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आत्म दीप जगाकर परमात्म प्रेम कि लगन को बढ़ाए

आत्म दीप जगाकर परमात्म प्रेम कि लगन को बढ़ाए

सम्पादकीय

दिवाली में हम सभी दीया जलाकर, पूजा-पाठ तो करते ही हैं। पर इस दिवाली हम सभी अपने अन्दर आत्म दीप जगाकर सभी को सूर्य की तरह रोशनी दे सकते हैं ताकि विश्व की सर्व आत्माएं अपने परमपिता परमात्मा से बिछड़े हुए स्वयं को जान और परमात्मा पिता को पहचान कर उससे मिलन मनाने के लिए अरावली पर्वत की महान देव भूमि माउंट आबू आ कर अपने जनम-जनम की परमात्म प्रेम की प्यास बुझा सकें। इसके लिए हमें सभी मनुष्य आत्माओं को शुभ भावनाओं और शुभकामनाओं के साथ सदा समर्थ संकल्प धारण करना होगा। अपने अंदर की परमात्म प्रेम की लगन और ज्वाला को नित बढ़ाते जाएं। ताकि इस ज्वालाग्नि से विश्व की सर्व आत्माओं को रास्ता मिल सके और वे सहज ही ज्ञान सूर्य परमात्मा से मिल सके। इस मिलन मेला से हमारे अंदर सदा ही शांति और प्रेम का दीया जलता रहेगा। जिससे हमें अहसास होगा की हमारी तो रोज ही दिवाली है। इस दीवाली संकल्प करें कि अपने मन में जो नकारात्मक बुराई रूपी अंधकार है उसे सदा-सदा के लिए विदाई देकर सदा-सदा के लिए अच्छाई रूपी नेक कर्म, सोच को स्वीकार करेंगे। सदा खुश रहेंगे और दूसरों को खुशियां बांटेंगे। इसलिए हमारे दिल से निकलता है जगमग-जगमग आत्म दीप जले, घर के आँगन में फूल खिले, दिल मिले, सुर सजे, संगीत बजे, मन मंदिर में परमात्मा राम बसें, बस यूं ही दिवाली सेलिब्रेट करें। तो आप सबको खुशियां खूब मिले।

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