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बुराईयों के जकडऩ से सदगुणों का करें बंधन - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
बुराईयों के जकडऩ से सदगुणों का करें बंधन

बुराईयों के जकडऩ से सदगुणों का करें बंधन

सम्पादकीय

शिव आमंत्रण आबू रोड । हमलोग समाज के श्रेष्ठ प्राणी है जिन्हें मनुष्य कहते हैं। समाज में आपसी भाईचारे, अपनत्व, नि:स्वार्थ प्यार, अहिंसा, विश्व बन्धुत्व यह डोर प्रत्येक नर नारी को इन्हीं खूबियों से बांध कर रखती है तब यह समाज आदर्श और एक परिवार की भावना के साथ बढ़ता है, सजता है। यही हमारे भारत की संस्कृति और सयता का पैमाना है। दुनिया भर के लोग इसी कारण से भारत की कल्चर को पसंद ही नहीं बल्कि अपनाने की कोशिस करते हैं। वर्तमान दौर में सदगुणों का बंधन ढीला हो गया जिससे मानवीय सयता छिन्न भिन्न हो गयी है। अपने पराये हो गये है। भाई-बहन का सम्बन्ध दूषित होने की राह पर चल पड़ा है। अपने घर में भी कई बार असुरक्षा की भावना पनपने लगी है। हालात तो यह है कि समाज में मानसिक विक्षिप्तता को दर्शाने वाली घटनाओं में 90 प्रतिशत अपने ही जानकार होते हैं। यह क्यों हो रहा है इसके लिए हमें ज्यादा दूर देखने की नहीं बल्कि अपने उस छिपे सत्य को जानने की जरुरत है। जिससे यह दीवार पुन: मजबूती को पा सके। अगस्त महीना रक्षाबन्धन का है। जिसमें इन्हीं रिश्तों को मजबूत करने के लिए धागे बांधकर बहनें अपने भाईयों से संकल्प कराती है कि वह अपनी बहन की रक्षा तो करे ही परन्तु साथ में दूसरी बहनों के लिए भी अपने संकल्पों को शुद्ध और पवित्र रखे और उसकी रक्षा करे। हमें अब केवल इसे एक परंम्परा के रुप में नहीं बल्कि वास्तविकता के तौर पर मनाना है। परमात्मा इस सृष्टि पर अवतरित होकर यही संदेश दे रहे है कि यह दुनियां आसुरीयता में डूब चुकी है। इससे निकलने, अपने मानवीय वजूद को बचाने और पुन: स्थापित करने के लिए पवित्र संकल्पों के साथ रक्षाबन्धन मनाये फिर स्वतंत्रता दिवस सही मायने में सार्थक होगा

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