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राजयोग से बढ़ा मनोबल, जीवन बना आनंदमय, पाकिस्तान में घुसकर दुश्मनों के छुड़ाए छक्के - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
राजयोग से बढ़ा मनोबल, जीवन बना आनंदमय, पाकिस्तान में घुसकर दुश्मनों के छुड़ाए छक्के

राजयोग से बढ़ा मनोबल, जीवन बना आनंदमय, पाकिस्तान में घुसकर दुश्मनों के छुड़ाए छक्के

शख्सियत

शिव आमंत्रण आबू रोड। देशभक्ति हमारे सपूतों के रग-रग में बसती है जो अपना त्याग और बलिदान देकर भारत माता के इस मिट्टी का कर्ज चुकाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। मृत्यु के भय से मुक्त हुए बिना कोई भी वीर सैनिक अपने सैनिक धर्म-कर्म का उचित निर्वाह नहीं कर सकता है क्योंकि शंका, भय और मोह जैसे विकारों से मुक्त सेना ही अपना साहस और पराक्रम के साथ अपने देश के लिए शौर्य गाथा लिखने में कामयाब हो सकती है। अपने देश का एक ऐसा ही सैनिक ८० वर्षीय वीर सपूत रिटायर्ड नायब सूबेदार ऋषिराम शुक्ला जो अपना शौर्य गाथा सुनाने आबू की धरती पर गांव कोटडीह अयोघ्या उत्तरप्रदेश से पहुंचकर शिव आमंत्रण पत्रिका से खास बातचीत में देश भक्ति जगाने वाली प्ररेणादायी बातें बताई जो आगे उन्हीं के शब्दों में वर्णित है…

पढ़ाई के दौरान हो गया था आर्मी में भर्ती
मैं कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस (सीएमपी) सर्विस से एक रिटायर्ड नायब सूबेदार हूँ। मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। मेरी शिक्षा-दीक्षा गाँव के ही स्कूल में हुई थी। पढ़ाई के दौरान ही मैं आर्मी में भर्ती हो गया। बैसिक ट्रेनिंग खत्म होने के बाद मेरी पहली पोस्टिंग आगरा में पैरा मिलिट्री फोर्स में वालेंटिअर के पद पर हुयी। सर्विस के दौरान देश की तरफ से कई लड़ाइयों में भाग लिया। 1964 में पहली बार कच्छ एक्शन में भाग लिया और हम लोगों की विजय हुयी। इस एक्शन के समय वहाँ पानी की बहुत दिक्कत थी क्योंकि पिछले ग्यारह वर्षों से उस इलाके में बहुत कम बारिश हुयी थी। अचानक वहाँ इतनी बारिश हुई कि हमारी सभी गाडिय़ाँ पानी में डूब गईं। तीन दिनों तक हेलिकाप्टर से खाद्य सामग्री गिराई जाती रही।

टास्क मिला था लाहौर तक पहुँचने का
इस एक्शन के समाप्त होते ही 1965 में पाकिस्तान से युद्ध छिड़ गया जिसमें हमारी पैरा मिलिट्री फोर्स अमृतसर रोड से एडवांस करके बाघा बार्डर पार कर डोगराई होते हुयी छुगुल कैनाल तक पहुँच गई। हमें टास्क मिला था लाहौर पहुँचने का। पाकिस्तानी फौज भागते समय छुगुल नहर पर बने ब्रिज नष्ट कर गई और नहर में बिजली की लाइन डाल दी गई जिससे हम लाहौर पहुँचने से असफल हो गए। इस युद्ध में हमें थोड़ा नुकसान हुआ लेकिन दुश्मन का भारी नुकसान हुआ। हमारे हौसले काफी बुलंद थे।

पाकिस्तानी फौज को ब्रिज तोडऩे से रोक दिया
इसके बाद 1970 में कोलकाता (कलकत्ता) में भडक़े दंगे में भाग लेने का अवसर मिला। लगभग 6-7 महीने तक कलकत्ता शहर में पेट्रोलिंग करते हुये हम लोग शांति स्थापित करने में सफल हुये। इसके तुरंत बाद 1971 में पुन: पूर्वी पाकिस्तान से युद्ध छिड़ गया। ढाका जाने के लिए हमारी फौज को लोहा जंग रिवर जो ढाका से 27 किलोमीटर पहले पड़ती है और बहुत गहरी थी जिसमें पानी के जहाज चलते थे को पार कर जाना था। पाकिस्तानी सेना वापस भाग रही थी। हमें लोहा जंग रिवर के पुल को बचाने का कार्य मिला। उस पुल को बचाने के लिए पैरा मिलिट्री फोर्स की पैराशूट यूनिट को उतारा गया जिसमें मैं भी था। पैराशूट के जरिये 6 आर. सी. यल. गन जो टैंक को तोडऩे के काम आती है उसे भी उतारा गया। जिसमें एक गन नदी में गिर कर डूब गई और एक जवान हैंग हो गया, जिसके पैराशूट कि रस्सी काट दी गई और वह कहीं दूर जा कर गिरा जो 6 माह बाद भारत वापस आया। हम लोगों ने पाकिस्तानी फौज को ब्रिज तोडऩे से रोक दिया। इस प्रकार ब्रिज को बचा लिया गया और हमारी भारतीय सेना ढाका पहुँचने में कामयाब हो गई। इस प्रकार हमारी यूनिट के प्रयास से पूर्वी पाकिस्तान पीछे भागता गया और भारतीय सेना ढाका पहुँचने में कामयाब हो गई। वे क्षण बहुत ही रोमांचक और चुनौती पूर्ण थे।

फौज में उत्कृष्ट सेवा के लिए कुल 13 मेडल मिले
उसी समय आदेश मिला कि पश्चिमी सैक्टर में भटिंडा के पास पैराशूट यूनिट को उतारना है। हमारी ब्रिगेड को दमदम एयरपोर्ट से दिल्ली इंडियन एयरलाइन्स के हवाई जहाज से लाया गया। फिर स्पेशल ट्रेन से सुबह भटिंडा पहुँच गए। जैसे ही हम लोग भटिंडा पहुंचे पाकिस्तानी सेना के जहाज भटिंडा रेलवे स्टेशन पर बमबारी करने लगे। रेल लाइन को भारी नुकसान हुआ। रेल की पटरियाँ टूट गई। हमें भी भारी नुकसान उठाना पड़ा फिर भी हम हौसले से आगे बढ़े और रेल लाइन को और अधिक नुकसान नहीं होने दिया। फौज में उत्कृष्ट सेवा के लिए परमात्म कृपा से कुल 13 मेडल भी मिले जिसके लिए मैं परमात्मा को धन्यवाद देता हूँ।

ज्ञान मंथन से मिलती है बहुत शक्ति…
सर्विस के दौरान ही 1982 में जम्मू रिहाड़ी में ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान का ईश्वरीय ज्ञान मिला। ज्ञान के पश्चात जीवन बहुत संतुष्ट और आनंददायक अब तक बीत रहा है। अब तक कई परिस्थितियों को पार करते हुये नियमित ईश्वरीय ज्ञान क्लास करता रहा हूँ और साथ में निरंतर राजयोग का अभ्यास कर रहा हूँ। आज अपने यूनिट के सदस्यों और अधिकारियों से भी काफी सम्मान मिल रहा है। कुछ फौजियों को भी इस आध्यात्मिक ज्ञान से जोडऩे में सफलता भी मिली है। ईश्वरीय ज्ञान के पश्चात राजयोग के अभ्यास से मेरे मनोबल में दिन प्रति दिन वृद्धि होती गई। जीवन से चिंताएँ कम होने लगीं। कोई भी परिस्थिति अब एक परीक्षा मालूम होती है जिसे पार करने में परमात्मा की मदद मिलती रहती है। कहते हैं, देवताओं ने समुद मंथन किया और अमृत निकला जिसे पीकर वे अमर हो गए। वास्तव में यह सागर मंथन नहीं बल्कि ज्ञान मंथन है जिससे हर इंसान को शक्ति मिलती है।

जीवन के 80 वर्ष कब पूरे हुये पता ही नहीं चला
इस प्रकार फौज की सेवा करते हुये 1985 में सेवा निवृत हो कर अपने गाँव वापस आ गया। गाँव आने के बाद अपने स्थानीय ब्रहमाकुमारीज़ सेवा केंद्र से जुड़ गया। सेवा केंद्र गाँव से दूर होने से नियमित क्लास नहीं कर पाया लेकिन मुरली लाकर पढऩे लगा। मेरी युगल (पत्नी) भी इस ज्ञान में आ गई और जीवन की गाड़ी सुचारू रूप से चलती हुई आज जीवन के 80 वर्ष कब पूरे हुए पता ही नहीं चला। परमात्मा आज भी शक्ति दे रहा है। प्रति वर्ष कई बार मधुबन अपने घर जाने का अवसर मिलता ही रहता है और हम ज्ञान और शक्तियों से भरते रहते हैं। परमात्मा के महावाक्य नियमित सुनता और मेडिटेसन करता हूँ जिससे बहुत सुकून मिलता है। सर्विस के दौरान विषम परिस्थितियों में भी कभी किसी प्रकार का शारीरिक नुकसान नहीं हुआ यह बाबा की शक्तियों का ही कमाल था।

जैसा करोगे, वैसा भरोगे, जो बोओगे वह काटोगे
अंत में मैं सभी सैनिक भाइयों से अर्ज करता हूँ कि वे भी परमात्मा (शिव बाबा) का ज्ञान लेकर स्वयं को तथा अपने पिता को पहचानें और राजयोग द्वारा अपने जीवन को खुशहाल बनाएं। परमात्मा के सृष्टि परिवर्तन के कार्य में अपना सहयोग देकर दैवी दुनियाँ की स्थापना के निमित्त बनें। सृष्टि परिवर्तन के कार्य में प्रकृति भी अपना पार्ट अदा करेगी जिससे कहीं भयंकर सूखा (अकाल) पड़ेगा, कहीं अति वृष्टि होगी, समुद्र में ऊँची-ऊँची लहरें उठेगी जिसमें सब कुछ जल मग्न हो जाएगा, भूकंप आएगा आदि आदि। यह भविष्यवाणी नहीं बल्कि परमात्मा के महावाक्य हैं जो गीता में भगवान ने उच्चारा है…
यदा-यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवती भारत।
अज्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाज्यहम्। ।

गीता के अनुसार यह वही अति धर्म ग्लानि का समय कलयुग है। इसका विनाश होकर नई स्वर्णिम दुनिया व धर्म की स्थापना करने के लिए स्वयं परमात्मा इस धरा पर अवतरित होकर यह ज्ञान दे रहे हैं।

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