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मेरे कर्म से किसी का मन डिस्टर्ब होता है तो मेरा मन स्टेबल, शांत नहीं रह सकता है - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
मेरे कर्म से किसी का मन डिस्टर्ब होता है तो मेरा मन स्टेबल, शांत नहीं रह सकता है

मेरे कर्म से किसी का मन डिस्टर्ब होता है तो मेरा मन स्टेबल, शांत नहीं रह सकता है

मुख्य समाचार

– इनर टेक्नोलॉजी नेशनल कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ
– अंतरराष्ट्रीय प्रेरक वक्ता बीके शिवानी दीदी ने क्रिएटिव योवर बेस्ट वर्जन विषय पर किया संबोधित
– देशभर से आईटी से जुड़े प्रोफेशनल्स, आईटी हैड, एक्सपर्ट और मैनेजर ले रहे हैं भाग

नेशनल इनर टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बीके शिवानी।  

शिव आमंत्रण/आबू रोड (राजस्थान)। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के शांतिवन परिसर स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में शनिवार को विधिवत आईटी विंग की इनर टेक्नोलॉजी नेशनल कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ किया गया। क्रिएटिव योवर बेस्ट वर्जन विषय पर संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रेरक वक्ता बीके शिवानी दीदी ने कहा कि यहां से सभी संकल्प लेकर जाएं कि रोज एक घंटा स्वयं के लिए निकालेंगे। फिर दो माह बाद आप स्वयं फील करेंगे कि मेरे पास पहले से ज्यादा टाइम आ गया है। हमारा जितना ज्यादा माइंड पावरफुल होता जाएगा तो वह उतने कम आप्शन देगा। इससे हमारा समय बचेगा। जिस इमोशन से हमारी एनर्जी नीचे जा रही है तो वह रांग है, जिस इमोशन से हमारी एनर्जी ऊपर जा रही है, बढ़ रही है तो वह राइट है।
उन्होंने कहा कि मेरे कर्म से किसी का मन डिस्टर्ब होता है तो मेरा मन स्टेबल, शांत नहीं रह सकता है। ऐसे कर्म जिनसे दूसरों को प्रॉब्लम आती है तो वह हमारे खाते में जुड़ जाता है। यदि हम समय की रिस्पेक्ट करेंगे तो समय हमारा रिस्पेक्ट करेगा। आज से ये लाइन खत्म कर दें कि मेरे पास टाइम नहीं है। मैं पवित्र आत्मा हूं… अपने जीवन में लगे दाग को हटाना है। मैं पॉवरफुल आत्मा हूं… ऐसा फील करेंगे तो किसी भी सिचुवेशन में हम पॉवरफुल फील  करेंगे।
आत्मा की तीन फैकल्टी हैं- मन, बुद्धि, संस्कार। – मन ज्यादा सोचता है। जो ज्यादा सोचता है उसकी क्वालिटी और विचार कमजोर होते हैं। यदि हम से बोला जाए कि किसी की अच्छाई के बारे में बोलना है तो हम दो लाइन में ही खत्म कर देंगे। लेकिन यदि बुराई करना हो तो घंटों तक बोलते रहेंगे। इसलिए जब विचारों में क्वालिटी होगी तो शरीर की शक्ति भी बचेगी। बुद्धि सही निर्णय देगी।
– आज हम अपना निर्णय खुद नहीं ले पा रहे हैं, क्योंकि हमारी बुद्धि की शक्ति कमजोर हो गई है। इसलिए हम छोटी-छोटी बातों के लिए दूसरों से डिसीजन मांगते हैं। इसलिए कभी दूसरों को डिसीजन नहीं देना चाहिए, क्योंकि उसका डिसीजन, उनका कर्म बनने वाला है। यदि आपने डिसीजन दिया और वह गलत हुआ तो उसके साथ आपका भी कार्मिक एकाउंट जुड़ जाता है। यदि कोई हमसे सलाह मांगे तो हमें उसे ऑप्शन देना है, गाइड करना है न कि किसी को डिसीजन देना है। एक डिसीजन लोगों का भाग्य बनाता है, बदल देता है। यदि खुद का डिसीजन नहीं होगा तो समस्या आने पर वह कमजोर हो जाते हैं। फिर सारा जीवन हमें दोष देते हैं।
– आज हमारे संस्कार निगेटिव हो गए हैं क्योंकि सोच निगेटिव होने से बुद्धि द्वारा भी गलत निर्णय लेते हैं। धीरे-धीरे वह संस्कार बन जाता है। ईगो, हर्ट होना, एंगर, टेंशन यह आज हमारे संस्कार बन गए हैं। जिस कार्य को अधिक बार किया जाए तो वह संस्कार बन जाता है।  

कॉन्फ्रेंस में मौजूद देशभर से आए आईटी प्रोफेशनल्स।

इन्होंने भी व्यक्त किए विचार-
स्वागत सत्र में विंग की अध्यक्षा डॉ. निर्मला दीदी, दूरसंचार मंत्रालय की निदेशक प्रभा बहन, टीसीएस के वाइस प्रेसिडेंट आनंद मानकताला, हैदराबाद से इन्फोसिस के सीनियर एनालिस्ट बीके ब्रजेश ने विचार रखे। सुबह वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके ऊषा दीदी ने राजयोग मेडिटेशन की विधि सिखाई। उद्घाटन सत्र में जयपुर से आए मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. रूप सींग ने डिजीटल डिटॉक्स, पुणे से आईं वेस्ट रीजन को-अॉर्डिनेटर बीके वर्षा, मुंबई से आईं मोटिवेशनल स्पीकर बीके नीरजा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन आईटी विंग की बीके पद्या और बीके सवीता ने किया।

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