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खुद की इमोशनल इन्फेशन से बचायें - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
खुद की इमोशनल इन्फेशन से बचायें

खुद की इमोशनल इन्फेशन से बचायें

जीवन-प्रबंधन

हमारे चारों तरफ जो लोग रहते हैं, रिश्तो में, घर, ऑफिस, पड़ोस, समाज में, उन सभी के अलग-अलग व्यवहार और संस्कार होते है। कोई परेशान है कोई उदास है, कोई स्थिर है, कोई शक्तिशाली है। लेकिन आजकल बहुत लोग अपने मन का ध्यान नहीं रख रहे। जिससे उनके अंदर जटिलताएं पैदा हो रही है। इसका असर उनके व्यवहार और शब्दों में दिखता है। फिर इसका असर रिश्तों में दिखने लगता है। इसके लिए हमें खुद में सकारात्मक बदलाव लाना होगा। हो सकता है कि एक फीसदी परिवर्तन लाना भी मुश्किल लगे, लेकिन यह है बहुत आसान। बस ध्यान ये रखना है कि लोग हमारे साथ कैसा भी व्यवहार करें, वो उनके मन की स्थिति है। यदि हम अपने व्यवहार में एक फीसदी भी सकारात्मक बदलाव लाएं, तो हमारा सोचने का तरीका बदल जाएगा। अगर हम सोच तुरंत नहीं बदल पा रहे हैं तो हम सिर्फ व्यवहार को बदल लेते हैं। बात करने का तरीका बदल लेते है। वे आपसे अलग- अलग तरह से व्यवहार करेंगे, कभी प्यार से बात करेंगे, कभी चिल्ला देंगे, कभी नजरअंदाज करेंगे, कभी आपके बारे में गलत बात फैला देगें। ये उनकी शख्सियत है। उनके अंदर इतना उतार-चढ़ाव आ रहा है। उन्हें अपना ध्यान रखना होगा लेकिन मुझे अपना ध्यान ऐसे रखना है कि मेरे अंदर उनके उतार-चढ़ाव का कोई असर ना हो। उनके मन की जो स्थिति है। उनके वायब्रेशन अपने तक नहीं पहुचने दें। हमें एक फीसदी बदलाव करना है, क्योंकि ये बाईब्रेसन उनके हैं और मैंने ध्यान नहीं रखा तो यह मुझे एक फीसदी नीचे ले आएगा। यानी नकारात्मक बना देगा। उनके व्यवहार के अनुसार हमें अपना व्यवहार नहीं बदलना है। हम हर एक के व्यवहार के हिसाब से खुद को क्यों बदल रहे हैं। क्योंकि हम कहते हैं उन्होंने ऐसा किया तो मैं क्यों उनसे अच्छे से बात करूं। अगर उनका व्यवहार देखकर अपने अंदर बदलाव लाऊं तो मैं एक फीसदी नीचे हो गई। लोगों के व्यवहार से एक फीसदी डाउन होते – होते, 365 दिनों में मैं बहुत डाउन हो जाऊंगी। हम सभी एक शक्तिशाली आत्मा है- शांत, खुश, पवित्र आत्मा। हमें सिर्फ इस इमोशनल इंफेक्शन से बचाना है। तो आज से हम एक छोटी सी चीज शुरू करते हैं। हमारे शब्द, व्यवहार और बहुत जल्दी हमारी सोच भी बिल्कुल समान रहेगी। हमारा व्यवहार उनके व्यवहार से बदलेगा नहीं। जैसे हम उत्पादों के लिए कहते है ना कि उसकी गारंटी है। ऐसे ही अपनी गारंटी ले। हमारा व्यवहार, हमारे शब्द हमेंशा एक फीसदी ऊपर हो जाते रहेगे। बाहर के भावनात्मक संक्रमण का प्रभाव नहीं पड़ेगा। ये छोटी सी बात आपके अंदर महान परिवर्तन लाएगी। आत्मा की शक्ति संभालना है, बचाना और बढ़ाते जाना है।
दूसरा, कभी भी हम लोगों से किसी और के बारे में निगेटिव बात नहीं करेंगे। हमारे पास अपनी ही कमजोरियां बहुत है उसे कम करने के लिए। हमें अपना संक्रमण ठीक करना है। लेकिन हम दूसरों की कमजोरी के बारे में सोचते रहते है। फिर दूसरों को सुनाते हैं। फिर दूसरों से सुनते हैं। दूसरे की कमजोरी के बारे में सोचना, बोलना और सुनना हमारी स्थिति को नीचे लाता है। मुझे किसी की कमजोरी, किसी की आदत, किसी के गलत संस्कारों की चर्चा नहीं करनी है। मुझे वातावरण को दूषित नहीं करना है। उत्पादों के लिए कहते हैं इसकी गारंटी है। ऐसे ही अपनी गारंटी लें। हमारा व्यवहार, हमारे शब्द हमेंशा एक फीसदी ऊपर ही जाते रहेंगे। बस छोटी – छोटी दो बाते याद रख लेते हैं। एक हम किसी के भी व्यवहार से अपने व्यवहार को नहीं बदलेंगे।
दूसरा, हम किसी की भी कमजोरी को न ही सुनेगे और न सुनाएंगे। आजकल हम सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर परर्सनल चैट में बहुत कुछ लिखते रहते हैं। लोगों के बारे में कमेंट्स करते रहते हैं। अच्छा है लिखना चाहिए, लेकिन कैसा लिखना चाहिए। उन्हें दुआएं दीजिए, फीडबैक भी देना है तो भाषा शुद्ध और पॉजीटिव होनी चाहिए। हमारा हर शब्द जो हम बोल रहे है, जो लिख रहे है हमारी ऊर्जा को ऊपर लेकर जाएगा या नीचे।
हम कैसा व्यवहार करते हैं, कैसा बोलते हैं, कैसा सुनते है और लोगों के बारे में क्या लिख रहे हैं। जितना हम छोटी- छोटी बातों का ध्यान रखेंगे, हमारी मन की स्थिति उतनी ही शक्तिशाली हो जायेगी। फिर जीवन में हम बहुत शांत व स्थिर रहेगें। अगर हमने इन बातो का ध्यान रख लिया तो यह समय अच्छा हो जाएगा। सिर्फ हमारे लिए नहीं, बल्कि हमारे आसपास सभी के लिए।

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