सभी आध्यात्मिक जगत की सबसे बेहतरीन ख़बरें
ब्रेकिंग
दिव्यांगता शरीर की हो सकती है, लेकिन मन और विचारों की नहीं: अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक लोहिया स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी दक्षता के साथ मानसिक- आध्यात्मिक संतुलन जरूरी तीरंदाजी में युवाओं ने दिखाए करतब, दिव्यांगों ने भी साधा निशाना ब्रह्माकुमारीज़ का मैनेजमेंट सराहनीय है: डॉ. सावंत ब्रह्माकुमारीज़ का नशामुक्त भारत अभियान सराहनीय है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मम्मा कहती थीं हर घड़ी अंतिम घड़ी है: राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी प्राणायाम और राजयोग से दिया तन-मन को स्वस्थ रखने का संदेश
हर व्यक्ति ऊर्जा का बनेगा सैनिक तो होगा हमारा भारत देश आत्मनिर्भर

हर व्यक्ति ऊर्जा का बनेगा सैनिक तो होगा हमारा भारत देश आत्मनिर्भर

मुख्य समाचार

राष्ट्रीय बाल दिवस पर केदार खमितकर के विचार

शिव आमंत्रण, माउंट आबू। एफएम रेडियो मधुबन 90.4 ने राष्ट्रीय बाल दिवस के अवसर पर बच्चों को शिल्प से रचनात्मकता तक ले जानेवाले एक संगोष्ठी के अनूठे कार्यक्रमका आयोजन किया। राष्ट्रीय हित और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी के बारे में बच्चों के मन में जागरूकता पैदा करने के उद्देश से यह ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया। माउंट आबू राजस्थान से रेडियो जॉकी बीके सुभाश्री ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस दौरान कोकिला जैन ने बच्चों को ‘जैव कचरे से कुछ उपयोगी वस्तुएं बनाएं‘ विषय पर मार्गदर्शन किया और केदार खमितकर ने पी.पी.टी. के माध्यम से बच्चों में बचत के संस्कार एवं परिवार और राष्ट्र की सम्पति की सुरक्षा की अवधारणा को विकसित कैसे करें इस विषय पर प्रकाश डाला और कहा, बाल महोत्सव जैसी मनोरंजक घटनाओं का जश्न मनाने के बजाय, बच्चों को परिवार, समाज, देश इत्यादि से संबंधित होना चाहिए और उन्हें सही काम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। हर व्यक्ति अगर राष्ट्र के प्रति ऊर्जा का सैनिक बनेगा तो हमारा भारत देश आत्मनिर्भर बन सकता है। ऊर्जा का एक मैनेजर, व्यवस्थापक, ऊर्जा का ऑडिटर भी बन सकता है।


ग्रीन एक्टिविस्ट कोकिला जैन ने बच्चों को इनडोर सफाई, कीटाणुशोधन और सकारात्मक ऊर्जा के बारे में बताया। पर्यावरण अनुकूल गोबर से बना दिया शुद्ध गाय के घी के साथ ऑनलाइन आत्मानिर्भर भारत कार्यक्रम में उन्होने प्रस्तुत किया गया। कोकिला जैन ने कहा, मै जो कुछ कर रही हूं उसके पीछे महिलाओं को सशक्त बनाने का उद्देश है।
रेडियो जॉकी सुभाश्री ने कहा, कि बच्चों को शिक्षित किया जाना चाहिए, उन्हें औपचारिक शिक्षा देनी चाहिए और परिवार के दबाव से मुक्त करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *