सभी आध्यात्मिक जगत की सबसे बेहतरीन ख़बरें
ब्रेकिंग
ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय में झंडावंदन कर ली परेड की सलामी परमात्म स्मृति सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है: राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी 160 विद्यार्थियों को वितरित किए स्कूल बैग अरावली की पहाड़ियों को नापते हुए तीन हजार रनर्स पहुंचे फिनिशिंग पाइंट पांडव भवन दिव्यांगता शरीर की हो सकती है, लेकिन मन और विचारों की नहीं: अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक लोहिया स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी दक्षता के साथ मानसिक- आध्यात्मिक संतुलन जरूरी तीरंदाजी में युवाओं ने दिखाए करतब, दिव्यांगों ने भी साधा निशाना
अपना जीवन खराब मत करो…….

अपना जीवन खराब मत करो…….

बोध कथा शिक्षा

सिकंदर मकदूनिया (मेसेडोनिया) का ग्रीक शासक था। उसे एलेक्जेंडर तृतीय और एलेक्जें डर मेसेडोनियन नाम से भी जाना जाता है। वह अपनी मृत्यु तक हर उस जमीन को जीत चुका था जिसकी जानकारी प्राचीन ग्रीक के लोगों को थी। वही सिकन्दर जब अपनी जिंदगी की आखरी सांसे ले रहा था तब उसने अपने चिकित्सको से एक इच्छा जाहिर की और कहा! कि मै अपनी माँ को देखें बिना नहीं मरना चाहता हूँ। सिकंदर की माँ किसी दूसरें गॉव में रहती थी। कम से कम चौबीस घंटे लग जाते उन्हें पहुचने में, पर अफ़सोसनाक बात ये थी कि सिकंदर के पास इतना वक्त नहीं था।
वह अभी असहाय था। इस हालात में इतनी जल्दी उसकी माँ कैसे पहुँच पायेगी ? इसी दुविधा में वह पड़ा रहा, घर में और कोई बड़ा – बुढ़ा नहीं था जिनसे वह विचार विमर्श कर सकें। बहुत सोच विचार कर वह अपने चिकित्सको से बोला, कि मै सब कुछ देने के लिए तैयार हूँ, जो भी तुम्हारी फीस हो ले लो, लेकिन चौबीस घंटे मुझे और जिला दो ताकि जिससे मै पैदा हुआ हूं, उससे विदा तो ले लूं। चिकित्सको ने कहा – सीमित आयु बची हैं। यदि मैं अपना बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ दूँ तो भी यह असंभव है। तब सिकंदर ने कहा – मै तुमको अपना आधा सम्राज्य दे दुंगा। इस पर भी चिकित्सक कुछ न बोले। चिकित्सको को उदास और चुप खड़े देख उसने कहा कि तुम मेरा पूरा सम्राज्य ले लो। आज वह खुद को हारा हुआ महसूस कर रहा था। उसे लग रहा है उसका कोई अस्तित्व नहीं है। वह सिर्फ एक लिजलिजा मांस का लोथड़ा है। वह सोचने लगा काश! मुझे पता होता कि पूरा सम्राज्य देकर भी एक सांस नहीं मिलती है तो अपने जीवन भर की सांसे इस सम्राज्य के लिए क्यों खराब करता ?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *