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नेताओं के लिए योग, ध्यान और साधना जरूरी: नेता प्रतिपक्ष सिन्हा - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
नेताओं के लिए योग, ध्यान और साधना जरूरी: नेता प्रतिपक्ष सिन्हा

नेताओं के लिए योग, ध्यान और साधना जरूरी: नेता प्रतिपक्ष सिन्हा

मुख्य समाचार

– प्रेरणादायक नेतृत्व के लिए परमात्म शक्तियों एवं वरदानों की प्राप्ति विषय पर आयोजन
– राजनेता सम्मेलन में भाग लेने देशभर से राजनेता, जनप्रतिनिधि और विभिन्न पार्टियों के पदाधिकारी पहुंचे

शिव आमंत्रण, आबू रोड/राजस्थान ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के आनंद सरोवर परिसर में राष्ट्रीय राजनीतिक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर से राजनेता, जनप्रतिनिधि, पार्टियों के पदाधिकारी भाग ले रहे हैं। प्रेरणादायक नेतृत्व के लिए परमात्म शक्तियों एवं वरदानों की प्राप्ति विषय पर आयोजित सम्मेलन में शुभारंभ पर बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राजनीति करने वाले लोगों के लिए योग, ध्यान और साधना बहुत जरूरी है। ब्रह्माकुमारीज़ के ज्ञान से हमें मानसिक शांति मिलती है। इससे शांति-सुख का मार्ग प्रशस्त होता है। कोई भी धर्म हो सभी का मकसद समाज का उत्थान होता है। पहले की सत्ता में राजगुरु होते थे और उन राजगुरु के हिसाब से सत्ता चलती थी। सत्ता में सबके कल्याण का भाव होना जरूरी है।  

21वीं सदी का सपना साकार हो रहा है-
नेता प्रतिपक्ष सिन्हा ने कहा कि हजारों वर्षों की गुलामी के कारण हम अपनी शक्ति को भूल गए और जो मुक्ति का मार्ग था उससे भटक गए। स्वामी विवेकानंदजी ने 21वीं सदी के भारत की भविष्यवाणी 19वीं सदी में की थी। आज ब्रह्माकुमारीज़ के माध्यम से सकारात्मक वातावरण का निर्माण हो रहा है। 21वीं सदी के भारत का सपना आज साकार हो रहा है। हमारे मन में सकारात्मक ऊर्जा, मन का निर्माण हो रहा है और हम ईश्वर के निकट जा रहे हैं। आत्मा को जब हम परमात्मा के निकट ले जाने लगते हैं तो आत्मा-परमात्मा के बीच कोई दूरी नहीं रहती है। अपनी लिए जीना एक कहानी है और औरों के लिए जीना एक जिंदगानी है।

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अतिथिगण।

पहले खुद पर राज करना होगा-
उप्र के बुलंदशहर से आए भाजपा अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री और सांसद डॉ. भोला सिंह ने कहा कि यहां मंत्र दिया जाता है कि यदि हमने अपनेआप पर राज कर लिया तो हम दुनिया पर राज कर सकते हैं। यहां के पवित्र वातावरण का आप सभी भरपूर लाभ लें। एक राजनेता का कर्तव्य धर्म की रक्षा करना भी होता है। मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने आशीर्वचन दिए।

तीन अवस्थाओं से गुजरती है दुनिया-
अतिरिक्त महासचिव बीके राजयोगी बृजमोहन भाई ने कहा कि हर चीज अपनी तीन अवस्थाओं से गुजरती है- सतो, रजो और तमो। नवदुनिया के निर्माता, परमपिता ने जब दुनिया की स्थापना की थी, तब यह दुनिया स्वर्णिम दुनिया स्वर्ग, सतयुग थी। वहां सभी देवी-देवता थे, इसलिए हम सभी देवी-देवताओं के वंशज हैं। सतयुग में एक धर्म, एक राज्य, एक भाषा होती है। वहां हर चीज अपनी संपूर्ण अ‌वस्था सतो प्रधान रूप में होती है। धीरे-धीरे सृष्टि के क्रम में बदलाव आ जाता है और सतो से रजो और रजो से तमो अ‌वस्था आती है। वर्तमान में दुनिया की तमोप्रधान अ‌वस्था चल रही है। अब पुन: परमात्मा इस धरती पर आकर सतोप्रधान दुनिया, स्वर्णिम दुनिया की स्थापना कर रहे हैं। उस दुनिया में सभी सर्वगुण संपन्न, 16 कला संपूर्ण थे।   राजनीतिक प्रभाग की उपाध्यक्ष राजयोगिनी लक्ष्मी दीदी ने कहा कि राजनीति में अध्यात्म के समावेश से ही राजनीति की दशा और दिशा बदलेगी। राजनेताओं में निस्वार्थ समाजकल्याण की भावना का विकास होगा।

सम्मेलन में मौजूद देशभर से आए राजनेता। 

मुख्य तीन सत्ताएं होती हैं-
प्रशासक प्रभाग की राष्ट्रीय अध्यक्षा राजयोगिनी आशा दीदी ने कहा कि तीन सत्ताएं प्रमुख होती हैं-  परमात्म सत्ता, राज सत्ता, धर्म सत्ता। पहले जो राज सत्ता थी उसमें धर्म सत्ता और विज्ञान की सत्ता भी शामिल थी। शनै-शनै धर्म सत्ता और राज सत्ता अलग हो गईं। सवाल ये है कि हम कैसा अपना देश, कैसा विश्व चाहते हैं। हम अपने भारत को सोने की चिड़िया वाला भारत कहते हैं। वह प्रेरणादायक नेतृत्व, परमात्म शक्तियों और वरदानों से बनेगा। लीडर वही है जिसके प्रेरणादायक विचार और व्यक्तित्व होता है। नेता की पहचान इस बात से है कि आप करते क्या हैं, क्या कहते हैं और आप क्या हैं। राजनीतिक प्रभाग की मुख्यालय संयोजिका राजयोगिनी बीके ऊषा दीदी ने कहा कि देशभर से आए राजनेताओं का हृदय से स्वागत है। मैसूर से आए प्रभाग के सक्रिय सदस्य बीके रंगनाथ भाई, बीके ज्ञानेश्वरी बहन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मधुरवाणी ग्रुप के कलाकारों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।

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