्टिकल कितना अनुभव किया है। जीवन में कितना धारण किया है, वही योग्य है। जो अचानक अदृश्य हो जाता है। जीरो हो जाता है, वही मास्टर सद्गुरु है, उसके 3 सूत्र हैं। तीन शर्ते- कंठ कर लेना, याद कर लेना। ज्ञान को समझ लेना है। ज्ञान काे आत्मसात कर लेना है। ज्ञान काे आत्मसात करने पर उस परम से अनुभूति होगी। उस अनुभूति में सब कुछ नष्ट हो जाएगा। जो वासनाएं, आसक्ति, विकार, विकर्म, व्यर्थ, नकारात्मकता जो जरूरी नहीं था, वह सभी समाप्त हो जाएगा। अंदर कोई विकार होता है- जैसे बीड़ी, सिगरेट, दारू की तलब होती है उसको छोड़ दिया जैसे ही देखते हैं तो उसको याद आता है क्योंकि वह आत्मा के अंदर संस्कार भरे हुए हैं। वैसे ही विकारों को याद नहीं करना है लेकिन ज्ञान को याद करना है जो महावाक्य मिले हैं उनको बार-बार याद करने से वह संस्कार बन जाएंगे। मुरली को इतनी बार पढ़ना है जो मुरली कंठ याद हो जाए। दृढ़ता की शक्ति से असंभव भी संभव हो जाएगा। असंभव सफलता में परिवर्तित हो जाएगा।
मुरली को समझ लेना। आत्मसात कर लेना अंगीकार
कर लेना है वह हमारे जीवन में दिखाई देने लगे। बापदादा के महावाक्य (23.01.1974) हैं अपने आप प्रोग्राम बनाओ, प्रोग्राम बनेगा तो कर लेंगे, यह भट्टी बनेगी तो कर लेंगे। यह सहयोग आधार नहीं है। कभी सहयोग मिल सकता कभी सहयोग नहीं मिल सकता। अभ्यास निराधार का होना चाहिए। अगर चांस मिल जाता है तो अच्छा ही है, ना मिलने पर अभ्यास से हटना नहीं चाहिए। प्रोग्राम पर आधार बनाकर उन्नति का आधार बनाना कमजोरी है। हर वक्त भट्टी में रहना, यह अनादि प्रोग्राम है। अकेले रहने का प्रोग्राम बनाना है। आधार अनित्य है, आधार धोखेबाज हैं, आधार भ्रम है। इस पुरुषार्थ के मार्ग में हम अकेले हैं।अकेले हो जाना ही साधना है। आधार भी व्यर्थ था का चिंतन करना है उसमें बेस्ट होने वाला टाइम, मनी, एनर्जी बेस्ट होने वाली चीजों को चेक करना है। कबीर का दोहा- समंदर लागी आगी नदियां जल कर कोयला हुईं। समदंर अर्थात आत्मा के अंदर आसक्ति, वासनाओं की नदियों में आग लग गई है। इंद्रियों की वासनाओं में आग लग गई है, सभी आग में जल गई हैं। यह देख कबीर जान गए हैं। अर्थात आत्म ज्योति शास्त्राहार चक्र तक पहुंच गई है।

भट्टी में समर्पण करना है…
प्राण जीवन नया जीवन है। प्राण अर्थात ऊर्जाप्राण, शक्ति प्राण, तेज प्राण। प्राण अर्थात वह शक्ति जो सर्व व्यापक है, आत्मा सर्व व्यापक नहीं है परमात्मा सर्व व्यापक नहीं हैं परंतु प्राण सर्वव्यापक है। प्राण अर्थात संजीवनी शक्ति, तेज शक्ति, जीवन शक्ति। कोई देश उसे वाटरफॉल कहता है। कोई कॉस्मिक वाइब्रेशन, कॉस्मिक माइक्रोटेस्ट, यूनिवर्सल लाइफ, हॉस्पिटल इनर्जी, फोटो इमेजिंग पावर कहते हैं। प्राण को अनेक नाम दिए हुए, प्राण को असंख्य नाम दिए हैं। प्राण ऊर्जा जीवन तेज है। प्राण ऊर्जा हमारे शरीर में ऊर्जा विद्यमान है। ऐसा संसार में कोई स्थान नहीं है जहां पर यह प्राण ऊर्जा विद्यमान नहीं है। अपने जीवन में प्राण ऊर्जा भरना है। मैं थक गया हूं, मुझे नींद आ रही है ऐसे शब्दों का प्रयोग समाप्त हो जाएगा। आत्मिक ऊर्जाको, चेतना को ऊर्जा से भर देना है। प्राण अर्थात हर चीज में प्राण ऊर्जा भरी हुई, ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां प्राण ऊर्जा नहीं है। परंतु कुछ जगह प्राण ऊर्जा बहुत ज्यादा है। जैसे मधुबन में बहुत ज्यादा ऊर्जा है, बंद कमरे में ऊर्जा कम है। नदी किनारे चले जाओ प्राण ऊर्जा ज्यादा है।

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