सभी आध्यात्मिक जगत की सबसे बेहतरीन ख़बरें
ब्रेकिंग
गौरवपूर्ण वृद्धावस्था और सम्मानित जीवन हमारी संस्कृति है: केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार आने वाले समय में ब्रह्माकुमारीज़ विश्व शांति के प्रयासों का प्रमुख केंद्र होगा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनसंचार की नींव है पारदर्शिता और विश्वास 27 साल में थ्रीडी हेल्थ केयर से 12 हजार हृदय रोगी हुए ठीक राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन 2025 का किया उदघाटन प्रत्येक व्यक्ति एक यात्रा पर है, इसलिए अपना रोल बेहतर अदा करें: रेलवे महाप्रबंधक अमिताभ यमराज की ललकार, लापरवाही की तो ले जाऊंगा अपने साथ
27 साल में थ्रीडी हेल्थ केयर से 12 हजार हृदय रोगी हुए ठीक - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
27 साल में थ्रीडी हेल्थ केयर से 12 हजार हृदय रोगी हुए ठीक

27 साल में थ्रीडी हेल्थ केयर से 12 हजार हृदय रोगी हुए ठीक

मुख्य समाचार

विश्व हृदय दिवस पर विशेष….

27 साल में थ्रीडी हेल्थ केयर से 12 हजार हृदय रोगी हुए ठीक

– थ्रीडी हेल्थ केयर प्रोग्राम में हृदयरोगियों काे कहा जाता है दिलवाले
– ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान का भारत के इतिहास में इतने मरीज ठीक करने का रिकार्ड
– भारत को हृदय रोग मुक्त करने की जिद… शोध के लिए हर मरीज का तैयार किया गया है डाटाबेस

– हृदय रोग विशेषज्ञों के लिए शोध का विषय बना थ्रीडी हेल्थकेयर प्रोग्राम

संबोधित करते डॉ. सतीश गुप्ता।

शिव आमंत्रण, आबू रोड (राजस्थान)। थ्रीडी हेल्थ केयर प्रोग्राम (कैड)। एक ऐसा अनोखा ट्रेनिंग प्रोग्राम है जहां हृदयरोगियों काे मरीज न कहकर दिलवाले कहा जाता है। यहां मरीज एक-दूसरे को दिलवाले कहकर पुकारते हैं। दस दिवसीय इस ट्रेनिंग में भाग लेकर पिछले 27 साल में 12 हजार से अधिक हृदय रोगी ठीक हो चुके हैं या स्वस्थ जिंदगी जी रहे हैं। रविवार को 108वें कैड प्रोग्राम का शुभारंभ किया गया। इसमें देशभर से पहुंचे 125 हृदय रोगी भाग ले रहे हैं। इन रोगियों में कुछ डॉक्टर भी शामिल हैं।  
हम बात कर रहे हैं ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मेडिकल विंग द्वारा चलाए जा रहे थ्रीडी हेल्थ केयर प्रोग्राम की। इसके तहत मुख्यालय शांतिवन द्वारा हर तीन माह में ट्रेनिंग कैंप आयोजित किया जाता है, जिसमें देशभर से 100 से अधिक हृदय रोगी भाग लेते हैं। इस दौरान उन्होंने ब्रह्ममुहूर्त में उठने से लेकर रात तक सोने की एक विधिवत दिनचर्या का पालन करना होता है। इसमें मुख्य रूप से दो बातों पर फोकस किया जाता है। पहला है सकारात्मक सोच और दूसरा है मेडिटेशन। हमें क्या सोचना है, कितना सोचना है, कैसे सोचना है और परमसत्ता से अपना संबंध कैसे स्थापित करना है। इसके अलावा ट्रेनिंग के दौरान सभी मरीजों को एक्सरसाइज और संतुलित आहार पर भी फोकस किया जाता है। डॉक्टर्स के शोध के लिए यहां हर मरीज का डाटाबेस भी मेटेंन किया जा रहा है। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान का भारत के इतिहास में इतने मरीज ठीक करने का अपने आप में एक रिकार्ड है।

90 फीसदी तक ब्लॉकेज हो गए सामान्य-
इस प्रशिक्षण के दौरान और मरीज के ठीक होने तक इन सभी को दिलवाले के नाम से पुकारा जाता है। यही कारण है कि मेडिटेशन, संतुलित व सात्विक आहार, व्यायाम और प्रशिक्षण से हजारों हृदय रोगियों का दिल फिर से सामान्य लोगों की तरह धड़कने लगा है। सैकड़ों ऐसे लोग हैं जिन्हें हार्ट में 90 फीसदी तक ब्लॉकेज हो चुके थे और डॉक्टर्स ने बायपास सर्जरी कराने की सलाह दी थी लेकिन कैड प्रोग्राम में प्रशिक्षण लेने के बाद आज वह स्वस्थ जीवनशैली जी रहे हैं। बायपास की भी जरूरत नहीं पड़ी और ब्लॉकेज भी सामान्य हो गए हैं।

ज्यादातर बीमारियों का कारण है मन-
कैड प्रोजेक्ट के को-ऑर्डिनेटर व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश गुप्ता ने बताया कि विभिन्न शोध में पाया गया है कि 95 फीसदी बीमारियों का कारण हमारा मन है। मेडिकल साइंस ने शरीर की बीमारियों का इलाज तो खोज लिया है लेकिन मन की बीमारियों का अभी तक कोई इलाज संभव नहीं हो पाया है। सिर्फ मेडिटेशन से ही मन के सभी प्रकार के रोगों का उपचार संभव है। सबसे मन में तनाव उत्पन्न होता है, जिससे शरीर में बीमारी आती है। मन की बीमारियों जैसे- जल्दबाजी, चिंता, गुस्सा, डर (डिप्रेशन), हाईपरटेंशन, जल्दी में रहना, असंतोष, नकारात्मक विचार से मन बीमार हो जाता है। जैसे मन में विचार होते हैं वैसा ही इनका शरीर पर प्रभाव पड़ता है। धीरे-धीरे यह शरीर में विकृति (बीमारी) का कारण बनते हैं। इन सभी मानसिक विकृतियों का मुख्य कारण गलत जीवनशैली है।

संबोधित करते डॉक्टर।

मेडिटेशन से हम अपने जींस को भी मोडिफाई कर सकते हैं-
शुभारंभ पर डॉ. गुप्ता ने कहा कि थ्रीडी हेल्थ केयर से हम अपने जींस को भी मोडिफाई कर सकते हैं। इस बात को ट्रेनिंग लेकर अनेक मरीजों ने साबित कर दिखाया है। मेरे पास एक मरीज आया जिसके पांचों भाई को हार्ट की दिक्कत थी, लेकिन उसने मेडिटेशन के अभ्यास से खुद को नार्मल इंसान की तरह स्वस्थ और फिट कर लिया। थ्रीडी डायमेंशन तकनीक से आत्मा, मन और शरीर पर काम किया जाता है। इसमें हेल्दी हार्ट, हेल्दी माइंड, हेल्दी बॉडी की तकनीक सिखाई जाती है।

क्या है कैड प्रोग्राम-
ग्लोबल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर माउण्ट आबू, रक्षा अनुसंधान एवं विकास परिषद एवं स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त प्रयास से फरवरी 1998 में सीएडी रिसर्च प्रोजेक्ट (थ्री डायमेंशल हेल्थ केयर प्रोग्राम फॉर हेल्दी माइंड, हार्ट एवं बॉडी) की नींव रखी गई। इसके तहत विभिन्न राज्यों से एंजियोग्राफी द्वारा प्रमाणित ह्रदय रोगियों पर राजयोग मेडिटेशन द्वारा आत्मा और मन का स्वास्थ्य, शुद्ध सात्विक आहार, सुबह सैर, रात्रि 10 बजे सोना और प्रात: ब्रह्ममुहूर्त में उठना, ध्रूमपान एवं मद्यपान निषेद्य और उचित दवाइयां युक्त स्वास्थ्य जीवनशैली का प्रयोग किया गया।

प्रशिक्षण में तीन बातों पर रहता है फोकस-  
पहला: मेडिटेशन- इस प्रशिक्षण में आबू रोड आने वाले प्रत्येक मरीज के लिए सबसे पहले राजयोग मेडिटेशन का प्रशिक्षण दिया जाता है। सभी को ब्रह्ममुहूर्त में 4 बजे उठना कमपलसरी होता है। इस दौरान गाइड मेडिटेशन करने के लिए विचार देते हैं और उसी अनुसार मरीज उसे फॉलो करते हुए मन ही मन में उसे विजुलाइज करते हैं।

दूसरा: हेल्दी भोजन- कैड प्रोग्राम में मरीज के लिए संतुलित और हेल्दी डाइट दी जाती है। सुबह, दोपहर और रात के भोजन का एक तय मीनू रहता है। कब, क्या और कितना ग्रहण करना है, यह सब तय होता है। खासतौर पर सलाद और अंकुरित अनाज को शामिल किया जाता है।

तीसरा: व्यायाम- सभी प्रशिक्षाणर्थियों के लिए रोज सुबह व्यायाम, तेज पैदल चलना कमपलसरी रहता है। जो मरीज पहले दिन आते हैं और आधा किमी पैदल नहीं चल पाते थे वह दस दिन के प्रशिक्षण में ही पांच किमी तक पैदल चलने लगते हैं।
—————
विश्व में डायबिटीज और हार्ट महामारी बन चुकी है। स्ट्रैस और एंजायटी हार्ट की गति को बढ़ाता है। ब्लड में कोर्टिसोल रिलीज हो रहा है, इससे हार्ट की गति बढ़ती है। हाल ही में मेरे पास दो मरीज आए एक की उम्र 22 साल और एक की 23 साल थी। दोनों के 90 फीसदी ब्लॉकेज थे। जबकि उनकी फैमिली की कोई मेडिकल हिस्ट्री भी नहीं थी। जांच के सामने आया कि स्ट्रेस के कारण ही उन्हें ब्लॉकेज हुए हैं। हार्ट अटैक का मुख्य कारण आज तनाव (स्ट्रैस) सामने आ रहा है।
डॉ. आशीष अग्रवाल, निदेशक, कार्डियोलाजी डिपार्टमेंट, जेएलएन मेडिकल कॉलेज, अजमेर, राजस्थान

कैड प्रोग्राम के शुभारंभ पर ट्रेनिंग में मौजूद देशभर से आए हृदयरोगी।

ट्रेनिंग में आए मरीजों के अनुभव-
– गुजरात ऊंझा से आए जगदीश कुमार ने बताया कि 16 साल पहले मुझे अटैक आया। एंजियोग्राफी में तीन आर्टनरी में 90, 85, 70 फीसदी ब्लॉकेज आए। साथ ही मुझे डायबिटीज भी थी और इंसुलिन लेता था। शुगर 450 के ऊपर रहती थी। डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए कहा था। 15 साल पहले मैंने थ्रीडी कैड प्रोग्राम अटेंड किया। प्रोग्राम के बाद मात्र तीन महीने में ही मेरी हार्ट पंपिंग 25 से बढ़कर 55 हो गई। इंसुलिन बंद हो गया। वजन 102 किलो से 70 किलो हो गया। अभी मेरी उम्र 70 साल है और पूरी तरह से फिट हूं।
– महाराष्ट्र नागपुर के श्रीराम कोकले ने बताया कि 2019 में पता चला कि तीनों आर्टनरी में ब्लॉकेज हैं। फिर यहां ट्रेनिंग प्रोग्राम में भाग लेने के बाद पांच माह में ही सब क्लीयर हो गई। आज शुगर पूरी रिवर्स हो गई है। वजन 81 किलो से 67 किलो हो गया है। मैं मेडिटेशन, एक्सरसाइज, डाइट हर चीज को पूरी तरह से फॉलो करता हूं।

इन्होंने भी किया संबोधित-
ट्रेनिंग के शुभारंभ पर ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. प्रताप मिड्‌ढा, पीआरओ बीके कोमल भाई, लाइफस्टाइल डिसीज रिवर्सल ट्रेनर बीके बाला दीदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन बीके युगरतन ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *