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मेडिटेशन से नशा छोडऩे के लिए दवाई की भी जरूरत नहीं - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
मेडिटेशन से नशा छोडऩे के लिए दवाई की भी जरूरत नहीं

मेडिटेशन से नशा छोडऩे के लिए दवाई की भी जरूरत नहीं

मुख्य समाचार
  • मेडिकल विंग की ओर से सिरोही जिले के नशामुक्त भारत अभियान के वालेंटियर का प्रशिक्षण आयोजित
  • सभी ने लिया संकल्प- हम जिले और अपने गांव को बनाएंगे नशामुक्त

शिव आमंत्रण, आबू रोड/राजस्थान। मेडिटेशन में इतनी शक्ति है कि यदि हमने इसे जीवन में अपना लिया तो नशा छोडऩे के लिए किसी तरह की दवाई की भी जरूरत नहीं है। जब हम आत्मनिरीक्षण, आत्म चिंतन करेंगे तो नशा अपना आप छूट जाएगा। यह मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से हानिकारक है। यदि आप नशा करते हैं और इसे छोडऩा चाहते हैं तो सबसे पहले यह देखना होगा हम नशा किन परिस्थितियों में करते हैं और कब-कब करते हैं, क्यों करते हैं।
उक्त उद्गार आबू रोड तहसीलदार रायचंद देवासी ने व्यक्त किए। मौका था ब्रह्माकुमारीज संस्थान के मेडिकल विंग की ओर से मनमोहिनीवन परिसर स्थित ग्लोबल ऑडिटोरियम में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का। इसमें सिरोही जिले के नशामुक्त भारत अभियान से जुड़े वालेंटियर, समाजसेवी, डॉक्टर और ब्रह्माकुमार भाई-बहनों के लिए लोगों को नशा कैसे करें, काउंसलिंग आदि बातों को लेकर टिप्स दिए गए।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में संबोधित करते हुए तहसीलदार देवासी।


तहसीलदार देवासी ने कहा कि आप सभी पूरे समर्पित भाव से लोगों को नशामुक्त करने की सेवा करें और जहां कहीं प्रशासन की मदद की जरूरत हो तो हमें सूचित करें। अभियान में प्रशासन की ओर से हर संभव मदद की जाएगी। नशा से न केवल व्यक्ति का शारीरिक नुकसान होता है, बल्कि वह मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक रूप से खुद को क्षति पहुंचाता है। ब्रह्माकुमारीज संस्थान लंबे समय से नशामुक्ति के लिए सराहनीय प्रयास कर रही है।
ग्लोबल हॉस्पिटल माउंट आबू के निदेशक डॉ. प्रताप मिड्ढा ने कहा कि आप सभी अपने-अपने क्षेत्रों में नशे की गिरफ्त में फंसे लोगों की पहचान कर उनकी व्यक्तिगत काउंसलिंग करें। उन्हें समझाएं कि कैसे नशे से आपको आर्थिक हानि होती है। साथ ही सभी संकल्प करें कि आज से न हम खुद नशा करेंगे और न ही अपने परिवार और आसपास के लोगों को नशा करने देंगे। आप लोगों के बीच एक मिसाल बन जाएंगे तो उन पर भी प्रभाव पड़ेगा। मेडिकल विंग के कार्यकारी सचिव डॉ. बनारसी लाल ने कहा कि मेडिकल विंग पूरे जीजान से नशामुक्त भारत अभियान को सफल बनाने में जुटा हुआ है। हमारा प्रयास है कि नशा पूरी तरह से समाज से दूर हो और खुशहाल समाज बने।

सिगरेट में होते हैं 36 प्रकार के रसायन-
पीआरओ बीके कोमल ने कहा कि सिगरेट के धुएं में 36 प्रकार के हानिकारक रसायन होते हैं जो धीरे-धीरे हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर देते हैं। बड़े आश्चर्य की बात है कि हम बड़ी मेहनत से रुपये कमाते हैं और फिर तंबाकू-सिगरेट लेकर उसे छुपाकर खाते हैं। हम यह जानते हुए भी कि तंबाकू-सिगरेट हमारे शरीर के लिए हानिकारक है फिर भी जहर डाल रहे हैं।

परिवार से ही सीखते हैं बच्चे-
ग्लोबल हॉस्पिटल की डॉ. कनक श्रीवास्तव ने कहा कि यदि माता-पिता सभी तरह के नशे से दूर रहेंगे तो कभी भी बच्चे नशे की गिरफ्त में फंस नहीं सकते हैं। आज यदि तेजी से बच्चे नशे को अपना रहे हैं तो इसके पीछे मुख्य कारण है परिवार के सदस्यों का नशा करना। बच्चे घरों में जो देखते हैं उसे ही सीखते हैं। यदि आप चाहते हैं कि हमारा बच्चा नशा नहीं करे तो सबसे पहले खुद को इससे दूर होना होगा। संचालन डॉ. गोमती अग्रवाल ने किया। आभार बीके अर्चना बहन ने माना। इस मौके पर जिलेभर से आए मेडिकल विंग के वालेंटियर मौजूद रहे।

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