सभी आध्यात्मिक जगत की सबसे बेहतरीन ख़बरें
ब्रेकिंग
हम संकल्प लेते हैं भारत काे बनाएंगे व्यसनमुक्त उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को किया सम्मानित नई सामाजिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक दृष्टि और नैतिक मूल्य जरूरी नींबू दौड़, बोरा दौड़ और लंबी कूद में बच्चों ने दिखाए करतब अपने काम को खुशी और आनंद के साथ करें: बीके शिवानी दीदी फिर से रामराज्य लाने में मीडिया की रहेगी महत्वपूर्ण भूमिका: मंत्री खराड़ी बच्चों ने स्केटिंग, नृत्य और रस्साकशी में दिखाई प्रतिभा
मैं’ का भ्रम न पालें… - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
मैं’ का भ्रम न पालें…

मैं’ का भ्रम न पालें…

शिक्षा

अशोक वाटिका में जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवार लेकर, सीता मां को मारने के लिए दौड़ पड़ा, तब हनुमान जी को लगा कि इसकी तलवार छीन कर, इसका सर काट लेना चाहिये। किन्तु अगले ही क्षण, उन्होंने देखा मंदोदरी ने रावण का हाथ पकड़ लिया। यह देखकर हनुमानजी गदगद हो गए। वे सोचने लगे, यदि मैं आगे बढ़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि यदि मैं न होता, तो सीता जी को कौन बचाता? कई बार हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है, मैं न होता, तो क्या होता? परन्तु ये क्या हुआ? सीताजी को बचाने का कार्य प्रभु ने रावण की पत्नी को ही सौंप दिया। तब हनुमान जी समझ गए कि प्रभु जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं। आगे चलकर जब त्रिजटा ने कहा कि लंका में बंदर आया है और वह लंका जलाएगा। तो हनुमान जी बड़ी चिंता में पड़ गये कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नहीं है और त्रिजटा कह रही है कि उन्होंने स्वप्न में देखा है एक वानर ने लंका जलाई है। अब उन्हें क्या करना चाहिए? जो प्रभु इच्छा। जब रावण के सैनिक तलवार लेकर हनुमानजी को मारने के लिए दौड़े तो हनुमान ने अपने को बचाने के लिए तनिक भी चेष्टा नहीं की और जब विभीषण ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है, तो हनुमानजी समझ गए कि मुझे बचाने के लिए प्रभु ने यह उपाय कर दिया है। आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि बंदर को मारा नहीं जाएगा पर पूंछ में कपड़ा लपेटकर, घी डालकर, आग लगाई जाए तो हनुमानजी सोचने लगे कि लंका वाली त्रिजटा की बात सच थी। वरना लंका को जलाने के लिए मैं कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता और कहां आग ढूंढता? पर वह प्रबंध भी आपने रावण से करा दिया। सदैव याद रखें कि संसार में जो हो रहा है, वह सब ईश्वरीय विधान है। हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं। इसीलिए कभी भी ये भ्रम न पालें कि…मैं न होता, तो क्या होता ?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *