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हर ग्राम पंचायत अपना वॉटर बजट बनाए, बारिश का पानी ज्यादा से ज्यादा सहेजना होगा - Shiv Amantran | Brahma Kumaris
हर ग्राम पंचायत अपना वॉटर बजट बनाए, बारिश का पानी ज्यादा से ज्यादा सहेजना होगा

हर ग्राम पंचायत अपना वॉटर बजट बनाए, बारिश का पानी ज्यादा से ज्यादा सहेजना होगा

मुख्य समाचार
  • विश्व जल संरक्षण दिवस पर ब्रह्माकुमारीज ने शुरू किया जल सप्ताह
  • सप्ताहभर संस्थान के देशभर के सेवाकेंद्रों पर जल संरक्षण को लेकर होंगे आयोजन
  • भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और ब्रह्माकुमारीज द्वारा संयुक्त रूप से देशभर में आठ माह तक चलाया जाएगा जल जन अभियान

शिव आमंत्रण,आबू रोड/राजस्थान। ब्रह्माकुमारीज संस्थान स्थानीय प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में शांतिवन परिसर स्थित डायमंड हॉल में बुधवार को विश्व जल संरक्षण दिवस पर जल जन अभियान के तहत सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जल बचेगा तो कल बचेगा। हम सभी को मिलकर जल बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करना होंगे। बता दें कि भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और ब्रह्माकुमारीज द्वारा संयुक्त रूप से देशभर में आठ माह तक जल जन अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत संस्थान के देशभर में स्थित हजारों सेवाकेंद्रों के माध्यम से जल संरक्षण को लेकर बीके सदस्य आमजन में जागरूकता फैलाएंगे। लोगों को पानी का महत्व बताते हुए मोटिवेट करेंगे।
सम्मेलन में सिरोही से आए वाटर सुपरिटेंडेंट इंजीनियर नरेंद्र सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायत के अंदर जब ग्राम सभा होती है तब वहां जाकर हम एक प्रस्ताव रखें कि हमारे गांव के अंदर जितना भी पानी बारिश से इक_ा होता है, उसका हम वाटर बजट बनाएं। जिस साल अधिक बारिश होती है, उस साल हम अधिक पानी का खपत करने वाली फसल को लें, लेकिन जिस वर्ष कम बारिश होती है उस समय कम पानी खर्च करने वाली फसल उगाने का संकल्प लें। इसे कहते हैं वाटर बजट।
सिरोही से आए एक्सीक्यूटिव इंजीनियर जितेंद्र कोठारी ने कहा कि बारिश में पहाड़ी इलाके का पानी तेजी से बहकर समंदर में ना चला जाए इसके लिए हमें उपाय करने हैं कि हम आसपास ऐसा कुछ करें जिससे पानी तेजी से आगे ना बढ़ पाए।

संस्थान में एक-एक बूंद जल का किया जाता है उपयोग-
मल्टीमीडिया चीफ बीके करुणा भाई ने कहा कि जब में ब्रह्माकुमारीज में आया और आबूरोड में बनास नदी का नाम सुना और देखने गया तो वहां पानी नहीं था, नदी सूखी हुई थी, तब मुझे पता चला कि बिना पानी के भी नदी होती है। संस्थान में जल संरक्षण को लेकर वर्षों पहले से ही प्रयास किए जा रहे हैं। हम लोग एक-एक बूंद जल का उपयोग करते हैं। सीवरेज पानी का ट्रीटमेंट करके उसका उपयोग पेड़-पौधों और बगीचों की सिंचाई में किया जाता है। ब्रह्माकुमारीज संस्थान के कार्यकारी सचिव बीके मृत्युंजय ने कहा कि जल है तो जीवन है। यदि पानी की समस्या अगर इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले समय में पानी का अकाल पड़ जायेगा। इसलिए हमें पानी के लिए अभी से बचाने का प्रयास करना चाहिए।

सभी जल बचाने का भी ज्ञान अवश्य सुनाएं-
स्वागत भाषण देते हुए पीआरओ बीके कोमल ने कहा कि हम सब संकल्प करें कि ज्यादा से ज्यादा पानी बचाएंगे। क्योंकि हम सब जो पानी उपयोग करते हैं, वह एक बूंद कीमती है। आप लोग जहां से हैं वहां भी पानी बचाइए। जल संकट वैश्विक समस्या के रूप में उभर रहा है। भारत सरकार से मिलकर हम लोग जल जन अभियान चला रहे हैं। आपको जहां एक गलास पानी की जरूरत है वहां पौन ग्लास उपयोग करें। वह बचत दूसरे के लिए काम आ जाएगा। सिरोही जिले में जल स्तर बहुत ही नीचे है। बड़ी मुश्किल से सबके लिए पानी का प्रबंध हो पाता है। जहां आप परमात्मा का ज्ञान सुनाते हैं वहां आप जल बचाने का भी ज्ञान अवश्य दें क्यों कि जल है तो जीवन है।

ढाई लाख पंचायतों तक पहुंचने का लक्ष्य-
तपोवन स्थित किसान ट्रेनिंग सेंटर के बीके चंद्रेश ने कहा कि हम सभी जानते हैं भारत कृषि प्रधान देश है। हमारी 70 फीसदी आबादी गांव में रहती है। हमारे देश में जितना पानी खपत होता है, उसका 89 फीसदी पानी सिर्फ खेती के लिए खर्च होता है। भारत सरकार के उन्नत अभियान कार्यक्रम से जुडक़र देश के करीब 50,000 हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूट से मिलकर ढाई लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचने का लक्ष्य है। साथ में दुनिया भर के 5000 ब्रह्माकुमारीज के केंद्र एक-एक गांव में जाकर जल जन अभियान के अंतर्गत जल का संचय शुरू करेगी।
शांतिवन जल विभाग के प्रमुख बीके पारी ने कहा कि जल जन अभियान करने का हमारा उद्देश्य है कि हमें जल के स्रोत को बढ़ाना है। जैसे अटल भूजल योजना, जल जीवन मिशन जैसे कई कार्यक्रम सरकार भी कर रही है, उसके साथ हमें भी सहयोग देना है। संचालन बीके डॉ. सविता बहन ने किया।
जल प्रदर्शनी का किया उदघाटन: इस अवसर पर शांतिवन में लगे जल बचाओ प्रदर्शनी का भी उदघाटन किया गया। जिसमें पानी के होने वाले नुकसान तथा उसके बचाव के तरीके बताये गये।
इस दौरान संस्थान के बीके शम्भू, बीके शिविका, बीके चुनेश समेत कई लोग मौजूद थे।

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