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मातृ स्नेह बनो तो हर कोई मानेंगे, सुनेंगे, उस पर चलेंगे - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
मातृ स्नेह बनो तो हर कोई मानेंगे, सुनेंगे, उस पर चलेंगे

मातृ स्नेह बनो तो हर कोई मानेंगे, सुनेंगे, उस पर चलेंगे

आध्यात्मिक समस्या-समाधान

शिव आमंत्रण, आबू रोड/राजस्थान। कभी-कभी सहन शक्ति कम हो जाती है सहनशक्ति कम होने के कारण गुस्सा भी आता है और उस गुस्से में कभी-कभी संबंध भी खराब हो जाते हैं तो हम कैसे अपनी सहनशक्ति को बढ़ाएं? जवाब- अंतर्मुखता के साथ आध्यात्मिकता बहुत मदद करती है। आध्यात्मिकता अंदर ही अंदर अपने आप को समझने में सामने जो बातें हैं उसको समझने में सहज कर देती है। संबंधों में जब कोई बातों को फील करता है तो भारीपन आता है। टोन चैंज हो जाता है, फिर स्नेह के बगैर रूखापन आ जाता है। जब रूखापन संबंध में हो तो जीवन नहीं है। लौकिक में मैं माता और बहन के हिसाब से बड़ी थी।मैंने देखा वह लोग सहन नहीं कर सकते तो मैं करती थी। क्योंकि बहुत काम होता है घर का काम बच्चों का काम जिसमें लोग थक जाते हैं। थकने के कारण सहनशक्ति नहीं होती है। फिर आवाज बदल जाता है, तो यह ध्यान रखना चाहिए कि सब अच्छा है। जब से जो माताएं ज्ञान मार्ग में आई हैं घर स्वर्ग बनता जा रहा है। घर तो वही है वही बाल बच्चे हैं, वही काम है फिर भी बाल बच्चों को प्यार से शिक्षा देते जाओ खुद उस पर चलो। मातृ स्नेही बनो तब हर कोई मानेंगे, सुनेंगे, चलेंगे। बच्चों के नहीं सुनने के कारण यह है कि हमारे पालना का तरीका ऐसा नहीं है जो सुने। मैंने अनुभव किया है कि प्यार से बच्चों को चलाओ। जब मैं ज्ञान मार्ग में आई तो सभी ने हमें बेबी मॉल नाम रखा। सभी माताओं ने हमें अपना बच्चा संभालने को दे दिया। मेरी 21 साल की उम्र थी। उससे पहले हमने एक भी बच्चा नहीं संभाला। लेकिन हमने 40 बच्चों को संभाला। बच्चों को सही टाइम पर उठाना, बिठाना, खिलाना-पिलाना करती थी। सभी बहुत खुश थे। सहनशक्ति के साथ संतुष्टि का कनेक्शन है अगर मैं संतुष्ट हूं तो सहनशील भी रहूंगी। कई बार परिवार के अंदर सबका मन संभालना पड़ता है सबका मन संभालते-संभालते अपना मन डिस्टर्ब हो जाता है तो उसके लिए राजयोग मदद कर सकता है। राजयोग माना साइलेंस में जाना, शांति में रहने के लिए साइलेंस चाहिए। साइलेंस क्यों जाना मतलब परमात्मा से कनेक्शन रिलेशन अर्थात हमारे अंदर परमात्मा की शक्ति आ गई। तो हमारा संबंध किसके साथ है एक तो हमारा माता-पिता परमात्मा वैसा मैं आत्मा। परमात्मा हमारे माता-पिता सद्गगुरु, सखा, बंधु, शिक्षक सभी संबंधों में हैं। यह संबंध अंदर से बहुत शक्ति देती है। अशांत वातावरण में अंदर से डिस्टर्ब आत्माओं को सूक्ष्म गुप्त रूप से राजयोग अभ्यास करने की जरूरत है।
सहनशक्ति से परिवार में रहेगी सुख-शांति…. जितना हम परिवार में सहनशक्ति के साथ चलेंगे, एक-दूसरे की कमी- कमजोरियों को अपने अंदर समाएंगे। एक-दूसरे की विशेषताओं को देखते हुए उन्हें आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। उनकी हौसला आफजाई करेंगे तो इस तरह हमारे आपसी संबंध मधुर और प्रेममय बने रहेंगे। जब हम पारिवारिक संबंधों में एक-दूसरे की कमी-कमजोरियों को देखते हैं, आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं तो मनमुटाव होता है। संबंधों में तनाव बढ़ता है जो आपसी दूरियां बना देता है। मधुर और प्रेममय, सुखमय संबंधों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है अपने अंदर सहनशक्ति का विकास करना।

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