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योग सिर्फ आसन, प्राणायाम तक नही सीमित समझना है तो सीखो राजयोग - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
योग सिर्फ आसन, प्राणायाम तक नही सीमित समझना है तो सीखो राजयोग

योग सिर्फ आसन, प्राणायाम तक नही सीमित समझना है तो सीखो राजयोग

छत्तीसगढ़ राज्य समाचार

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर वेबीनार में व्यक्त विचार

शिव आमंत्रण, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल श्रीमति अनुसूईया उइके ने कहा, कि योग भारत की एक प्राचीन कला है जो कि हजारों वर्षों से अस्तित्व में है। किन्तु इसे समाजप्रियता तब मिली जब हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री की पहल पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने २१ जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। तब से सारे विश्व में लोग न सिर्फ इसे जानने लगे हैं बल्कि लोगों में योग के प्रति रूचि भी बढ़ी है।
श्रीमति उइके अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा सोशल मीडिया यू-ट््यूब पर आनलाईनआयोजित वेबीनार को सम्बोधित कर रही थीं। विषय था- योगयुक्त जीवन, रोगमुक्त जीवन।
उन्होंने कहा, कि योग स्वस्थ जीवन जीने की कला है। योग को प्राय: लोग आसन और प्राणायाम तक ही सीमित मान लेते हैं परन्तु आसन और प्राणायाम तो प्रारम्भिक विधि मात्र हैं। योग की ध्यानावस्था में जाने की विधि को समझने के लिए राजयोग मेडिटेशन की शिक्षा अत्यन्त आवश्यक है।
उन्होंने कहा, कि योगासनों से शरीर स्वस्थ हो सकता है किन्तु तनाव और काम, क्रोध आदि मनोविकारों को दूर करने के लिए मेडिटेशन यानि ध्यान पद्घति अधिक लाभकारी सिद्घ हो सकती है। मेडिटेशन शब्द लेटिन वर्ड मेडेरी से उत्पन्न हुआ है। जिसका अर्थ है- हिलिंग अर्थात स्वस्थ करना। मेडिटेशन हमारे तन और मन दोनों को स्वस्थ बनाता है। राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास से कुख्यात अपराधियों के भी जीवन में अद्भुत परिवर्तन देखा गया है। योग शब्द की व्याख्या करें तो इसका शाब्दिक अर्थ होता है-जोडऩा। ब्रह्माकुमारी संस्थान में राजयोग के द्वारा अपने मन को सर्वशक्तिमान परमात्मा से जोडऩे की विधि सिखलाई जाती है। यह हमारे मन से चिन्ता, भय और तनाव आदि विकृतियों को दूर करने में बहुत लाभदायक साबित हो रहा है।
जीवन प्रबन्धन विशेषज्ञा बीके शिवानी ने कहा, कि योग से हमारे कर्म श्रेष्ठ बनते हैं और कर्मों से हमारी स्थिति श्रेष्ठ बनती है। योग और कर्म का आपस में गहरा सम्बन्ध है। हमारे हर संकल्प, बोल और कर्म शुद्घ और पवित्र हों। उनमें कोई मैल न हो। तनाव, दर्द, चिन्ता और प्रतिस्पर्धा न हो। इससे ही कर्मों में कुशलता आएगी। हमारा मन व्यक्ति, वस्तु और वैभव से प्रभावित न हो। हमारी आत्मा एक बैटरी की तरह है, उसे सर्वशक्तिवान परमात्मा से सम्बन्ध जोडक़र शक्तियों को अपने अन्दर भर लें। सुबह की शुरूआत अच्छे और श्रेष्ठ विचारों के साथ करनी चाहिए। अध्यात्मिक किताबें पढ़ें। शरीर के स्वास्थ्य के लिए व्यायाम जरूर करें लेकिन मन को स्वस्थ रखने के लिए राजयोग मेडिटेशन को न भूलें।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महन्त ने ब्रह्माकुमारी संस्थान की सराहना करते हुए कहा, कि यह संस्थान राजयोग के माध्यम से पूरे विश्व में शान्ति स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। विश्व के कोन-कोने में इसकी शाखाएं हैं। योग से कर्मों में कुशलता आती है। परमात्मा से शक्ति लेना ही राजयोग है। राजयोग से मन को शान्ति मिलती है। राजयोग मेडिटेशन परमात्मा तक पहुंचने का अच्छा माध्यम है। इस समय पूरा विश्व अशान्त है। ऐसे में हम दुनिया में शान्ति स्थापित करने में सहयोग करें।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री टी. एस. सिंहदेव ने कहा, कि योग भारतीय पद्घतियों की पुरातन क्रिया रही है। आज इसे अन्तर्राष्ट्रीय पहचान मिली है। शरीर की शुद्घता के लिए इसका बहुत महत्व था। कोरोना के इलाज में प्राणायाम बहुत मददगार सिद्घ हुआ है। योग एक तरह का व्यायाम है। योग विज्ञान से भी जुड़ा है। इससे स्वास्थ्य में बहुत लाभ मिलता है। योग से हमारे फेफड़ों में आक्सीजन का ठीक से संचार होता है। योग के लिए सही मार्गदर्शन और सही पद्घति का ज्ञान होना जरूरी है। हमें इसको बढ़ावा देने के लिए जगह उपलब्ध कराने पर विचार करना चाहिए।
माउण्ट आबू से अतिरिक्त महासचिव बीके ब्रजमोहन ने कहा, कि अगर हम योगी जीवन बनाना चाहते हैं तो योग को गहराई से समझने की जरूरत है। योग हमें रोगी और भोगी जीवन से अलग करता है। ब्रह्माकुमारीज का इस वर्ष का स्लोगन है योगयुक्त जीवन, रोग मुक्त जीवन। सभी योगी बनें तो रोगमुक्त विश्व बनाने में हम मददगार बन सकते हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा योग आयोग की अध्यक्ष श्रीमती अनिला भेडिय़ा ने अधिक से अधिक संख्या में लोगों से योग करने की प्रेरणा देते हुए कहा, कि प्राय: हमारी दिनचर्या योग और व्यायाम से शुरू होती है। स्वस्थ रहने के लिए दवाई के साथ ही योग भी जरूरी है। वर्तमान कोरोना काल में वैश्विक महामारी के समय योग बहुत ही लाभकारी सिद्घ हो सकता है। बहुत सारी गम्भीर बीमारियों को योग से ठीक किया जा सकता है।
ब्रह्मïाकुमारी संस्थान की क्षेत्रीय निदेशिका बीके कमला ने कहा, कि हमें तीन बातों पर ध्यान देना होगा। अच्छे स्वास्थ्य के लिए मन का शान्त, निर्भय और शक्तिशाली होना जरूरी है। आज लोगों के मन में चिन्ता, तनाव और भय व्याप्त है। निगेटिव विचार हमारे मन को कमजोर बना रहे हैं। इसका हल आध्यात्मिकता में छिपा है। राजयोग से हमें अपने मन को शक्तिशाली बनाने की आवश्यकता है। बताया, कि ब्रह्माकुमारी संस्थान से पूरे विश्व में आज लाखों लोग जुड़े हुए हैं जो कि राजयोग को अपनाकर तनावमुक्त और शान्तिमय जीवन जी रहे हैं। मन की शान्ति के लिए मेडिटेशन के अलावा अन्य कोई दूसरा उपाय नहीं है।
अन्त में रायपुर की लोकप्रिय गायिका कु. शारदा नाथ ने सुन्दर आध्यात्मिक गीत गाकर सबको भावविभोर कर दिया। वेबीनार का संचालन राजयोग शिक्षिका बीके रश्मि ने किया।

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