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स्पोर्ट मे भी होती है स्पिरिच्युअलिटी जैसी डेडिकेशन - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
स्पोर्ट मे भी होती है स्पिरिच्युअलिटी जैसी डेडिकेशन

स्पोर्ट मे भी होती है स्पिरिच्युअलिटी जैसी डेडिकेशन

दिल्ली राज्य समाचार

अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी दिव्या का विवेचन

शिव आमंत्रण, दिल्ली। संस्थान के खेल प्रभाग और दिल्ली के लोधी रोड सेवाकेंद्र द्वारा खिलाड़ीयों के लिए ‘अनलॉकिंग हैप्पीनेस’ विषय पर आयोजित ऑनलाईन सेमिनार में अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक दिव्या सिंह समेत खेल जगत से जुड़े कई लोग शामिल हुए। दिव्या सिंह समेत खेल प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बीके जगबीर, कार्यकारी सदस्य बीके विजय, वरिष्ठ राजयोग शिक्षक बीके पीयूष, लोधी रोड सेवाकेंद्र प्रभारी बीके गिरिजा ने लोगों के सवालों के जवाब दिये और उन्हे प्रेरित भी किया।
दिव्या सिंह ने कहा, मेरी जिंदगी का बहुत सारा समय खेलते हुए बीता। मेरी पूरी फैमिली खेल जगत से जुडी हुई है। मुझे लगता है स्पिरीच्युअलिटी और स्पोर्ट में बहुत सिमिलिअरिटी है। जैसे स्पिरीच्युअलिटी मे बहुत डिसीप्लीन की जरूरत है वैसे ही खिलाडियों का जीवन भी पूरा डिसीप्लीन से भरा होता है। जैसे स्पिरीच्युअल पर्सन स्पिरीच्युअलिटी को फॉलो करता है, एकाग्रता करता है वैसी ही एकाग्रता खिलाडी भी रखता है। समझो स्पोर्ट का टाईम चार से छे है तो चार से छे उसके दिमाग और कुछ नही होता। वो टोटल हैपीनेस होती है। वो टोटल डेडिकेशन होती है स्पोर्ट के लिये।
बीके जगबीर ने कहा, ब्रह्माकुमारीज संस्था ने राजयोग द्वारा माइंड पावर ट्रेनिंग स्टार्ट किया है एथलिटस् के लिए। इसके अंदर हैपीनेस भी एक बहुत बडा फैक्टर है। जब भी किसी काम्पिटीशन मे जाए तो उसके लिए हम ये ट्रेनिंग जरूर ले ताकि हमारी खुशी बनी रहे, हमारा जो मूड है वह अच्छा रहे।
बीके पीयूष ने कहा, देखा जाए तो हर व्यक्ति अपनी अपनी जिंदगी में खिलाडी है। जैसे हम मे से कोई अनाडी नही बनना चाहता तो मै चाहुंगा कि जिंदगी में भी हम जरूर जरूर खिलाडी बने। खेल के बारे में एक बात कही जाती है, खेल को खेल की तरह खेलिये। तो आप सबको कहुंगा कि जीवन भी एक खेल है, हमे उसको भी खेल की तरह खेलना है।
बीके विजय ने कहा, सिच्युएशन बहुत बडी है, हर एक के लिए बडी है लेकिन उस सोच को हम पाजिटीव कर लेते है, सोच को राइट कर देते है तो उस राइट थिंकिंग से आप किसी भी सिच्युएशन में खुश रह सकते है।
बीके गिरिजा ने कहा, अगर आप जीवन में बहुत मेहनत कर रहे है, लेकिन उस मेहनत के पीछे आप के जीवन में खुशी नही है तो मेहनत किस बात की।

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