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परमात्मा हमें सर्व बंधनों से छुड़ाकर श्रीकृष्ण की दुनिया में चलने के लायक बना रहे: बीके ऊषा दीदी

परमात्मा हमें सर्व बंधनों से छुड़ाकर श्रीकृष्ण की दुनिया में चलने के लायक बना रहे: बीके ऊषा दीदी

मुख्य समाचार

– श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह धूमधाम से मनाया
– राधारानी ने नृत्य तो पालने में झूला झूलते कान्हा ने मोहा सभी का मन

शिव आमंत्रण, आबू रोड (राजस्थान)। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मुख्यालय शांतिवन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह धूमधाम से मनाया गया। इसमें बालिकाओं ने राधारानी के वेश में सुंदर नृत्य की प्रस्तुति दी तो पालने में झूलते कान्हा ने सभी का मन मोह लिया। समारोह में गीता ज्ञान विशेषज्ञ राजयोगिनी बीके ऊषा दीदी ने कहा कि सर्वगुण संपन्न, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण का जीवन 16 कला संपूर्ण, संपूर्ण निर्विकारी था। श्रीकृष्ण के जीवन के बारे में दिखाते हैं कि जेल में सात बंद तालों के बीच उनका जन्म हुआ, जो जन्म के बाद एक-एक करके खुलते गए। वास्तव में ताले बंधन की निशानी हैं। आध्यात्मिक रीति से देखें तो सात ताले जीवन में सात बंधन का प्रतीक हैं।

ऊषा दीदी: सात ताले, सात बंधनों का प्रतीक-
– पहला: देह का बंधन। जब जीवन में देह अभिमान, अहंकार आ जाता है तो यह सबसे बड़ा बंधन है।
– दूसरा: मन का बंधन। अनेक प्रकार के कमजोर विचारों के बंधन ताले के समान हैं, जो हमें आगे बढ़ने से रोकते हैं।
– तीसरा: देह के संबंधों का बंधन। मेरेपन का बंधन, देह के संबंध के मोह का बंधन। जब जीवन में मोह आ जाता है तो हम जीवन के वास्तविक उद्देश्य से दूर हो जाते हैं।
– चौथा: धन का बंधन। धन है तो परेशानी, नहीं है तो भी परेशानी। आज मानव धन के चक्कर में मनुष्यता को भूल गया है।  
– पांचवा: कर्मों का बंधन। मनुष्य के विकर्मों का बंधन भी उसे बांध रहा है, जिसके कारण कर्मभोग भोगना पड़ता है।
– छठा: धर्म का बंधन। आज अनेक प्रकार के धर्म, मठ, पंथ, संप्रदाय निकलते जा रहे हैं। धर्म का भी बहुत बड़ा बंधन है। क्योंकि मनुष्य स्वधर्म (मैं एक आत्मा हूं) को भूल गया है। वास्तव में हम सभी एक परमपिता परमात्मा की संतान आपस में भाई-भाई हैं।  
– सातवां- समय का बंधन। आज सभी के पास एक ही समस्या है कि मेरे पास समय नहीं है।  बहुत कुछ करना चाहते हैं लेकिन कर नहीं पाते हैं। ऐसे समय में कलियुग के अंत में परमात्मा आकर मनुष्य आत्माओं को सभी बंधनों से छुड़ाकर नई सतयुगी दुनिया, श्रीकृष्ण की दुनिया में हमें ले चलते हैं।

समारोह में मौजूद लोग।

परमात्मा ज्ञान मुरली से जीवन बना रहे दिव्य-
दिल्ली पांडव भवन की निदेशिका राजयोगिनी बीके पुष्पा दीदी ने कहा कि परमपिता शिव परमात्मा सच्चा गीता ज्ञान देकर हमें श्रीकृष्ण की दुनिया में चलने के लायक बना रहे हैं। हमारा जीवन दिव्य बना रहे हैं। प्यारे शिव बाबा, ब्रह्मा बाबा ने हमें ज्ञान मुरली का वह सुख दिया, जो सभी के मन को आकर्षित करती है। ज्ञान मुरली जीवन की सारी समस्याओं का समाधान कर हमें संपूर्णती का ओर ले जाने का माध्यम बनती है। वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके रुक्मिणी दीदी ने परमात्मा को भाेग स्वीकार कराया। मधुरवाणी ग्रुप के बीके सतीश भाई व साथियों ने जन्माष्टमी पर गीत प्रस्तुत किया।

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