शिव आमंत्रण, आबू रोड/राजस्थान। बाबा ने जो होमवर्क दिया है। अब उसकी रिजल्ट पूछेगा कि कौन-कौन पास हैं? कौन आधे पास हैं? तो आप किसमें हाथ उठायेंगे! सभी बाबा को यह रिजल्ट देंगे कि बाबा आपने जो कहा वह हमने किया। हम प्यार का रिटर्नदे रहे हैं। अभी तक सोचना और करना इसमें अन्तर दिखाई देता है। सोचते बहुत अच्छा हैं – यह करूंगी, यह करेंगे, यह होगा लेकिन करने में टाइम फिर परिस्थिति बड़ी हो जाती है और स्थिति थोड़ी ढीली हो जाती है। तो बाबा ने कहा अभी बच्चों को सोचना और करना दोनों ही समान करना है। जो सोचा वह किया। बाबा कहते हैं ऐसे नहीं होना चाहिए। जो सोचो वह करों क्योंकि ज्ञान का अर्थ क्या है? ज्ञान माना समझ। तो समझदार जो सोचेगा वहीं करेगा। इस बार बाबा ने कहा कि बाबा सभी बच्चों को सर्वंश त्यागी देखने चाहते हैं। सिर्फ त्यागी नहीं। त्यागी तो हो लेकिन सर्वंश त्यागी यानि कोई भी बुराई का वंश न हो। मोटा-मोटा तो खत्म हो जाता है। मोटे रूप से कहते हैं कि हमारे में लोभ नहीं है सिर्फ कोई-कोई चीज अच्छी लगती है, अच्छा लगता है। अभी अच्छा लगना भी तो लोभ का वंश हुआ ना। अच्छा लगता है माना अशक्ति है। तो मोटा रूप खत्म हो गया लेकिन किसी भी तरफ चाहे वैभव के तरफ, चाहे पदार्थ के तरफ कहाँ भी कोई विशेष अच्छा लगता है माना कुछ लगाव है, लोभ है। सब क्यों नहीं अच्छा लगता! तो सर्वंश त्यागी माना अंश वंश कुछ नहीं। अगर वंश होगा तो अंश भी रहेगा। लेकिन हर एक विकार वंश सहित खत्म हो जाए, उसको कहते हैं सर्वंश त्यागी। और दूसरा बाबा ने कहा – बेहद के वैरागी बनो। अभी सभी देख रहे हैं। और बाबा ने तो अचानक का पाठ बहुत अच्छा सबको पढ़ा लिया है। जबसे बाबा ने अचानक कहा है तब से अगर देखेंगे, तो कितनी अचानक की बातें होती जा रही हैं। और सबको याद आता है कि बाबा ने कहा ना अचानक, तो देखों यह अचानक हो गया। अचानक माना एवररेडी रहो क्योंकि उस समय रेडी होने की कोशिश करेंगे तो तैयार हो ही नहीं सकेंगे। जब प्रैक्टिकल पेपर होता है तो सेकण्ड या मिनट का होता है। अभी उस समय मैं तैयार करूँ कि मैं मोहजीत हूँ, मैं मोहजीत हूँ…। मोह नहीं आवे, मोह नहीं आवे तो मैं पास होंगी या क्या होगा? अपने को ही ठीक करने में इतना टाईम लगता तो क्या होगा। यह तो जैसे तोते की कहानी मिसल हो गया। तो ऐसा न हो कि हम कहें, हमको तो बनना है, बनना है और उस समय कहें मोह आ तो रहा है। बाबा आप मेरा मोह ले लो ना, बाबा मुझे पास कर लो, तो उस समय कौन सुनेगा! बाबा भी कहेगा इतना वर्ष मैंने सुनाया तो वह सुना नहीं, अभी मैं तुम्हारा क्यूँ सुनूँ, अभी पेपर दो। परीक्षा के समय पेपर में प्रिन्सीपल या मास्टर थोड़ी ही मदद करता है। उस समय तो वह चेक करने वाला हो जाता है, पढ़ाने वाला या मदद करने वाला नहीं होता है। तो उस समय हमारा क्या होगा? इसीलिए बाबा बाबा कहते हैं एवररेडी रहो।

सोचना और करना दोनों ही समान हो, जो सोचा वह किया
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