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दिव्यांगता शरीर की हो सकती है, लेकिन मन और विचारों की नहीं: अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक लोहिया

दिव्यांगता शरीर की हो सकती है, लेकिन मन और विचारों की नहीं: अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक लोहिया

मुख्य समाचार

– मनमोहिनीवन में पांच दिवसीय दिव्यांगजन राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ
– देशभर से श्रवण बाधित एवं अस्थि बाधित दिव्यांगजन ले रहे हैं भाग

शिव आमंत्रण, आबू रोड (राजस्थान)। ब्रह्माकुमारीज़ के दिव्यांगजन सेवा प्रभाग द्वारा मनमोहिनीवन में “श्रवण बाधित एवं अस्थि बाधित दिव्यांगजनों की आंतरिक प्रतिभाओं की खोज” विषय पर पांच दिवसीय विशेष दिव्यांगजन सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए दिव्यांग प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। उद्घाटन समारोह में आध्यात्मिक सत्र, प्रेरणादायी व्याख्यान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
इस दौरान अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित सत्येंद्र सिंह लोहिया ने कहा कि दिव्यांगता शरीर की हो सकती है, लेकिन मन और विचारों की नहीं। उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच के माध्यम से हर बाधा को पार किया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से अपनी प्रतिभा को पहचानकर उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया। अंतरराष्ट्रीय पैरा थ्रोबॉल खिलाड़ी अजय रावत ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां ही मनुष्य को मजबूत बनाती हैं। जीवन में आने वाली चुनौतियों को बाधा नहीं, बल्कि अवसर के रूप में स्वीकार करना चाहिए। आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर प्रयास के बल पर ही बड़ी सफलताएं प्राप्त की जा सकती हैं।
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके प्रेम दीदी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर असीम शक्तियां विद्यमान हैं। दिव्यांगता किसी व्यक्ति की कमजोरी नहीं होती, बल्कि यह उसके भीतर छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाने का अवसर प्रदान करती है। राजयोग के माध्यम से मन की शक्ति बढ़ती है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। जब व्यक्ति स्वयं पर विश्वास करना सीख जाता है, तब उसके लिए कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रह जाता।

दीप प्रज्जवलित कर सम्मेलन का शुभारंभ करते अतिथि।

प्रत्येक आत्मा विशेष है-
दिव्यांगजन सेवा प्रभाग के बीके अतुल भाई ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान लंबे समय से दिव्यांगजनों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रहा है। संस्थान का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं है, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का भाव जागृत करना भी है। प्रत्येक आत्मा विशेष है और हर व्यक्ति के भीतर कोई न कोई अनूठी क्षमता अवश्य होती है।

ऐसे कार्यक्रम समाज में नई चेतना का संचार करते हैं-
आबूरोड गेल इंडिया मैनेजर एएस टैगोर ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में नई चेतना का संचार करते हैं। सेवा और सहयोग की भावना ही समाज को आगे बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को प्रोत्साहन और सम्मान देकर उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित-
इस अवसर पर राजयोग सत्र, मूल्यनिष्ठ खेल, भ्रमण, प्रशिक्षण कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों के भीतर छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाना तथा उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना का विकास करना है। कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों का स्वागत बैज, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर किया गया। इसके साथ ही दिव्यांग प्रतिभागियों ने स्वागत गीत और प्रेरणादायी नृत्य प्रस्तुत करके उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया।

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