– प्लेनरी सेशन (प्रथम) में जनसंचार में पारदर्शिता और विश्वास विषय पर हुआ चिंतन
– वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया शिक्षा से जुड़े दिग्गजों ने मीडिया की घटती विश्वसनीयता पर जताई चिंता
– शांतिवन में राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन जारी

शिव आमंत्रण, आबू रोड (राजस्थान)। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन में चल रहे राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन के पहले प्लेनरी सेशन में जनसंचार में पारदर्शिता और विश्वास विषय पर चिंतन हुआ। सेशन में देशभर से आए वक्ताओं ने विचार रखे। बता दें कि इस महासम्मेलन में देशभर से 1500 से अधिक पत्रकार, संपादक, मीडिया शिक्षक और विद्यार्थी भाग ले रहे हैं।
सेशन के मुख्य वक्ता मीडिया विंग के राष्ट्रीय संयोजक बीके सुशांत भाई ने कहा कि जब हम आत्मविवेक के साथ काम करते हैं। लोकहित में कंटेंट रचते हैं तो वह जरूर ही पॉजिटिव होता है। हमारी विश्वसनीयता, हमारी पारदर्शिता से ही हमारी टीआरपी और आर्थिक विकास संभव हो सकेगा। पारदर्शिता और विश्वास तो जनसंचार की नींव है। यदि हम खुद से सत्य हैं तो मैं सत्यवादी हूं। सत्य से ही पारदर्शिता आती है। स्वमान में स्वधर्म में रहने से और विवेक के आधार पर निर्णय लेते हैं तो हमें किसी प्रकार की चुनौती नहीं होती। सन्तुष्टता और खुशी जिसके पास है, वह बाहरी वैभव वस्तु की तरफ आकर्षित नहीं होता है।
भुवनेश्वर से आए वरिष्ठ पत्रकार संग्राम केशरी सारंगी ने कहा कि लोग जो देखना चाहते हैं, मीडिया वही दिखाता है। अगर लोग अच्छी खबर के बारे में पूछेंगे तो वही दिखाएंगे। सब अगर ओमशान्ति बोलेंगे तो हमारा आधा काम हो जाएगा। वॉर, क्राइम पर हेडलाइन्स होती हैं, लेकिन सब शांति में रहेंगे तो आधा काम हो जाएगा।

प्रभु से संवाद के लिए शुद्ध मन चाहिए-
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के प्रो. डॉ. संजीव गुप्ता ने कहा कि विश्वास और पारदर्शिता भारी शब्द लगते हैं, लेकिन इन्हें जीवन में उतारना उतना ही सरल है। जब हम प्रभु से संवाद करते हैं तो क्या कोई तैयारी करते हैं, बस शुद्ध मन चाहिए। यही तो पारदर्शिता है। इंदौर से आए वरिष्ठ पत्रकार क्रांति चतुर्वेदी ने कहा कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में बार-बार एक वाक्य आता है कि करोड़ सूर्य की रोशनी की भांति प्रकाश चमक रहा है। ब्रह्माकुमारीज़ और पत्रकारों के कार्यों से जो प्रकाश निकलता है, शायद यह उसी का उल्लेख है।
सोशल मीडिया डिटॉक्स की जरूरत है-
जयपुर स्थित मनिपाल विश्वविद्यालय की मीडिया, कम्युनिकेशन एंड फाइन आर्ट्स विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर वैशाली चतुर्वेदी ने कहा कि मीडिया को अपने दर्शकों से वही विश्वास बनाने की जरूरत है, जैसा विश्वास एक बच्चे को अपने पिता पर होता है, जब उसे वह हवा में उछाल रहे होते हैं। जरूरत है सोशल मीडिया डिटॉक्स की। सकारात्मक ऊर्जा को अपने अंदर भरना होगा। हम अपराध और युद्ध की खबरों से घिरे हुए हैं। टीआरपी की जंग, कार्पोरेट प्रेशर में लगातार चल रहे पत्रकार अपने दर्शकों को पारदर्शिता नहीं दे पाता। सच्ची-सार्थक खबरें जनता तक पहुंचाना हमें जवाबदेह बनाता है। डॉ. बीआरए विश्वविद्यालय आगरा के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रो. डॉ. संदीप शर्मा ने कहा कि जब तक मास कम्युनिकेशन के माध्यमों में विश्वास नहीं रहेगा, तो वह ज्यादा नहीं चल सकेगा। उस पर संस्थान और समाज का बहुत ज्यादा दवाब रहता है। कोई पत्रकार नहीं चाहता कि उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे। गुजरात विद्यापीठ अहमदाबाद के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. विनोद कुमार पांडे ने कहा कि अब अखबारों में भी पेड न्यूज़ छप रही हैं। अखबारों में आज भी गेट कीपिंग का चलन है, उसमें गलत खबरों का पता चल जाता है। लेकिन सोशल मीडिया में गलत खबर चेक करने का साधन नहीं है। इसके लिए आत्म नियंत्रण की जरूरत है।

इन्होंने भी किया संबोधित-
– आगरा की आरजे राखी त्यागी ने कहा कि किसी भी समाज की नींव तभी मज़बूत होती है, जब मीडिया पारदर्शी और सही हो। पारदर्शिता ही विश्वास की आधारशिला हैं। समाचार को तोड़ने-मरोड़ने से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। पारदर्शिता और विश्वास मीडिया की आत्मा है।
– नोएडा के पत्रकार कुमार नरेंद्र सिंह ने कहा कि हम उन परिस्थितियों का निर्माण करें, जिनमें पारदर्शिता और विश्वास हो। सबसे पहले हमें सामाजिक स्थितियों में बदलाव करने होंगे।
– हैदराबाद के इंटरनेशनल चैम्बर ऑफ पब्लिक रिलेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि शुभ कार्यों की शुरुआत घर से करनी होती है। बच्चा अपनी मां पर पूरा विश्वास करता है। जहां एक दूसरे पर विश्वास नहीं होता, वहां लोग लंबा नहीं चल पाते।
– विंग की जोनल कोऑर्डिनेटर बीके पूनम दीदी ने राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करवाया। संचालन बीके डॉ. नंदिनी दीदी ने किया। जोनल कोऑर्डिनेटर बीके नथमल भाई ने स्वागत भाषण दिया।
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इनसाइट सेशन-
चुनौतियों से जीतने के लिए आज आध्यात्मिक शक्ति की जरूरत: बीके उषा दीदी
– मन को सशक्त करने के लिए विशेष आध्यात्मिक सेशन का आयोजन
राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन में आध्यात्मिक शक्तियों से चुनौतियों पर विजय विषय पर इनसाइट सेशन का आयोजन किया गया। इसमें राजयोगिनी बीके ऊषा दीदी ने कहा कि इस युग को कहा ही गया है चुनौतियों का युग। चुनौतियों से किसी के जीवन में तनाव तो किसी के जीवन में अवसाद भी आ जाता है। इस युग में आध्यात्मिकता की शक्ति की आवश्यकता है। चुनौती हरेक के जीवन में आती है, लेकिन किसी-किसी के लिए यही चुनौती अवसर के द्वार खोलती है। जो सही निर्णय लेता है, उसके लिए अवसर के द्वार खोल देती है। जो स्वार्थ के कारण गलत निर्णय कर लेते हैं, बाद में उसे अफसोस करना पड़ता है। जीवन एक संघर्ष है। उसमें जीत प्राप्त करने के लिए विशुद्ध ज्ञान की आवश्यकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मनुष्य नेगेटिव बुद्धि का उपयोग कर विध्वंस की और बढ़ता है। ज्ञान और ध्यान मिलते हैं तो मन बिल्कुल शांत और स्पष्ट हो जाता है। शिवशक्ति लीडरशिप अप्रोच की बीके डॉ. सुनीता दीदी, जोनल कोऑर्डिनेटर बीके चंद्रकला दीदी, डॉ. श्रीगोपाल नारसन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन मुम्बई घाटकोपर सेंटर की सब ज़ोन इंचार्ज बीके शाकू ने किया।
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