शिव आमंत्रण, आबू रोड/राजस्थान। मैं ओरीजनल आत्मा हूं इस नॉलेज को स्मृति में रखो। वैसे जो भी कोई याद आता है, व्यक्ति या वस्तु याद आती है तो ज़रूर उससे कोई न कोई प्राप्ति होती है। बाबा से क्या-क्या प्राप्ति होती है, वह हमारे सामने इमर्ज होनी चाहिए। कोई किसको लायक बनाता है, तो भी उसकी याद आती है। मैं बेसमझ था, लेकिन इसने मेहनत करके ऐसा योग्य बना दिया। कमाने के योग्य, रॉयल्टी से चलने के योग्य बना दिया। बाबा ने हमको क्या- क्या प्राप्ति कराई है और क्या-क्या बनाया है, यह दोनों ही बातें अगर सदा इमर्ज रहें तो बाबा के साथ का अनुभव अवश्य होगा। अधिकार रखो। बाबा आया किसलिए है! बाबा कहता- मैं ऑफर करता हूं, तुम मेरे साथ को प्रयोग करो। मेरे को यूज़ करो। यह कोई कम बात नहीं है? तो क्यों नहीं हम अधिकार रखें। बाबा बंधा हुआ है। ऐसे नहीं बाबा आपने कहा था ना, आप करेंगे ना? आप करो न ऐसे चिल्लाओ नहीं। हमारा अधिकार है, बाबा बंधा हुआ है। भगवान कभी अपनी प्रतिज्ञा से बदल नहीं सकता। हम बदल सकते हैं, भगवान नहीं बदल सकता। तो अधिकार से बाबा को कहो, बाबा आप जानो। हम सबका बाबा से प्यार है, याद भी है लेकिन इमर्ज रूप में नहीं रहती है। कोई जज है, लेकिन इमर्ज रूप में स्मृति नहीं है कि मैं जज हूं, घर में घरू बन जाएगा, बाप बन जाएगा, भाई बन जाएगा तो वह नशा नहीं होता है। कुर्सी पर बैठने से वह इमर्ज होता है, तो वह नशा रहता है। इसी रीति से बाबा भी कहता है- निश्चय है, नशा है लेकिन मर्ज रहता है, काम में नहीं लाते हैं। कोई भी चीज बढ़िया है लेकिन काम में नहीं लाएं तो वह चीज़ पड़े-पड़े पुरानी हो जाएगी। काम में नहीं लाया तो उसका फायदा तो लिया ही नहीं। बाबा कहते हैं आप सभी बच्चों में शक्तियां, गुण सबकुछ है, नशा भी है प्यार भी है लेकिन टाइम पर यूज़ नहीं करते हो। किसकी आदत होती है चीज़ बहुत अच्छी संभाल कर रखेंगे लेकिन टाइम पर वह याद नहीं आएगी। सामने होते भी नहीं मिलती। परेशान होते रहते। फिर जब समय पूरा हो जाएगा तब याद आएगी। भटकती हुई बुद्धि होती है तो जजमेंट ठीक नहीं होती है। बाबा ने जो पाठ पक्का कराया है कि टाइम पर यूज़ करो। जब बाबा की आफर है कि मैं तुम्हारे साथ हूं तो बाबा की ऑफर आप क्यों नहीं यूज़ करते? बाबा से प्यार तोहै न ऐसा कोई नहीं जो कहे मैंने सुना है, लेकिन दिल से प्यार नहीं है। बाबा से सबका दिल से प्यार है। जब प्यार है तो प्यार के साथ प्राप्ति को भी इमर्ज करो। बाबा बार-बार कहते यूज़ करो अर्थात् स्मृति में लाओ। अनुभव में खो जाओ यह है यूज़ करना। यह सहज है या मुश्किल है? सहज करेंगे तो सहज हो जाएगा। मुश्किल कहेंगे तो छोटी चीज़ मुश्किल हो जाती है। बाबा हमें कितने नशे की बातें सुनाते हैं। अगर वह इमर्ज हों, बाबा सागर है तो मैं मास्टर हूं। ऐसे अगर स्मृति आएगी तो स्मृति के नशे से आप असम्भव से सम्भव कर सकते हैं।

बाबा कहते हैं बच्चों! में ऑफर करता हूं, तुम मुझे प्रयोग करो
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