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यहां हृदय रोगियों को कहा जाता है दिलवाले - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
यहां हृदय रोगियों को कहा जाता है दिलवाले

यहां हृदय रोगियों को कहा जाता है दिलवाले

मुख्य समाचार



– थ्रीडी कैड प्रोग्राम का दस दिवसीय शिविर शुरू
– राजयोग मेडिटेशन, व्यायाम और संतुलित भोजन से ठीक हो रहे हृदय रोगी
– कई मरीजों के 90 फीसदी तक ब्लॉकेज खुले, एंजियोग्राफी की जरूरत नहीं पड़ी

फैक्ट-
12 हजार से अधिक हृदय रोगी अब तक ठीक हुए
1998 में की गई थी कैड प्रोग्राम की शुरुआत

 शिव आमंत्रण, आबू रोड (राजस्थान)।
 ब्रह्माकुमारीज़ के मनमोहिनीवन परिसर में मंगलवार को दस दिवसीय थ्रीडी हार्ट केयर ट्रेनिंग प्रोग्राम का शुभारंभ किया गया। इसमें देशभर से 250 से अधिक हृदय रोगी भाग ले रहे हैं। इस दस दिवसीय शिविर में मरीजों को संतुलित भोजन, राजयोग मेडिटेशन, व्यायाम और संतुलित भोजन के जरिए बिना दवा के स्वस्थ जीवनशैली सिखाई जाती है। इसका परिणाम है कि आज देशभर से 12 हजार से अधिक हृदय रोगी बिना दवा के ठीक होकर स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।  
शुभारंभ पर संस्थान के अतिरिक्त महासचिव बीके करुणा भाई ने कहा कि कैड प्रोग्राम हृदय रोगियों के लिए वरदान साबित हुआ है। यहां से ट्रेनिंग लेकर आज हजारों लोग स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। यह अपने आप में बड़ी बात है। मेडिकल विंग के सचिव डॉ. बनारली लाल ने कहा कि आप सभी ट्रेनिंग के साथ यहां से अपने घर के आसपास नशाग्रसित लोगों को संकल्प कराएं कि जीवन में कभी भी नशा नहीं करेंगे। साथ खुद भी नशा नहीं करेंगे। ग्लोबल हॉस्पिटल के डॉ. रश्मिकांत आचार्य ने कहा कि कैड प्रोग्राम हृदय रोगियों के लिए एक आशा की किरण बनकर उभरा है।

कैड प्रोग्राम का दीप प्रज्जवलन कर शुभारंभ करते अतिथि।

अंतर्जगत की यात्रा है राजयोग-
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका डॉ. सविता दीदी ने राजयोग मेडिटेशन के बारे में बताते हुए कहा कि राजयोग मेडिटेशन अंतर्जगत की वह यात्रा है जिसमें हम अपने विचारों का आत्म निरीक्षण, आत्म विश्लेषण  और नियंत्रण करना सीखते हैं। यदि मन में श्रेष्ठ विचार होंगे तो पूरे शरीर के सभी अंगों में सूक्ष्म रूप में श्रेष्ठ भावनाओं का ही संचार होगा। इससे सभी अंग अच्छे से काम करने से हम स्वस्थ रहेंगे। इसलिए हमारे स्वस्थ रहने में मन का स्वस्थ होना बहुत ही जरूरी है। राजयोग से मन का प्रदूषण दूर हो जाता है। हृदय रोगी के लिए पहले दिन से कॉमेन्ट्री के माध्यम से मेडिटेशन की अवस्था में बैठाकर उसे प्रशिक्षक विचार देते जाते हैं और रोगी उस विचार के अनुसार अपने मन में इमेजीनेशन करता है।  

कैड प्रोग्राम में देशभर से आए हृदयरोगी।

1998 से चल रहा है कैड प्रोग्राम-
थ्रीडी कैड प्रोग्राम के निदेशक वरिष्ठ ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश कुमार गुप्ता ने बताया कि जैसा मन-वैसा तन- इस महावाक्य पर वर्षों तक शोध और रिसर्च कर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मेडिकल प्रभाग ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे डॉक्टर भी अचंभित हैं। इसे थ्री डायमेंशल हेल्थ केयर प्रोग्राम फॉर हेल्दी माइंड, हार्ट एवं बॉडी (कैड) प्रोग्राम नाम दिया गया। आध्यात्मिकता में रिसर्च कर इस पद्धति का विकास किया है, जो ह्रदय एवं डायबिटीज के रोगियों के लिए वरदान साबित हुई है। इसका उद्देश्य हृदय रोगियों को बिना बायपास सर्जरी और ऑपरेशन के ठीक करना है। 1998 में शुरू किए गए इस थ्रीडी प्रोग्राम में प्रशिक्षण लेकर अब तक करीब 12 हजार से अधिक हृदय रोगी ठीक हो चुके हैं।

90 फीसदी तक ब्लॉकेज हो गए सामान्य-
डॉ. गुप्ता ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान और मरीज के ठीक होने तक इन सभी को दिलवाले के नाम से पुकारा जाता है। यही कारण है कि मेडिटेशन, संतुलित व सात्विक आहार, व्यायाम और प्रशिक्षण से हजारों हृदय रोगियों का दिल फिर से सामान्य लोगों की तरह धड़कने लगा है। सैकड़ों ऐसे लोग हैं जिन्हें हार्ट में 90 फीसदी तक ब्लॉकेज हो चुके थे और डॉक्टर्स ने बायपास सर्जरी कराने की सलाह दी थी लेकिन कैड प्रोग्राम में प्रशिक्षण लेने के बाद आज वह स्वस्थ जीवनशैली जी रहे हैं। बायपास की भी जरूरत नहीं पड़ी और ब्लॉकेज भी सामान्य हो गए हैं।

क्या है कैड प्रोग्राम-
ग्लोबल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर माउण्ट आबू, रक्षा अनुसंधान एवं विकास परिषद एवं स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त प्रयास से फरवरी 1998 में सीएडी रिसर्च प्रोजेक्ट (थ्री डायमेंशल हेल्थ केयर प्रोग्राम फॉर हेल्दी माइंड, हार्ट एवं बॉडी) की नींव रखी गई। इसके तहत विभिन्न राज्यों से एंजियोग्राफी द्वारा प्रमाणित ह्रदय रोगियों पर राजयोग मेडिटेशन द्वारा आत्मा और मन का स्वास्थ्य, शुद्ध सात्विक आहार, सुबह सैर, रात्रि 10 बजे सोना और प्रात: ब्रह्ममुहूर्त में उठना, ध्रूमपान एवं मद्यपान निषेद्य और उचित दवाइयां युक्त स्वास्थ्य जीवनशैली का प्रयोग किया गया।

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