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राजयोग मेडिटेशन से बदली जिंदगी, जीवन बन गया आसान - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
राजयोग मेडिटेशन से बदली जिंदगी, जीवन बन गया आसान

राजयोग मेडिटेशन से बदली जिंदगी, जीवन बन गया आसान

शख्सियत

शिव आमंत्रण, आबू रोड। व्यक्ति कैसी भी परेशानी परिस्थिति से क्यों न गुजर रहा हो लेकिन धैर्यता के साथ जीवन को चलाने और समाधान ढ़ंढ़ते रहने से आखिरकार सही रास्ता मिल ही जाता है। हम अपने मंजिल तक पहुंचने में कामयाब हो ही जाते हैं। खासकर जब जीवन में परमात्म ज्ञान के साथ परमात्म मिलन अर्थात राजयोग का सामंजस्य अपने दिनचर्या में आ जाए। फिर तो जीवन मानो हीरे तुल्य हो जाता है। जहां हमारे पवित्र और सकारात्मक वाईबे्रसन से सामने कैसी भी नकारात्मक हिंसक वृत्ति वाले भी क्यों न हो लेकिन वह भी नतमस्तक हो ही जाता है। ऐसी ही एक महान विभूति बीके मृत्युंजय करमाकर हैं जो अपने सकारात्मकता से सामने कैसी भी बुरी प्रवृति वाले लोग हों लेकिन उस पर अपना और परमात्म रंग लगाने में कामयाब हो जाते हैं। उन्होंने अपना अनुभव शिव आमंत्रण के साथ साझा किया है।
मृत्युंजय करमाकर एक सिविल इंजीनियर केे साथ इंडियन ऑयल कंपनी का चीफ मैनेजर टर्मिनल के रूप में कार्यरत हैं। (अब उन्हीं के शब्दों में$) हावड़ा टर्मिनल में अभी मेरी पोस्टिंग है। हावड़ा टर्मिनल इंडियन ऑयल का 50 साल से ज़्यादा पुराना टर्मिनल है। जहां से पश्चिम बंगाल का 40 प्रतिशत एरिया का सप्लायी हमारे एरिया से होता है। लगभग वहां 500 से ज़्यादा टैंक और ट्रक जिसमें हम तेल भर के देते हैं जो वहां से निकलता है और हमारे इधर जो तेल आता है वो हल्दिया रिफ़ाइनरी से अंडरग्राउंड पाइप लाइन से आता है। उस तेल को वहां पहले हम लोग स्टोर करते हैं। मैं वहां एक मुख्य प्रबंधक के हिसाब से कऱीब 22 साल से सेवा दे रहा हूं।
मुझे नया जीवन मिल गया
एक बार मेरा सर्विस होमटाउन से कहीं और ट्रांसफर हो गया। तो उस समय मेरे लाइफ़ में काफ़ी चैलेंजिंग सिचुएशन आई, तब मेरे लाइफ़ में काफ़ी डिप्रेशन आ गया था। तब वहां मैं एक मेंटल डॉक्टर को दिखाने के लिए गया था। जहां वह अपार्टमेंट में रहता था उसी के बग़ल में एक नर्सिंग होम था। बाद में पता चला वो डॉक्टर भी ब्रह्माकुमार था। वहां जब मैं ध्यान से देखा तो उसमें लिखा हुआ था मेडिटेशन फॉर पीस ऑफ़ माइंड। तो वह सेन्टेन्स मुझे अट्रैक्ट किया। मैंने वहां जाकर पूछा कि मेरी मेंटल स्थिति ऐसा-ऐसा है क्या मुझे यहां से रिलीफ़ मिल सकता है? तो उन्होंने कहा कि ज़रूर रिलीफ मिल सकता है आप यहां जरूर मेडिटेशन प्रशिक्षण के लिए आइए। जब मैं वहां का मेडिटेशन प्रशिक्षण प्राप्त किया तो मुझे लगा कि अब मुझे नया जीवन मिल गया है।
तो आज मैं इस दुनिया में नहीं होता
उस समय मुझे ब्रह्माकुमारीज़ का यह अद्भुत ज्ञान नही मिलता तो आज मैं इस दुनिया में नहीं होता। इस तरह 2003 में मैं ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान से जुड़ कर एक नया जीवन शुरू किया। उसके बाद मैं सारे चैलेंजस को ओवर कम किया। 2006 में मेरा प्रमोशन भी हुआ और मंै वहां से ट्रांसफर होकर संबलपुर चला गया। 2008 में मैं पहली बार माउंट आबू आया था तब तक दादी प्रकाशमणी जी शरीर का त्याग कर चुकी थी। उस समय अक्टूबर मेें बाबा मिलन के समय डायमंड हॉल में जब दादीजी का फ़ोटो देखा तो काफी प्रभावित हुआ उसके बाद उनके बारे में जानकारी ली और मेरी तो जिन्दगी ही बदल गयी।
बुरे स्वभाव के लोग भी सहजता से पेश आते
मेरी सर्विस ऐसी है जिस कारण मुझे ऑल इंडिया घूमना पड़ता है। कभी-कभी मुझे बिहार भी जाना पड़ता था। बिहार में बेगूसराय, फारबिसगंज, कटिहार जैसे और भी कई जिलों में। उस टाइम बिहार में बहुत सारे कारण थे। क्राईम चरम सीमा पर था लेकिन हमें कभी कोई दिक्कत इस परमात्म ज्ञान और योग के वजह से कभी नहीं हुई। परमात्म शक्ति के कारण अपराधी भी मेरे से अच्छे से पेश आता था। इस सात्विक ज्ञान से मुझे एक विशेष बात समझ में आयी कि दुनिया में कोई इंसान खऱाब नहीं होता है। सबके अंदर आत्मा की वह सभी क्वालिटी मौजूद है, लेकिन सबके अंदर छुपा हुआ है।
मुझे हर पल बाबा से मदद मिलती है
हम अगर किसी से अच्छी तरह से पेश आएंगे तो वो हमारे साथ कभी भी बुरा व्यवहार नहीं करेगा। यह बात मेरे मन का बहुत गहरा विश्वास था और अभी भी है। कोई भी इंसान हो किसी से भी मैं मिल सकता हूं और बात कर सकता हूं। मुझे हर पल बाबा से मदद मिलता ही रहा है। मुझे कोई इंसान कभी बुरा नहीं लगता था और नहीं लगता है। कईयों को देख कर मैं यही समझता था कि ये ओरिजिनली बुरा नहीं है सिचुएशन ऐसा आया होगा, इसलिए यह बदल गया। लेकिन इसको मैं अगर रिस्पेक्ट के साथ व्यवहार करूं तो ये फिर से बदल जाएगा। तो ये मेरा पूरा विश्वास था और है।
लोग समान की निगाहों से देखते हैं
मुझे इस ज्ञान में आने के बाद मेरी मम्मी भी मेरे साथ इस ज्ञान में आ गई। उसके बाद तो मेरा सारा परिवार ही बाबा के ज्ञान में आ गया। हम लोग पहली बार सारा परिवार मिलकर मधुबन आए थे। ऑलमोस्ट एवरी ईयर हम यहां आते ही रहते हैं। ज्ञान में आने के बाद भी मुझे बहुत सारे चैलेंजेज जीवन में आयी, परंतु बाबा और बाबा का ज्ञान हर पल मेरे साथ था और है। बाबा का दिया हुआ बैज इज्जत से लगाकर मैं कहीं पर भी जाता हूं , वह चाहे ऑफि़स हो या ट्रेन में कहीं भी सफर कर रहा होता हंू। मुझे बहुत ही प्रोटेक्शन मिलता है और लोग सम्मान की निगाहों से देखते हैं।
सर्विस के दौरान जब ऑफि़स में शुरू-शुरू में जाता था तो पहले तो मैं सबके साथ सब कुछ खाया-पिया करता था लेकिन जिस दिन से मैंने भगवान और उनके ज्ञान को अपनाया तब से पूरी धारणाओं पर चलने लगा। सब उल्टे खान-पान छोड़ दिया, तब तो ऑफि़स में भी सब ने थोड़ा विरोध भी किया था, लेकिन जब वो लोगों ने देखा कि यह अब बदलने वाला नहीं है तब लोगों ने हार मान कर विरोध करना छोड़ दिया। उल्टे प्रभावित होकर तो कईयों ने मेरे रास्ते चलने शुरू कर दिये। यह बाबा का ही कमाल था। ये नॉलेज इतना सर्वश्रेष्ठ है कि हर आदमी को जीवन में सच्चा सुख और शांति का अनुभव करने के लिए इसे अपनाना चाहिए। जि़ंदगी जीना काफ़ी आसान हो जाता है। मैं समझता हूं कि राजयोग कोई ऐसा-वैसा योग नहीं है ये जीवन जीने की एक कला है।

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