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खुद को बिंदी समझकर ज्योतिर्बिंदु परमात्मा को याद करें: राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
खुद को बिंदी समझकर ज्योतिर्बिंदु परमात्मा को याद करें: राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी

खुद को बिंदी समझकर ज्योतिर्बिंदु परमात्मा को याद करें: राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी

मुख्य समाचार

-चार दिवसीय सेल्फ अवेकनिंग एवं सिंधी स्नेह मिलन शिविर का शुभारंभ
-गुजरात, राजस्थान सहित अन्य राज्यों से सिंधी समाज के लोग पहुंचे

शिव आमंत्रण,आबू रोड/राजस्थान।
 ब्रह्माकुमारीज संस्थान के मनमोहिनीवन स्थित ग्लोबल ऑडिटोरियम में आयोजित चार दिवसीय सेल्फ अवेकनिंग एवं सिंधी स्नेह मिलन शिविर का शुभारंभ सोमवार को विश्व सिंधी भाषा दिवस पर किया गया। इसमें गुजरात, राजस्थान सहित देश के अन्य राज्यों से 400 से अधिक सिंधी समाजजन पहुंचे हैं।
उद्घाटन सत्र में मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने कहा कि आप सभी सिंधु भाई-बहनों का परमात्मा के घर में स्वागत है। खुद को बिंदी समझकर ज्योतिर्बिंदु परमात्मा को याद करेंगे तो हमारा जन्मोंजन्म का भाग्य बन जाएगा। परमात्मा हम सभी आत्माओं के परमपिता हैं।  
मीडिया निदेशक बीके करुणा ने कहा कि सिंधु नदी की संस्कृति का वर्णन आज भी हमारी किताबों में है। ब्रह्मा बाबा द्वारा जो हमें शिव बाबा ने ज्ञान सुनाया कि हम सभी आदि देवी-देवता सनातन संस्कृति के हैं। भारत का पहला धर्म देवी-देवताओं का धर्म था। बाबा ने हमें बताया कि हम सब सनातनी हैं। आप ऐसी संस्कृति में आए हैं जहां हम सब एक संस्कृति के हैं। आप सभी सनातन, देवी-देवता धर्म के हैं। बाबा ने फिर से सतयुग लाने का प्रयास किया। बाबा ने हमें ज्ञान दिया कि आप एक आत्मा हैं। शरीर खत्म हो जाता है लेकिन आत्मा सदा रहती है। ईश्वर इस सृष्टि पर सतधर्म की स्थापना करने आते हैं। ब्रह्मा बाबा भी सिंधी थे। वह बहुत रॉयल और साधारण थे। एक ईश्वर, एक विश्व, एक परिवार की स्थापना का कार्य संस्था कर रही है।

स्नेह मिलन में संबोधित करते हुए हिना सद्दापुरी।

राजयोग से मन होता है शांत-
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके शीलू दीदी ने कहा कि सिंधी समाज का दुनिया में बड़ा योगदान है। आपने व्यापार में नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं। अब आध्यात्म में भी नई ऊंचाइयों को छूना है। राजयोग मेडिटेशन से हमारा मन शांत होता है और शक्तिशाली होता है। हीरो थरनानी ने कहा कि यहां आकर बहुत शांत की अनुभूति हुई। विनोद मूलचंदानी ने कहा कि वर्तमान में हम सभी को आध्यात्म की जरूरत है। मुरली अडानी ने कहा कि संस्था द्वारा सराहनीय कार्य किए जा रहा हैं। हिना सद्दापुरी, अजीत मनीयाल, डॉ. राजू वी मनवानी, मनोहर पमनानी, दीपक केवलरामनी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

शिविर में मौजूद देशभर से आए सिंधी समाजजन।

वसुधैव कुटुम्बकम् का पाठ पढ़ा रहे हैं परमात्मा-
संचालन करते हुए बिलासपुर से आईं बीके राखी ने कहा कि परमात्मा इस धरा पर आकर हम सभी आत्माओं को एकता और वसुधैव कुटुम्बकम् का पाठ पढ़ाते हैं। परमात्मा हमें ज्ञान देकर नई सतयुगी, स्वर्णिम दुनिया की स्थापना का महान कार्य कर रहे हैं।  स्वागत गीत गायक बीके भानु भाई और बीके युगरतन भाई ने प्रस्तुत किया। कुमारी निशा ने स्वागत नृत्य पेश किया। आभार बीके बीना ने माना।

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