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हमारे श्रेष्ठ कर्म से बढ़ती है आत्मा की शक्ति - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
हमारे श्रेष्ठ कर्म से बढ़ती है आत्मा की शक्ति

हमारे श्रेष्ठ कर्म से बढ़ती है आत्मा की शक्ति

जीवन-प्रबंधन

शिव आमंत्रण, आबू रोड। आज लोग बाहर को प्रोटेक्ट करने के लिए अंदर का नुक सान कर रहे हैं, लेकिन बाहर प्रोटेक्ट हो भी जाता है, लेकिन जब अंदर प्रोटेक्शन नहीं होती है तो बाहर सबकुछ भी हो तो भी जीवन में जो ख़ुशी का अनुभव करना चाहते हैं वह नहीं होता। आजकल लोग कहते हैं मेरे पास सबकुछ है लेकिन संतोष नहीं है। संतोष आर्थत भरपूर आत्मा। भरपूर धन नहीं भरपूर आत्मा अर्थात् शक्तिशाली आत्मा ही संतुष्ट होती है। संतुष्ट होने के लिए कोई प्राप्ति की जरूरत नहीं है। संतुष्टता तो एक संस्कार है, लेकिन उस संतोष को अनुभव करने के लिए आत्मा को हमेशा सही कर्म करना होगा। चाहे जीवन में कितनी भी मुश्किल परिस्थिति आ जाए, लेकिन सही श्रेष्ठ कर्म ही आत्मा की शक्ति को बढ़ाता है। जैसे हम सत्य की खोज में रहते हैं और सत्य बोलना है तो दो बातें ही अलग हो गई ना। तो सच अर्थात् सारा दिन में जो हम काम कर रहे हैं, जो हमारे साथ जीवन में हो रहा है, जो हमें किसी को कहना है। जो हमारा सच है, क्या हम उस बात को वैसे का वैसे सम्पूर्ण रीति बिना कोई मिलावट किए बिना कुछ छुपाए वह जैसा है वैसा उसको समझकर दूसरे को बता सकते हैं तो वो सच है। सत्य क्या है? सत्य अर्थात् जो अविनाशी है और कोई हमसे पूछे कि अपना परिचय दीजिए तो हम अपने बारे में क्या कहते हैं हम अपना नाम, शहर, देश, व्यवसाय, पढ़ाई यही बातों को परिचय समझते आए। बच्चा पैदा होता है तो उसका कुछ भी नहीं होता सबसे पहले उसको एक शरीर मिलता है फिर उसको माता-पिता मिलते हैं, उसे नाम मिलता है परिवार, सदस्य और रिश्ते मिलते हैं। एक दिन वो सब कुछ उससे छूट जाता है अर्थात् वो सारी चीजें आज हैं और अचानक से एक क्षण उसमें से कुछ भी नहीं है लेकिन एक चीज है जो हमेशा थी और हमेशा रहेगी। जो शक्ति इस शरीर को चला रही है और हम सत्य को खोज रहे हैं तो बस हम इसी बात को खोज रहे थे कि हम कौन हैं? यह सत्य जब हमें पता चल जाता है तो जीवन में सत्य बोलना बहुत सहज और सरल हो जाता है। इस सत्य को जानना हर एक व्यक्ति के लिए जरूरी है।

सहनशक्ति माना एक भी निगेटिव थॉट्स न चलें-
आत्मा में सहनशक्ति ज्यादा है, कोई आत्मा में सहनशक्ति कम है। ये आत्मा के जेंडर पर नहीं डिपेंड करता है, ये अलग बात है कि सोशल कंडीशनिंग ने हमें क्या सिखाया, चुप रहो। तो चुप रहना सहन शक्ति नहीं है। मुख से चुप रहे और अंदर से बोलते गए इसको सहनशक्ति नहीं बोलते हैं। तो सोशल कंडीशनिंग ने हमें क्या कहा- चुप रहो तो हम चुप रहे। कहां से चुप रहें। मुख से चुप रहे अंदर रोते गए। अंदर अपने आप को विक्टिम फील करते गए। बेचारी मैं मुझे ही इतना सहन करना पड़ता है। ये सहनशक्ति नहीं है। सहनशक्ति मतलब जिसके अंदर एक भी निगेटिव थॉट नहीं चलती है उसको कहते हैं सहनशक्ति।

पहले कंफर्ट कम थे और शक्ति ज्यादा थी…
हमारे पहले के जेनरेशन के पास कंफर्ट कम थे लेकिन शक्ति ज़्यादा थी। अगर हमने ध्यान नहीं रखा तो हमारी अगली जेनरेशन के पास कंफर्ट सारे होंगे। आप और मैंने एक-एक चीज अपने घर की खरीदी है, उनको सारा कंफर्ट मिलने वाला है। जिनको कंफर्ट मिलेगा बिना मेहनत किए उनकी शक्ति तो वैसे ही कम होगी। क्योंकि उनको ये नहीं पता कि बिना कंफर्ट के भी कोई जीवन हो सकता है। उनको ये नहीं पता कि जब चीजें मेरे अनुसार न हों ऐसा भी कोई जीवन हो सकता है। इसलिए हमारी रिस्पांसिबिलिटी है कि हम उनको कंफर्ट के साथ क्या दें? आज हर पैरेंट अपने बच्चे को कंफर्ट देना चाहता है।

बच्चों को देना होगी इनर पॉवर…
हम अपने बच्चों को सब कुछ दें, लेकिन क्या अगर किसी के पास सबकुछ अच्छा बाहर होगा तो वह जीवन में सफल होगा? सफल होने के लिए उस आत्मा के पास क्या होना चाहिए? इनर पॉवर। इनर पावर मतलब एडजस्ट करने की शक्ति, टॉलरेट करने की शक्ति, अलग-अलग संस्कारों के साथ मिलाकर चलने की शक्ति, प्रॉब्लम आने पर स्टेबल रहने की शक्ति, औरों से प्यार से काम करवाने की शक्ति। ये सारी शक्ति कौन से स्कूल में देंगे, तो ये सारी शक्तियां हमें अपने अंदर भरकर अपने बच्चों को देनी हैं। जब भी कोई कहता है न टाइम नहीं है। हमारे पास मेडिटेशन करने के लिए हम उनको यही कहते हैं अपने लिए मत करो अपने बच्चों के लिए करो। क्योंकि ये वो शक्ति है जो खुद अपने अंदर धारण किए बिना उनको दी जा नहीं सकती, क्योंकि वो खरीद कर नहीं दी जा सकती है। वो अंदर क्रिकेट करके फिर दी जा सकती है। तो हमें अपने बच्चों को इमोशनली स्ट्रांग बनाना है ये समय की पुकार है। जो डिप्रेशन बढ़ रहा है, बीमारियां बढ़ रही है, सबसे इम्पोर्टेन्ट रिश्ते खत्म होते जा रहे हैं। छोटी बातों में कहते हैं बस अब इनके साथ नहीं रह सकते हैं। हम उस जेनरेशन के तरफ जाएंगे अभी कि मुझे यह एडजेस्ट क्यों नहीं करना। अभी अच्छा महसूस नहीं कर रहे क्योंकि वो बड़े ऐसे ही हुए थे ना। आपको और मेरे को ऐसी चॉइस नहीं मिली थी कि ऐसा महसूस हो तो ऐसा करना। हमारे मम्मी-पापा ने कहा था ये करना है, अभी ये बनना है, अभी ये होना है। हम करते गए तो
हमारे अंदर कौन सी शक्ति आ गई जो कहा गया है वो करना है। मुश्किलें आएंगी और उसमें अपना 100 प्रतिशत देना है। शादी की है तो वापस नहीं आना है। एडजस्ट करते जाओ, करते जाओ तो कई शक्ति बढ़ती जाएंगी। इसलिए आज बच्चों के लिए इनर पॉवर बहुत जरूरी है।

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