सभी आध्यात्मिक जगत की सबसे बेहतरीन ख़बरें
ब्रेकिंग
अधिकार पद से मिलता है, सम्मान आचरण से अर्जित होता है: मंत्री डॉ. मंजू बाघमार आबूरोड में जल्द ही बनेगी एयर स्ट्रिप: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दुनिया में प्यार, भाईचारा और सहयोग हो: राजयोगिनी चक्रधारी दीदी क्लाइमेट चेंज का समाधान केवल भारत के पास है:  गृह मंत्री मामा नटुंग वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ब्रह्माकुमारीज़ की भूमिका महत्वपूर्ण है: केंद्रीय मंत्री शेखावत देश-विदेश का हर युवा राजयोग करेगा तो वर्तमान परिस्थितियां नहीं देखनी पड़ेगी साढ़े तीन साल में साढ़े सात करोड़ लोगों को दिलाया नशामुक्ति का संकल्प
अध्यात्म से ही आएगी विश्व शांति

अध्यात्म से ही आएगी विश्व शांति

सम्पादकीय

शिव आमंत्रण/ आबू रोड। कालचक्र के वर्तमान समय में विश्व में हो रही विनाशकारी घटनाओं से पूरे विश्व में डर और अशांति का माहौल देखने को मिल रहा है, जिससे विश्व की सभी आत्मायें शांति की तलाश में हैं। पर उन्हें क्षणिक शांति ही मिल पा रही है। अगर हमें वाकई में सच्ची शांति चाहिए तो हमें अध्यात्म की तरफ वापस लौटना होगा। अध्यात्म हमें हमारी आत्मा से जोड़ता है अर्थात यह अंतर्जगत की एक ऐसी यात्रा है जिसमें हम अपने मन और बुद्धि को अपनी आत्मा की तरफ मोड़कर परमपिता परमात्मा से जुड़ते हैं। शांति के सागर से असीम शांति की किरणें हमारी आत्मा में भरकर पूरे विश्व में शांति का प्रकम्पन फैलाते हैं। अंत में एक समय ऐसा आएगा जब हमारी चेतना का सम्पूर्ण विकास होगा। हमारे सारे विकार और वासनाएं समाप्त हो जाएंगी। ब्रह्माकुमारीज़ के साकार संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का जीवन मिसाल है। जिनके शांति के संकल्प और मार्ग आज पूरे विश्व में लाखों लोगों के लिए मार्गप्रशस्त कर रहे हैं। इन लोगों ने अपने आचरण और व्यवहार से समाज में यह साबित कर दिखाया है कि यदि इंसान को सही ज्ञान, मार्गदर्शन मिले तो बदलाव संभव है। साथ ही अध्यात्म का ज्ञान और मेडिटेशन के बल पर ही विश्व को एक सूत्र में बांधा जा सकता है। जरूरत है तो हमें अपनी विचारधारा को वृहद करने की। समय की यही मांग है कि अब बदलाव की जरूरत है। सारे विश्व की निगाहें भारत की ओर हैं क्योंकि भारत में पुरातन संस्कृति अध्यात्म और योग हमें वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना सिखाती है। सर्व भवंतु सुखिन: की भावना और सोची वाली हमारी संस्कृति है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *