साधारणतः हम सभी हर वित्तीय वर्ष में अपने रजिस्टर से हिसाब-किताब देखकर पुराने चुक्तु कर नए सिरे से आरम्भ करते हैं। इस बार हम आध्यात्मिक ज्ञान-योग से अपने ज्ञान धन और दुआओं का स्टॉक बढ़ा कर इसे संतुलित, संयमित और संयोजित कर सकते हैं। इसके लिए हम परमात्मा पिता से जो अविनाशी ज्ञान धन मिल रहा है उसे अधिक से अधिक अर्जित कर अपने पाप-पुण्य का हिसाब-किताब सेटलमेंट करने का संकल्प लें। परमात्मा कहते हैं कि हमारे हिसाब तीन प्रकार से चुक्तू होते हैं -एक योगबल अर्थात जब हम स्वयं को आत्मा समझ कर परमात्मा को याद करते हैं। उससे हमारे पाप नष्ट होते हैं। दूसरा भोगबल अर्थात शारीरिक बीमारी जो आती है उससे हमारे हिसाब चुक्तू होते हैं। तीसरा जब हम उस आत्मा को आत्मिक सुख देते हैं तो हमारे कर्मों का लेखा-जोखा ठीक होता जाता है। इसलिए हमें सहर्ष अपने जीवन में इसे संतुलित करना चाहिए। निरंतर योगबल जमाकर अपने जीवन में पुण्य और दुआओं का खाता बढ़ाते जाना है। सर्व आत्माओं के प्रति कल्याणकारी, शुभ चिंतन, शुभ भावना और शुभकामना रखनी है। अपने ज्ञान, गुण और शक्तियों का खाता बढ़ाते हुए सभी पर रहम कर दान करते जाना हैं। जिससे हम 21 जन्मों के लिए आने वाली नई सतयुगी दुनिया में सुख – शांति से जीवन व्यतीत कर सकें।

ज्ञान-योग से जीवन के वित्तीय लेखा-जोखा को संतुलित करें
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