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शरीर के लिए जैसे शारीरिक योगासन वैसे मन को शक्तिशाली बनाने है राजयोग जरूरी - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
शरीर के लिए जैसे शारीरिक योगासन वैसे मन को शक्तिशाली बनाने है राजयोग जरूरी

शरीर के लिए जैसे शारीरिक योगासन वैसे मन को शक्तिशाली बनाने है राजयोग जरूरी

झारखंड राज्य समाचार

शिव आमंत्रण, हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग सेवा केन्द्र पर अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस पर कार्यक्रम किया गया जिसमें कांग्रेस की पूर्व विधायक श्रीमति निर्मला देवी मुख्य रूप से उपस्थित रही। उन्होंने भी सभी के साथ मिलकर आसन -प्राणायाम किया। सेवाकेन्द्र प्रभारी बीके हर्षा ने सभी को योग और राजयोग के बारे में बताते हुए कहा, कि जैसे शरीर को तंदुरुस्त रखने के लिए शारीरिक योगासन जरुरी है, वैसे मन को शक्तिशाली और सकारात्मक बनाए रखने के लिए राजयोग जरूरी है। आज मनुष्य सिर्फ शारिरिक योगा से ही सम्पुर्ण स्वास्थ्य की कामना नहीं कर सकता क्योंकि शारिरिक योगासन से तन पर कार्य किया जा सकता है लेकिन आज हर मनुष्य मन से कमजोर और बीमार है। अगर मन बीमार हो तो शरीर की तंदुरुस्ती भी काम नहीं करती हैं। इसलिए हमें शरीर के साथ मन का भी ख्याल रखना चाहिए। इसलिए जो योग हमें स्वयं योग के जनक परमात्मा शिव सिखा रहे हैं, जिसे सहज राजयोग कहा जाता है, हमें उसका अभ्यास रोज नियमित रूप से जरूर करना चाहिए। साथ ही बीके हर्षा ने महर्षि पतंजलि के द्वारा बताए गए अष्टांग योग के बारे में भी जानकारी देते हुए कहा, कि महर्षि पतंजलि ने जो अष्टांग योग के बारे में बताया है उसमे उन्होंने यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, ध्यान, धारणा और समाधि की चर्चा की है। लेकिन आज मनुष्य आसन प्राणायाम तो करते है लेकिन बाकि बातों पर ध्यान नहीं देते जिससे सम्पूर्ण स्वास्थ्य से वंचित रह जाते हैं। पर परमात्मा जो हमें सहज राजयोग सिखाते हैं वह सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
इस मौके पर सबको कमेन्ट्री द्वारा राजयोग का अभ्यास कराया। बीके तृप्ति ने सभी को व्यायाम के प्रकार बताते हुए एरोबिक, एनएरोबिक, आसन और प्राणायाम का अभ्यास कराया।

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