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राजयोग के अभ्यास से प्रभु की छत्रछाया का अनुभव होता है

राजयोग के अभ्यास से प्रभु की छत्रछाया का अनुभव होता है

बातचीत

बचपन में जब भी मन्दिर में जाता था तो वहां पर देवी-देवताओं की मूर्तियों को देखकर मन में विचार उठते थे कि इनको ऐसा बनाने वाला कौन है, इनकी पूजा क्यों हो रही है? ऐसे बहुत से प्रश्न मन में उठते थे इन सभी प्रश्नों का उत्तर मुझे ब्रह्माकुमारीज़ में 7 दिन का कोर्स करने के बाद मिला। अब मुझे पता चल गया है कि निराकार परमपिता परमात्मा ही कलियुग के अंत में इस धरा पर अवतरित होकर ब्रह्मा तन को आधार बनाकर हम बच्चों को ऐसी शिक्षा देते हैं कि जिसको जीवन में धारण कर हम भविष्य में सतयुगी देवी-देवता बनते हैं। राजयोग के निरंतर अभ्यास से जीवन में बहुत परिवर्तन आया है। जीवन में आई कठिन परिस्थितियों को भी राजयोग द्वारा बहुत सहज तरीके से पार कर लिया। इससे जीवन में धैर्यता, सन्तुष्टता, गंभीरता आदि गुणों का समावेश हुआ, जीवन जीने की कला सीख ली। राजयोग से हर पल प्रभु की छत्रछाया का अनुभव होता है।

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