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आसन, प्राणायाम, नैतिक मूल्य, देशभक्ति की भावना व ध्यान को अपनाकर हम कर सकते है विश्व योग दिवस सार्थक - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
आसन, प्राणायाम, नैतिक मूल्य, देशभक्ति की भावना व ध्यान को अपनाकर हम कर सकते है विश्व योग दिवस सार्थक

आसन, प्राणायाम, नैतिक मूल्य, देशभक्ति की भावना व ध्यान को अपनाकर हम कर सकते है विश्व योग दिवस सार्थक

छत्तीसगढ़ राज्य समाचार

टिकरापारा योग कार्यक्रम में बीके मंजु के विचार

वेबीनार के द्वारा बीके मंजु सभा को संबोधित करते हुए।

शिव आमंत्रण, बिलासपुर। सातवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज के टिकरापारा(छ.ग.) सेवाकेन्द्र पर ‘तन व मन के सशक्तिकरण के लिए योग’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें प्रोटोकॉल के अनुसार योगाभ्यास कराया गया। साथ ही शहर के गायत्री परिवार, पतंजलि, आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख व समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने योग के विषय में अपनी प्रेरणाएं व शुभकामनाएं प्रेषित की। बीके मंजू ने कार्यक्रम का संचालन किया व योग प्रशिक्षण प्राप्त बहनों ने योगाभ्यास कराया। ऑनलाइन जुडे लगभग 200 लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
बीके मंजु ने कहा, कि प्रधानमंत्री श्री. मोदी ने विश्व में योग को प्रत्यक्ष किया। जिसमें तन के लिए आसन प्राणायाम के साथ मन के सशक्तिकरण पर भी जोर दिया है और ध्यान व सत्संग को भी इसमें महत्वपूर्ण रूप से शामिल किया गया है। इसी उद्देश्य को लेकर इस वेबिनार का विषय चुना गया। आसन, प्राणायाम, नैतिक मूल्य, देशभक्ति की भावना, सकारात्मक चिंतन व ध्यान को अपनाकर हम विश्व योग दिवस सार्थक कर सकते हैं।

पूरे विश्व को आरोग्य प्रदान कराना हम सबका लक्ष्य: संजय अग्रवाल
छत्तीसगढ योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष व पतंजलि के केन्द्रीय प्रभारी संजय अग्रवाल ने कहा, कि योग दिवस को संकल्प दिवस के रूप में मनाएं और यह संकल्प लें कि प्रतिदिन हम आधे से एक घण्टा योग जरूर करेंगे। क्योंकि जब योग करेंगे-रोज करेंगे तब ही स्वस्थ रहेंगे और मस्त रहेंगे और चेहरे की मुस्कुराहट बनी रहेगी। इससे मन की परेशानियां और तन के रोग ठीक हो जाते हैं।

संतुलित जीवन के लिए तन व मन का स्वास्थ्य जरूरी: सी.पी.सिंह
गायत्री परिवार के प्रमुख सी.पी. सिंह ने कहा, कि मानवीय काया में दो तत्व मुख्य हैं तन व मन। इन दोनों तत्वों के द्वारा शरीर की सारी क्रियाएं संचालित होती हैं। अत: इन्हें स्वस्थ रखकर ही संतुलित जीवन जीया जा सकता है। इसके अतिरिक्त आध्यात्मिक और सामाजिक स्वास्थ्य का भी खयाल रखना होगा। अपने को जानने का प्रयास ही आध्यात्मिकता है। साथ ही हमें सामाजिक उत्तरदायित्वों को भी निभाना है।

सबसे बडा धन निरोगी काया : चावला
आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख प्रशिक्षक किरणपाल चावला ने कहा, कि मजबूत मन कमजोर शरीर को चला सकता है लेकिन यदि मन कमजोर है तो युवा शरीर भी कमजोर व रोगी बन जाता है। सबसे बडा धन निरोगी काया को माना जाता है। क्योंकि स्वस्थ शरीर से ही हम सेवा, साधना, सत्संग कर सकते हैं व किसी के लिए उपयोगी बन सकते हैं। यही मानव जीवन का उद्देश्य है। योग के आठ अंग हैं इसमें सबसे पहले यम और नियम आते हैं जो हमें सीखाते हैं कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।
समाज कल्याण विभाग, बिलासपुर के संयुक्त संचालक एच. खलखो ने भी योग पर अपने विचार व्यक्त किए। इस विभाग से ही प्रशांत मुकासे ने ‘स्वस्थ सदा हमें रहना है…’ गीत के लाइनों के माध्यम से योग का संदेश दिया। साथ ही लेखा अधिकारी जी.आर. चंद्रा ने भी शुभकामनाएं दी। गायत्री परिवार के आचार्य द्वारिका पटेल ने गीता में दिए गए योग व कर्मयोग की विवेचना की।

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