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बीमारी एक परंतु रूप अनेक……… - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
बीमारी एक परंतु रूप अनेक………

बीमारी एक परंतु रूप अनेक………

अलविदा-डायबिटीज़

डायबिटीज(मधुमेह) के विभिन्न प्रकार:

टाइप टू डायबिटीज
आज समग्र विश्व में महामारी के रूप में दिखाई देने वाली मुख्य रूप में यह टाइप टू डायबिटीज की बीमारी है। समुदाय डायबिटीज मरीजों में से लगभग ९५ प्रतिशत यह टाईप टू से ग्रसित दिखाई देते हैं। इस प्रकार की डायबिटीज प्राय: ३० वर्ष से उध्द्र्व व्यक्तियों में ही पाया जाता है। और विशेषत: हमारे जीवन शैली में व्यतिक्रम के कारण ही उत्पन्न होता है। हालांकि यह एक अनुवांशिक बीमारी है अर्थात माता पिता यदि इससे ग्रसित हैं तो बच्चों को भी यह बीमारी हो जाती है। परंतु आजकल माता-पिता संपूर्ण रूप से स्वस्थ होते हुए भी अल्प वयस्क बच्चों में भी यह बीमारी दिखाई देने लगी है, जिसे टाइप टू डायबिटीज ऑफ दी यंग भी कहा जाता है। इसका मुख्य कारण हमारी अस्वस्थकारी जीवन शैली है। टाईप टू डायबिटीज से ग्रसित मरीज अधिकतर शारीरिक रूप से मोटे पाए जाते हैं। परंतु कुछ एक संख्यक वयस्क मरीज शारीरिक रूप से पतले-दुबले भी दिखाई देते हैं।

टाइप टू डायबिटीज के मुख्य कारण
शारीरिक मोटापा
अधिक भोजन
शारीरिक श्रम का अभाव
अत्यधिक कार्य व्यस्तता
शहरी जीवनशैली
बढ़ती उम्र
स्टेरएड् की दवाओं का लंबे समय तक सेवन
अधिक मिठाइयां नियमित रूप में खाना
मानसिक दुश्चिन्ता
अस्वास्थ्यकर भोजन
अनाज फल और सब्जियों में प्रयोग होने वाली रसायनिक विषैली दवाइयां

टाइप टू डायबिटीज के लक्षण
मुख्यत: यह एक खामोश बीमारी है। टाइप वन की तरह यह अचानक शुरू नहीं होती है। प्राय: १०-१२ साल तक यह बीमारी पहले बार्डरलाइन (प्री डायबिटिक) स्टेज में रहती है। फिर जब ब्लड शुगर २००-३०० मी.ली.प्रतिशत होता है, तब तक शरीर में इसके दुष्प्रभाव भी दिखाई देने लगते हैं। बहुत कम संख्यक मरीजों में कुछेक लक्षण अनुभव होते हैं। जैसे कि…
अधिक प्यास लगना वा गला सूखना
बार-बार पेशाब आना(रात में ३-४ बार नींद से जागकर पेशाब जाना)
अधिक भूख लगना, शरीर में बार-बार फोड़े निकलना
घाव का जल्दी ठीक न होना
सारे शरीर में खुजली होना
सारा दिन थका-थका महसूस करना इत्यादि

कुछ विशेष ज्ञातव्य बातें
क्योंकि यह एक खामोश बीमारी हैं, २० वर्ष से अधिक प्रत्येक व्यक्ति को साल में एक बार अपना ब्लड शुगर अवश्य चेक कर लेना चाहिए। ब्ल्ड शुगर चेक करने का सही तरीका निम्र प्रकार है:-
सवेरे-सवेरे खाली पेट(रात्री भोजन के बाद कम से कम ८ घंटा खाली पेट होना चाहिए) लेबोरेटरी में जाकर चेक करायें, इसे फास्टिंग ग्लूकोज टेस्ट कहा जाता है।
सवेरे खाली पेट ७५ ग्राम, एनहाइड्रस ग्लूकोज़ पाउडर २५०-३०० मी.ली. पानी में घोल कर शरबत बना कर पीयें। और दो घंटे तक कुछ न खायें और ब्लड शुगर चेक करायें। इसे पोस्ट ग्लूकोज़ टेस्ट कहते हैं।
जो मोटे हैं, उच्च रक्तचाप, ह्रदय रोग, कोलेस्ट्रॉल, थायराइड संबंधित बीमारियां तो साल में एक बार ब्लड शुगर चेक करा लेना चाहिए।
गर्भवती महिलाएं प्रारंभ में और हर तीन महीने में एक बार अवश्य चेक करायें। यदि पीसीओडी तथा हार्मोन्स संबंधित बीमारियां हैं तो शुगर जरूर चेक करायें। टीनएजर्स बच्चे भी मोटे हैं तो चेक करायें।
अति कार्य व्यस्तता, तनाव ग्रसित व्यक्तियों को भी बीच-बीच में शुगर चेक कराते रहना चाहिए।

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