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पवित्रता में है अद्भुत शक्ति………. - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
पवित्रता में है अद्भुत शक्ति……….

पवित्रता में है अद्भुत शक्ति……….

जीवन-प्रबंधन

शिव आमंत्रण, आबू रोड/राजस्थान। आज कोई भी अखवार उठाकर पढ़े तो एक खबर हर रोज छपती है। वह है कामेशु-क्रोधेशु वाले मनुष्य के कुकृत्य। प्रत्यक्ष में कितनी घटनायें घटती होंगी। हमारा विवेक भी यह मानता है कि दिन-प्रति-दिन यह घटनायें बढ़ेगी। ऐसे समय आत्मरक्षा का साधन क्या है? कोई इन्सान किसी की रक्षा नहीं कर पाता और ना ही कर पायेगा। यह विकृति इन्सान के दिमाग की है जो दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यह भी समय का संकेत है कि एक दिन यही विकृति मनुष्य के सर्वनाश का कारण बनेगी। जिसका वर्णन शस्त्रों में भी दिया गया है कि रावण बहुत शक्तिशाली था। वह सीता जी को सम्मोहित कर के ले आया परन्तु अपने महल में नहीं रखना पड़ा। वह सीता जी को स्पर्श तक न कर सका सीता जी के पास अपनी आत्मरक्षा के लिए कौनसे शस्त्र थे? एक घास का तिनका, जो उठा कर सीताजी ने बीच में रखा रावण को चैलेन्ज कर दिया कि ‘हे रावण, इस तिनके से आगे तूने एक कदम भी बढाया तो जल जाएगा, इतनी शक्ति है मेरी। रावण, जो किसी से कभी डरा नहीं सीता जी के इस चुनौती से डर गया। सीताजी के पास आत्म रक्षा की ऐसी कौन सी शक्ति थी? यह शक्ति 14 साल के ब्रह्मचर्य व्रत की शक्ति, पवित्रता की शक्ति थी। पवित्रता की शक्ति ने उनके चारों ओर एक सुरक्षा कवच बना दिया था और उनकी आत्म रक्षा का साधन था। इसी प्रकार आने वाले समय में ऐसे अनेक रावण हो जायेंगे जो अनेकों को अपने विकृत मनोविकारों का शिकार बनायेंगे। ऐसे समय में ब्रह्मचर्य व्रत की शक्ति सुरक्षा कवच का कार्य करेंगी और इससे आत्मरक्षा होगी। महाभारत का कारण भी द्रौपदी का वस्त्रहरण ही बना जो कौरवों के सर्वनाश का करण बना। आज की दुनिया में भी इसी वस्त्रहरण के कारण दुनिया का बेड़ा गर्क होता जा रहा है और यही संसार के सर्वनाश का कारण बनेगा।
परमात्मा जानी जाननहार है…
परमात्मा जानी जाननहार है। परमात्मा सर्वज्ञ होने के कारण जानते है कि आने वाले समय में नकारात्मक मनोवृति एवं विकृत मनोदशा वााले अनेक हैवान चारों ओर मंडरायेंगे और अनेक आत्माओं को अपनी हवस का शिकार बनायेंगे और कोई किसी की रक्षा नहीं कर पाएगा। ऐसे समय पर सुरक्षित रहने की विधि बताने परमात्मा इस धारा पर आते हैं और बताते है कि पवित्रता की शक्ति ही आत्म रक्षा का कवच बन सकती है। अत: योगी बनो,पवित्र बनो। कई बार कई लोगों के मन में यह सवाल भी आता है कि ऐसे समय पर भगवान मदद क्यों नहीं करता?
परमात्मा देते हैं पवित्र बनने की प्रेणा….
परमात्मा हर आत्मा को मदद करना चाहता है इसीलिए पवित्र बनने की प्रेरणा देते है। जैसे कहावत है कि शेरनी का दूध सोने के बर्तन में ही ठहरता है,अगर कोई साधारण बर्तन में रखा जाए वह बर्तन फट जाता है,वह दूध इतना शक्तिशाली होता है। वैसे ही परमात्मा परम पवित्र है और सर्वशक्तिमान है तो उसकी मदद को स्वीकार करने के लिए पवित्रता की पात्रता चाहिए। सर्वशक्तिमान की शक्ति को प्राप्त करने के लिए आत्मा के अन्दर ब्रह्मचर्य व्रत की शक्ति जरूर होनी चाहिए तभी परम पवित्र परमात्मा की मदद पा सकेंगे इसीलिए परमात्मा इस अंतिम परिवर्तन के समय में आकर पवित्र बनने के लिए कह रहे हैं। पवित्रता की धारणा करने से कैसा भी मुश्किल समय हो,परमात्मा की मदद अवश्य प्राप्त होती है। दुनिया की सर्व आत्माएँ परमात्मा की संतान हैं।

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