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राजयोग से हम परमात्मा को सुना सकते हैं दिल की बात - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
राजयोग से हम परमात्मा को सुना सकते हैं दिल की बात

राजयोग से हम परमात्मा को सुना सकते हैं दिल की बात

शख्सियत

पिताजी भी थे फौज में, मां के परिवार की पांचवीं पीढ़ी….
लेफ्टीनेंट कर्नल चौहान ने बताया कि मेरे पिताजी सेना में थे। इससे घर में बचपन से सख्त, अनुशासित जीवनशैली रही। साथ ही मेरी मां की पांचवीं पीढ़ी सेना में है। फैमिली वैकग्राउंड फौज का होने से संस्कार में कडक़ मिजाज और गुस्सा था। साथ ही मांसाहार का भी सेवन करता था। पिताजी आर्मी के जूते पहनकर साथ में खेलते थे, जब भी उन्हें गुस्सा आता था तो वह जूते से ही मारते थे। पढ़ाई के बाद मैंने भी आर्मी ज्वॉइन की और यहां ऑफीसर बन गए।

शिव आमंत्रण,आबू रोड। राजयोग मेडिटेशन ध्यान की वह विधा है जिसके माध्यम से हम परमात्मा को अपने दिल की बात सुना सकते हैं। दरअसल यह टू-वे कम्युनिकेशन है, जिसमें हम अपनी सारी परेशानियां, समस्याएं और उलझने परमात्म के साथ शेयर कर सकते हैं। बदले में परमात्मा हमें वरदान, सदा निश्चिंत भव का आशीर्वाद और यह स्वमान याद दिलाते हैं कि आप साधारण नहीं महान आत्मा हो, आपका जन्म महान कार्यों के लिए हुआ है। सफलता आपका जन्मसिद्ध अधिकार है। राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास से सेना में होने के बाद भी मैं मांसाहारी से शाकाहारी बन गया और गुस्सा शांति में बदल गया। यह कहना है लेफ्टीनेंट कर्नल विकास चौहान का।ब्रह्माकुमारीज संस्थान के माउंट आबू स्थित ज्ञान सरोवर अकादमी में राजयोग मेडिटेशन के नियमित अभ्यास से जीवन में आए परिवर्तन का अनुभव सुनाते हुए उन्होंने कहा कि आर्मी में ऑफीसर बनने के बाद मुझे महसूस होने लगा कि अपने गुस्से को कम करना है। साथ ही पूरी तरह शाकाहार अपनाना है। मन में ये ऊथल-पुथल लंबे समय से चल रही थी, लेकिन इसे जीवन में कैसे अप्लाई करें, इसकी कोई राह नहीं दिख रही थी।
वर्ष 1999 की बात है। मेरी पोस्टिंग सीओडी मुंबई में लेफ्टीनेंट कर्नल के रूप में हुई। उस दौरान कारगिल युद्ध चल रहा था। एक युद्ध तो कारगिल में चल रहा था और एक युद्ध मेरे अंदर चल रहा था कि मुझे गुस्सा क्यों आता है? मैं खुद से बात करता-रहता था लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता था कि ऐसी स्थिति में क्या करुं।
एक दिन मेरे ऑफिस में दो ब्रह्माकुमारी बहनों फौजी भाइयों को राखी बांधने के लिए आईं। मैंने उनसे कहा कि आप लोग यहां राखी बांधने क्यों आईं तो उन्होंने कहा कि वहां कारगिल में युद्ध चल रहा है, लेकिन वहां तो हम बहनें जहां नहीं सकती हैं, इसलिए यहां हमारे फौजी भाइयों को राखी बांधने आएं हैं ताकि हमारे दिल की दुआ उन तक पहुंचे। इस तरह का विचार पहली बार सुनकर मैं हैरान रह गया। मैंने कमांडर से अनुमति लेकर उन्हें अगले दिन राखी बांधने के लिए मंजूरी दी।
दूसरे दिन उन बहनों ने ब्रह्माकुमारी संस्थान का परिचय देते हुए आत्मा-परमात्मा आदि का ज्ञान दिया, लेकिन एक बात जो मेरे दिल को छू गई। उन्होंने कहा कि भाइयों हम आप सभी से एक वायदा चाहते हैं, क्या हम जो मांगेंगे आप देंगे? उन्होंने कुछ पर्चियां हम सभी को दीं और कहा कि जो चीज आप वर्षों से नहीं छोड़ पा रहे हैं, उसे आज हमें दान में दे दो। इस पर मैंने उन्हें लिखकर दिया कि मैं क्रोध से बहुत परेशान हूं, इसे छोडऩा चाहता हूं। उन दिन मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे मन का बोझ हल्का हो गया है।
उसी दिन मैं शाम को मुंबई के ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र पर पहुंचा, वहां पहुंचते ही ब्रह्माकुमारी बहन ने कहा कि परमात्मा कहते हैं हमें प्रसन्नचित्त रहना चाहिए, प्रश्नचित्त नहीं। यह बात मेरे दिल को छू गई। इसके बाद मैंने सात दिन का राजयोग मेडिटेशन कोर्स किया। बाद में मेरी पत्नी ने भी राजयोग का कोर्स किया।

वर्ष 2011 में पहली बार आया था माउंट आबू
अपना अनुभव सुनाते हुए उन्होंने कहा कि हमारे संकल्पों में असीम शक्ति है। जीवन में जब कभी मुसीबत में फंसो तो सबकुछ परमात्मा पर सौंप दो, परमात्मा अपने बच्चों का कभी भी नाम खराब नहीं होने देता है। मुझे विश्वास नहीं था कि मैं राजयोग का अच्छा अभ्यासी बन सकता हूं। वर्ष 2011 में मैं पहली बार ब्रह्माकुमारीज संस्थान के माउंट आबू स्थित ज्ञान सरोवर अकादमी में आया। यहां तीन दिवसीय शिविर में गहराई से राजयोग मेडिटेशन के बारे में सुना और अनुभव किया तो मुझे एहसास हुआ कि मैं भी कुछ कर सकता हूं।

जवान की खुदकुशी से लिया सबक… अब कुछ करना है
वर्ष 2013 में सीओडी कानपुर में था। एक दिन अशोक गाबा जी का फोन आया कि शाहजहांपुर में एक ब्रिगेड में एक जवान ने ड्यूटी के दौरान खुद को गोली मार ली है तो आपको वहां स्ट्रेस मैनेजमेंट का कोर्स कराने जाना है। मेरे साथ ब्रह्माकुमारी बहनें भी थीं, वहां मैंने तीन दिन अच्छी तरह से सुना और उसे जीवन में अप्लाई करना का ठाना। इसके बाद मेरी कानपुर से पोस्टिंग अहमदाबाद हुई। यहां वर्ष 2014 में जैसे ही यहां आया कि 10 अक्टूबर को एक जवान ने खुदकुशी की कोशिश की। उसकी जांच मुझे दी गई। इस दौरान 11 जनवरी 2015 को एक जेसीओ ने अपनी बटालियन में खुदकुशी कर ली। इन दो घटनाओं के बाद मैंने अपने सीईओ से कहा कि मुझे कुछ करना है और परमिशन के लिए गुजारिश की। इसके बाद मैंने अपने फौजी भाइयों को स्ट्रैस से उबारने के लिए स्ट्रेस मैनेजमेंट कोर्स की शुरुआत की।
संदेश: जीवन में दुआएं कमाना बहुत जरूरी
उन्होंने कहा कि कोई भी कार्य जब हमें करना ही है तो क्यों न खुशी से करें। अपने जॉब को एंजॉय करके करें। इतना ख्याल रखें कि यदि हमें ऊपर से स्ट्रेस मिला तो हम उसे डिस्ट्रीब्यूट न करें, नहीं तो एक दिन वापस वह हमारे पास ही लौटकर आता है। मैंने अनुभव किया कि आप जिस भी पेशे में हो और अधिकारी हों तो अपने अधीनस्थों के लिए कभी भी छुट्टी के लिए मना नहीं करें। इससे आपको सदा दुआएं मिलेंगी। आप किसी भी इंसान की गलती को सहन करो, हर एक इंसान में कुछ न कुछ अच्छाई है। इसलिए हमेशा लोगों की अच्छाई को देखना चाहिए। जब हमारे दिल में किसी के प्रति शुभभावना होती है तो हमारे जीवन में भी खुशी बढ़ती है। परमात्मा हमें सहन शक्ति और समाने की शक्ति देते हैं।
जब हम राजयोग का अभ्यास करते हैं तो ये शक्तियां जागृत हो जाती हैं और हमारी विल पॉवर बढ़ती है। जीवन में दुआएं कमाना बहुत जरूरी है। दुआएं हमें जीवन में बहुत आगे बढ़ाती हैं।

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